देहरादून। उत्तराखंड शासन ने प्रदेश के औद्योगिक क्षेत्रों में शांति व्यवस्था बनाए रखने और श्रमिकों के अधिकारों को सुरक्षित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। सचिवालय सभागार में प्रमुख सचिव आर.के. सुधांशु की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई, जिसमें उद्योग जगत के प्रतिनिधियों और संबंधित विभागीय अधिकारियों ने हिस्सा लिया। बैठक का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि राज्य के विकास में रीढ़ की हड्डी माने जाने वाले श्रमिकों को उनके सभी वैधानिक लाभ और सुविधाएं बिना किसी बाधा के प्राप्त हों।
बैठक के दौरान प्रमुख सचिव आर.के. सुधांशु ने प्रदेश में औद्योगिक वातावरण को सौहार्दपूर्ण बनाए रखने पर विशेष जोर दिया। उन्होंने आयुक्त उद्योग और आयुक्त श्रम सहित सभी औद्योगिक संगठनों के प्रतिनिधियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि श्रमिकों को मिलने वाले न्यूनतम वेतन, ओवरटाइम भुगतान, बोनस और अन्य सुविधाओं में किसी भी प्रकार की कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि सभी औद्योगिक संस्थानों की यह जिम्मेदारी है कि वे सरकार द्वारा निर्धारित मानकों और श्रम कानूनों के प्रावधानों का पूरी तरह पालन करें। वैधानिक सुविधाओं का वितरण न केवल समयबद्ध होना चाहिए, बल्कि इसमें पूरी पारदर्शिता भी बरती जानी चाहिए।
औद्योगिक शांति के महत्व को रेखांकित करते हुए आर.के. सुधांशु ने सुझाव दिया कि प्रबंधन और श्रमिकों के बीच नियमित संवाद की कमी नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि उद्योग संस्थानों को अपने श्रमिकों के साथ निरंतर बातचीत करनी चाहिए ताकि उनकी समस्याओं को समय रहते सुलझाया जा सके। श्रमिकों को विश्वास में लेकर कार्य करने से न केवल उत्पादन बढ़ता है, बल्कि किसी भी प्रकार के असंतोष की संभावना भी कम हो जाती है। इसके साथ ही, उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे राज्य की औद्योगिक इकाइयों में कार्यरत श्रमिकों को मिल रही सुविधाओं की नए सिरे से व्यापक स्क्रीनिंग करें। यह प्रक्रिया यह सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक है कि धरातल पर मानक प्रभावी ढंग से लागू हो रहे हैं।
बैठक में भ्रामक सूचनाओं और बाहरी हस्तक्षेप के विषय पर भी गंभीर चर्चा हुई। प्रमुख सचिव ने अधिकारियों को सतर्क करते हुए कहा कि यदि कोई बाहरी व्यक्ति या तत्व औद्योगिक क्षेत्रों में भ्रम फैलाने या दुष्प्रचार के माध्यम से शांति भंग करने की कोशिश करता है, तो उसके विरुद्ध कठोर वैधानिक कार्रवाई की जाए। सरकार का लक्ष्य एक ऐसा सुरक्षित वातावरण तैयार करना है जहां श्रमिक और उद्योगपति दोनों आपसी सामंजस्य के साथ कार्य कर सकें।
औद्योगिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने भी बैठक में अपना पक्ष रखा और सरकार को वस्तुस्थिति से अवगत कराया। प्रतिनिधियों ने आश्वस्त किया कि वर्तमान में उनके संस्थानों द्वारा निर्धारित मानकों के अनुसार ही न्यूनतम वेतन और अन्य अनिवार्य सुविधाएं श्रमिकों को प्रदान की जा रही हैं। उन्होंने सरकार के निर्देशों का पालन करने और औद्योगिक शांति बनाए रखने में पूर्ण सहयोग का भरोसा दिया।
प्रमुख सचिव आर.के. सुधांशु ने अंत में कहा कि राज्य सरकार और श्रम विभाग श्रमिकों की समस्याओं के प्रति पूरी तरह संवेदनशील हैं। उन्होंने दोहराया कि श्रमिकों के हितों की रक्षा करना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। इस महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक में सचिव श्रीधर बाबू अदंकी, आयुक्त उद्योग सौरव गहरवार, आयुक्त श्रम विभाग पी.सी. दुम्का सहित विभिन्न औद्योगिक संगठनों के वरिष्ठ प्रतिनिधि उपस्थित रहे। शासन का यह कड़ा रुख राज्य में उद्योगों और श्रमिकों के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करने की दिशा में प्रभावी साबित होगा।