शिमला। हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने राज्य को स्वास्थ्य के क्षेत्र में एक आदर्श प्रदेश बनाने की दिशा में कई महत्वपूर्ण घोषणाएं की हैं। उन्होंने स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ आयोजित एक समीक्षा बैठक में निर्देश दिया कि 31 मई से पहले राज्य के लिए एक व्यापक ‘पोषण नीति’ (न्यूट्रिशन पॉलिसी) तैयार की जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि ‘फिट हिमाचल’ के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए प्रदेश की जनता को भोजन के पोषण मूल्यों के प्रति जागरूक करना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने गौरव के साथ कहा कि हिमाचल प्रदेश इस तरह की विस्तृत नीति बनाने वाला देश का पहला राज्य बनेगा।
बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने स्वास्थ्य सेवाओं के आधुनिकीकरण पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य विभाग का पूर्ण डिजिटलीकरण समय की मांग है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि मरीजों के रिकॉर्ड को ऑनलाइन उपलब्ध कराया जाए ताकि स्वास्थ्य सेवाएं तेज और आसान हो सकें। सुक्खू के अनुसार, इस डिजिटल सिस्टम के लागू होने के बाद मरीजों को अपने साथ कागजी पंजीकरण पर्चियां या पुरानी मेडिकल टेस्ट रिपोर्ट ले जाने की आवश्यकता नहीं होगी। डॉक्टर एक क्लिक पर मरीज का पूरा मेडिकल इतिहास देख सकेंगे।
डिजिटलीकरण की इस पहल को धरातल पर उतारने के लिए मुख्यमंत्री ने इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (आईजीएमसी) में एक पायलट प्रोजेक्ट शुरू करने के निर्देश दिए। शुरुआत में पांच प्रमुख विभागों—पैथोलॉजी, रेडियोलॉजी, माइकोलॉजी, बायोकेमिस्ट्री और फार्मेसी में मरीजों के डेटा को डिजिटल किया जाएगा। उन्होंने इस प्रोजेक्ट के लिए पर्याप्त जनशक्ति उपलब्ध कराने का भी आश्वासन दिया। पायलट प्रोजेक्ट की सफलता के बाद इसे आईजीएमसी के सभी विभागों और राज्य के अन्य मेडिकल कॉलेजों में भी लागू किया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार राज्य के भीतर ही विश्व स्तरीय स्वास्थ्य सुविधाएं प्रदान करने के लिए संकल्पबद्ध है। इसके लिए स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत करने हेतु उच्च गुणवत्ता वाली मशीनों और उपकरणों पर 3000 करोड़ रुपये खर्च करने की योजना बनाई गई है। उन्होंने जानकारी दी कि तीन मेडिकल कॉलेजों में ऑटोमेटेड लैब स्थापित करने के लिए सरकार ने 75 करोड़ रुपये स्वीकृत किए हैं। इसके अलावा, राज्य के मेडिकल कॉलेजों में सीनियर रेजिडेंट डॉक्टरों की संख्या दोगुनी करने के प्रयास भी किए जा रहे हैं, क्योंकि ये डॉक्टर संस्थानों के प्रभावी संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
इस महत्वपूर्ण बैठक में राज्य खाद्य आयोग के अध्यक्ष एस.पी. कात्याल, सचिव आशीष सिंहमार, विशेष सचिव अश्वनी कुमार और जितेंद्र संजटा सहित स्वास्थ्य विभाग के अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। मुख्यमंत्री के इन निर्देशों से स्पष्ट है कि हिमाचल सरकार आने वाले समय में तकनीक और गुणवत्तापूर्ण आहार के माध्यम से प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था में क्रांतिकारी बदलाव लाने की तैयारी में है। अब 31 मई तक तैयार होने वाली पोषण नीति और डिजिटल स्वास्थ्य प्रणाली पर प्रदेशवासियों की निगाहें टिकी हैं।