रुड़की। उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू होने के बाद इसके प्रावधानों के तहत हलाला का पहला आधिकारिक मामला रुड़की के बुग्गावाला थाना क्षेत्र में दर्ज किया गया है। पुलिस ने इस संवेदनशील मामले की गहनता से जांच करने के बाद अब संबंधित धाराओं में आरोप पत्र (चार्जशीट) न्यायालय में पेश कर दिए हैं। यह मामला तब चर्चा में आया जब एक विवाहित महिला ने अपने पति और ससुराल पक्ष पर तीन तलाक, दहेज उत्पीड़न और हलाला के लिए दबाव बनाने के गंभीर आरोप लगाए थे।
प्रकरण की शुरुआत में, जब महिला ने अपनी शिकायत दर्ज कराई थी, तब पुलिस ने केवल दहेज उत्पीड़न और मुस्लिम विवाह अधिनियम की धाराओं के तहत मुकदमा पंजीकृत किया था। उस समय प्राथमिकी में हलाला से संबंधित यूसीसी की विशिष्ट धाराएं शामिल नहीं की गई थीं, जिससे पीड़िता के परिजनों में काफी रोष व्याप्त था। पुलिस का तर्क था कि मामले की जांच के बाद ही आवश्यक धाराओं में बढ़ोतरी की जाएगी। चूंकि उत्तराखंड में यूसीसी 27 जनवरी 2025 को ही लागू हुआ था, इसलिए पुलिस प्रशासन इस नए कानून के तहत कार्रवाई करने में काफी सावधानी बरत रहा था।
मामले की गंभीरता को देखते हुए वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने विधिक जानकारों से राय मशविरा किया और लंबी कानूनी माथापच्ची के बाद मुकदमे में यूसीसी के तहत हलाला की धारा 32(1)(3) को जोड़ा गया। यह राज्य का पहला ऐसा मामला है जिसमें यूसीसी के इन विशेष प्रावधानों का उपयोग किया गया है। इस कानून के तहत यदि हलाला का आरोप सिद्ध हो जाता है, तो दोषियों को अधिकतम तीन साल की जेल और जुर्माने की सजा हो सकती है।
पुलिस जांच के अनुसार, महिला ने आरोप लगाया था कि उसके पति ने उसे तीन तलाक दिया और फिर दोबारा साथ रहने के लिए उस पर हलाला की शर्मनाक प्रक्रिया का दबाव बनाया गया। पुलिस ने इन आरोपों की सत्यता जांचने के लिए साक्ष्यों का संकलन किया और पाया कि मामला यूसीसी के प्रावधानों के तहत दंडनीय है। एसएसपी नवनीत सिंह भुल्लर ने बताया कि विवेचना के दौरान सभी तकनीकी और कानूनी पहलुओं को ध्यान में रखा गया है। पुलिस ने मामले की गहन छानबीन के बाद अब सक्षम न्यायालय में अपनी रिपोर्ट दाखिल कर दी है।
उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता के लागू होने के बाद यह मामला एक मिसाल के तौर पर देखा जा रहा है। सरकार की मंशा इस कानून के जरिए महिलाओं के अधिकारों की रक्षा करना और कुप्रथाओं पर अंकुश लगाना है। रुड़की पुलिस की इस कार्रवाई से यह स्पष्ट हो गया है कि अब राज्य में यूसीसी के प्रावधानों को प्रभावी ढंग से लागू किया जा रहा है। मामले के सुर्खियों में आने के बाद अब सबकी निगाहें अदालती कार्यवाही पर टिकी हैं कि इस ऐतिहासिक मामले में कानून क्या रुख अपनाता है।