मॉस्को। रूस की जेलों में बंद कैदियों की संख्या में पिछले पांच वर्षों के दौरान ऐतिहासिक रूप से 40 प्रतिशत की भारी गिरावट दर्ज की गई है। रूस की जेल सेवा के प्रमुख अर्काडी गोस्तेव ने सार्वजनिक रूप से इस तथ्य को स्वीकार किया है कि इस कमी के पीछे सबसे बड़ा कारण यूक्रेन के साथ जारी भीषण युद्ध है। युद्ध की जरूरतों को पूरा करने के लिए रूस ने बड़े पैमाने पर कैदियों को अपनी सेना में भर्ती किया है, जिससे जेलों के बैरक खाली हो रहे हैं।
आंकड़ों के अनुसार, साल 2021 के अंत तक रूस की विभिन्न जेलों में कैदियों की कुल संख्या लगभग 4,65,000 थी। वर्तमान समय में यह आंकड़ा सिमटकर केवल 2,82,000 रह गया है। यह गिरावट दर्शाती है कि पिछले कुछ वर्षों में 1,80,000 से अधिक कैदी जेलों से बाहर आए हैं। मौजूदा समय में जेलों में जो कैदी बचे हैं, उनमें से लगभग 85,000 लोग ऐसे हैं जो विचाराधीन हिरासत में हैं और उनके मामलों पर अभी कानूनी कार्यवाही चल रही है।
कैदियों की संख्या में इस अप्रत्याशित कमी की मुख्य वजह बताते हुए अर्काडी गोस्तेव ने जानकारी दी कि मॉस्को ने जेलों में सजा काट रहे दोषियों को यूक्रेन के मोर्चे पर लड़ने के लिए भेजने की नीति अपनाई है। पिछले चार वर्षों से जारी इस युद्ध के दौरान रूसी प्रशासन ने कैदियों के सामने एक आकर्षक प्रस्ताव रखा है। इसके तहत कैदियों को सेना में भर्ती होने का अनुबंध दिया जाता है और वादा किया जाता है कि यदि वे युद्ध के मैदान में जीवित बच जाते हैं, तो उनकी शेष सजा पूरी तरह माफ कर दी जाएगी।
अर्काडी गोस्तेव ने यह भी बताया कि कैदियों का उपयोग केवल युद्ध के मैदान तक ही सीमित नहीं है। साल 2026 तक के आंकड़ों के अनुसार, लगभग 16,000 कैदी सैन्य विनिर्माण और युद्ध से जुड़े साजो-सामान बनाने के काम में लगे हुए हैं। ये कैदी रूसी सेना की जरूरतों को पूरा करने के लिए हर साल करीब 5.5 अरब रूबल (लगभग 65 मिलियन यूरो) मूल्य के सैन्य सामानों का उत्पादन कर रहे हैं। जेल प्रमुख के अनुसार, कैदियों की संख्या घटने का प्रमुख कारण सेना में भर्ती अभियान है, हालांकि कुछ मामलों में सजा पूरी होने और अदालती फैसलों से बरी होने के कारण भी गिरावट आई है।
सैन्य भर्ती की यह रणनीति 2022 में शुरू हुई थी। शुरुआत में यह पहल ‘वैगनर ग्रुप’ नामक एक निजी सैन्य संगठन द्वारा की गई थी, जिसे बाद में 2023 से रूस के रक्षा मंत्रालय और सशस्त्र बलों ने औपचारिक रूप से अपना लिया। नियमों के अनुसार, गंभीर अपराधों के दोषी भी समय से पहले रिहाई के बदले सैन्य अनुबंध पर हस्ताक्षर कर सकते हैं। इन कैदियों को मुख्य रूप से ‘स्टॉर्म जेड’ नामक विशेष इकाइयों में शामिल किया जाता है।
हालांकि, कैदियों के लिए यह राह बेहद चुनौतीपूर्ण है। उन्हें मोर्चे पर भेजने से पहले बहुत ही कम समय का बुनियादी प्रशिक्षण दिया जाता है। इसके बाद उन्हें युद्ध के सबसे संवेदनशील और खतरनाक हिस्सों में तैनात किया जाता है, जहां आम सैनिकों की तुलना में कैदियों को सबसे अधिक जान-माल का नुकसान उठाना पड़ता है। रूस की यह रणनीति एक ओर जहां युद्ध के लिए मानव संसाधन की कमी को पूरा कर रही है, वहीं दूसरी ओर जेलों के बोझ को भी कम कर रही है। अब रूस के जेल प्रशासन के लिए इतनी बड़ी संख्या में कैदियों की कमी के बाद जेलों का प्रबंधन करना एक नया अनुभव साबित हो रहा है।
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