देहरादून, 15 मई। उत्तराखंड में चल रहे जनगणना के राष्ट्रीय अभियान में राज्य की भागीदारी अत्यंत उत्साहजनक नजर आ रही है। मकानों के सूचीकरण और आवास जनगणना की प्रक्रिया राज्य में तेजी से आगे बढ़ रही है, जिसके तहत अब तक लगभग 70 फीसदी कार्य सफलतापूर्वक पूरा कर लिया गया है। जनगणना टीमों ने अब तक प्रदेश के 19 लाख घरों तक पहुँचकर महत्वपूर्ण डेटा संग्रहित किया है, जिसका अर्थ है कि लगभग 86 लाख की आबादी को इस प्रक्रिया में शामिल किया जा चुका है। सरकार ने इस प्रथम चरण के कार्य को पूर्ण करने के लिए 24 मई की समयसीमा तय की है।
भारत के महा रजिस्ट्रार एवं जनगणना आयुक्त मृत्युंजय कुमार नारायण ने गुरुवार को उत्तराखंड के प्रमुख सचिव आरके सुधांशु के साथ एक उच्च स्तरीय बैठक में इस अभियान की प्रगति की समीक्षा की। वर्चुअल माध्यम से आयोजित इस बैठक में विभिन्न जिलों के जिलाधिकारियों और नगर आयुक्तों ने अपने-अपने क्षेत्रों का फीडबैक साझा किया। समीक्षा के दौरान यह तथ्य सामने आया कि पर्वतीय जिलों में चंपावत ने उल्लेखनीय कार्य किया है। वहीं, देहरादून में कुछ स्थानों पर कार्य शुरू होने में हुई देरी के सवाल पर जिलाधिकारी सविन बंसल ने स्पष्ट किया कि अब जिले के सभी क्षेत्रों में जनगणना का काम गति पकड़ चुका है।
देहरादून नगर निगम की आयुक्त नमामि बंसल ने बैठक में बताया कि कई इलाकों में डेटा संकलन का कार्य पूरा हो चुका है, लेकिन उसे पोर्टल पर अपलोड करने की प्रक्रिया अभी शेष है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि शुक्रवार से पोर्टल पर प्रगति का वास्तविक आंकड़ा दिखाई देने लगेगा। इसी प्रकार, पिथौरागढ़ के जिलाधिकारी आशीष कुमार भटगई और बागेश्वर की जिलाधिकारी आकांक्षा कोंडे ने भी अपने जिलों में चल रहे कार्यों की वर्तमान स्थिति से महा रजिस्ट्रार को अवगत कराया। प्रशासन को पूरी उम्मीद है कि शेष बचे हुए दस दिनों में शत-प्रतिशत लक्ष्य को हासिल कर लिया जाएगा।
महा रजिस्ट्रार मृत्युंजय कुमार नारायण ने बैठक के दौरान विशेष रूप से आंकड़ों की गुणवत्ता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि जनगणना के डेटा की शुद्धता और गुणवत्ता अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि भविष्य में होने वाले परिसीमन और सरकार की तमाम जनकल्याणकारी योजनाओं का आधार यही आंकड़े होते हैं। उन्होंने अधिकारियों और फील्ड स्टाफ से अपील की कि वे डेटा की जांच और सत्यापन पर विशेष ध्यान दें ताकि किसी भी प्रकार की त्रुटि की गुंजाइश न रहे। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि उत्तराखंड जिस तत्परता से कार्य कर रहा है, वह शेष बचे एक तिहाई कार्य को भी समय पर पूरा कर लेगा।
प्रमुख सचिव आरके सुधांशु ने जनगणना को एक राष्ट्रव्यापी अभियान बताते हुए कहा कि देश की प्रगति और विकास की सटीक कार्ययोजना बनाने में जनगणना की भूमिका निर्णायक होती है। उन्होंने अधिकारियों को इस कार्य को सर्वोच्च प्राथमिकता देने के निर्देश दिए। बैठक में जनगणना कार्य के सचिव दीपक कुमार, निदेशक ईवा आशीष श्रीवास्तव और अपर सचिव सुरेश जोशी सहित कई वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे। राज्य सरकार का मानना है कि पहले चरण की यह सफलता आगामी चरणों के लिए एक मजबूत आधार प्रदान करेगी।
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