Uttarakhand: उत्तराखंड के जंगलों में वनाग्नि का तांडव अब तक 309 घटनाएं और गढ़वाल मंडल सबसे अधिक प्रभावित – The Hill News

Uttarakhand: उत्तराखंड के जंगलों में वनाग्नि का तांडव अब तक 309 घटनाएं और गढ़वाल मंडल सबसे अधिक प्रभावित

देहरादून। उत्तराखंड में गर्मी का प्रकोप बढ़ने के साथ ही प्रदेश के जंगलों में आग लगने की घटनाएं तेजी से बढ़ रही हैं। 15 फरवरी से शुरू हुए फायर सीजन के बाद से अब तक राज्य में वनाग्नि की कुल 309 घटनाएं दर्ज की जा चुकी हैं, जिन्होंने बेशकीमती वन संपदा को भारी नुकसान पहुंचाया है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, इन घटनाओं के कारण लगभग 257 हेक्टेयर वन क्षेत्र अब तक राख हो चुका है। आग का सबसे भीषण रूप गढ़वाल मंडल में देखने को मिल रहा है, जहां अकेले ही 227 घटनाएं सामने आई हैं।

वन विभाग की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, गढ़वाल मंडल के वनों को आग ने बुरी तरह अपनी चपेट में लिया है, जिससे यहां 185 हेक्टेयर वन क्षेत्र प्रभावित हुआ है। इसके मुकाबले कुमाऊं मंडल में स्थिति कुछ कम गंभीर है, जहां अब तक आगजनी की 50 घटनाएं दर्ज की गई हैं और लगभग 47 हेक्टेयर जंगल जल गया है। बृहस्पतिवार को भी चमोली और टिहरी जैसे पर्वतीय जिलों से जंगलों में आग लगने की नई सूचनाएं मिली हैं, जिससे वन विभाग की चिंताएं और बढ़ गई हैं।

प्रदेश के विभिन्न वन प्रभागों की स्थिति देखें तो बद्रीनाथ वन प्रभाग में इस साल आग ने सबसे ज्यादा तांडव मचाया है। यहां अब तक कुल 72 घटनाएं हो चुकी हैं, जिनमें 24 हेक्टेयर जंगल जल चुका है। इसके अलावा रुद्रप्रयाग में 32, केदारनाथ वन्य जीव प्रभाग में 31, पिथौरागढ़ में 29 और अलकनंदा में 21 वनाग्नि की घटनाएं रिपोर्ट हुई हैं। चमोली के उच्च हिमालयी क्षेत्रों से लेकर तराई के जंगलों तक धुएं का गुबार और आग की लपटें पर्यावरण के लिए बड़ा खतरा बन गई हैं।

हैरानी की बात यह है कि वनाग्नि की भयावह स्थिति के बावजूद वन विभाग की रिपोर्टिंग प्रणाली सुस्त नजर आ रही है। अत्याधुनिक सुविधाओं और सैटेलाइट मॉनिटरिंग के दावों के बीच विभाग के पास आगजनी की घटनाओं की प्रतिदिन की सटीक रिपोर्ट उपलब्ध नहीं हो पा रही है। मुख्य वन संरक्षक (वनाग्नि एवं आपदा प्रबंधन) सुशांत पटनायक ने इस देरी को स्वीकार करते हुए बताया कि आग की सूचना मिलने के तुरंत बाद उसी दिन प्रभावित क्षेत्रफल का सटीक आकलन करना कठिन होता है, जिसके कारण रिपोर्ट तैयार होने में समय लग रहा है।

जंगलों में लगी यह आग न केवल पेड़ों को जला रही है, बल्कि वन्यजीवों के आवास भी नष्ट कर रही है और पहाड़ों के तापमान में भारी बढ़ोतरी का कारण बन रही है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि वनाग्नि को रोकने के लिए विभाग के जमीनी प्रयास नाकाफी साबित हो रहे हैं। फायर वॉचर्स और स्टाफ की कमी के कारण आग पर समय रहते काबू पाना मुश्किल हो रहा है। यदि आने वाले दिनों में बारिश नहीं होती है और तापमान में इसी तरह बढ़ोतरी जारी रहती है, तो उत्तराखंड के जंगलों के लिए यह सीजन और भी अधिक विनाशकारी साबित हो सकता है। फिलहाल, वन विभाग संवेदनशील क्षेत्रों में निगरानी बढ़ाने और आग पर काबू पाने की कोशिशों में जुटा हुआ है।

 

Pls read:Uttarakhand: 2027 में कांग्रेस जहां से कहेगी वहीं से चुनाव लड़ूंगा हरक सिंह रावत ने की दावेदारी

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *