देहरादून। उत्तराखंड में ऊर्जा संरक्षण, संसाधनों के विवेकपूर्ण उपयोग और सतत विकास की दिशा में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व वाली सरकार ने एक व्यापक कार्ययोजना को अमली जामा पहनाना शुरू कर दिया है। मंत्रिमंडल की बैठक में लिए गए महत्वपूर्ण निर्णयों का पालन करते हुए प्रमुख सचिव आर के सुधांशु ने राज्य के सभी विभागों, जिलाधिकारियों, मंडलायुक्तों और विभागाध्यक्षों को इस संबंध में विस्तृत दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं। सरकार का लक्ष्य ऊर्जा की खपत में प्रभावी कमी लाते हुए पर्यावरण संरक्षण को एक जनआंदोलन का स्वरूप देना है।
राज्य सरकार ने अपने निर्देशों में स्पष्ट किया है कि वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों, विशेषकर रूस-यूक्रेन संघर्ष और पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के कारण ईंधन और ऊर्जा संसाधनों पर दबाव बढ़ा है। ऐसे में संसाधनों की बचत केवल आर्थिक आवश्यकता नहीं, बल्कि राष्ट्रीय कर्तव्य भी है। नई कार्ययोजना के तहत सरकारी कार्यालयों में ऊर्जा दक्षता के कड़े मानक तय किए गए हैं। अब सभी सरकारी दफ्तरों में एयर कंडीशनर (AC) का तापमान 24 से 26 डिग्री सेल्सियस के बीच रखना अनिवार्य होगा। साथ ही, कार्यालयों में अनावश्यक बिजली और अन्य उपकरणों के उपयोग पर विभाग प्रमुखों को कड़ी निगरानी रखने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
ईंधन बचाने के लिए सरकार ने प्रशासनिक कामकाज के तरीके में भी बड़े बदलाव किए हैं। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे भौतिक बैठकों के स्थान पर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग को प्राथमिकता दें। इसके अलावा “वर्क फ्रॉम होम”, “नो व्हीकल डे” और कार पूलिंग जैसी व्यवस्थाओं को प्रोत्साहित किया जाएगा। सरकारी कर्मचारियों को सार्वजनिक परिवहन और साइकिल शेयरिंग अपनाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। सरकार राज्य में इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) के उपयोग और चार्जिंग स्टेशन नेटवर्क के विस्तार पर भी विशेष ध्यान दे रही है।
स्थानीय अर्थव्यवस्था और पर्यटन को मजबूती देने के लिए “विजिट माई स्टेट” और “हॉलीडे इन इंडिया” जैसे अभियान संचालित किए जाएंगे। इसके माध्यम से ग्रामीण, धार्मिक और ईको-टूरिज्म को बढ़ावा दिया जाएगा। राज्य में डेस्टिनेशन वेडिंग के प्रति रुझान बढ़ाने के लिए सिंगल विंडो क्लीयरेंस की प्रभावी व्यवस्था विकसित की जाएगी। स्थानीय उत्पादों के लिए “मेड इन उत्तराखंड” अभियान के तहत एमएसएमई और स्वयं सहायता समूहों को अमेजन और फ्लिपकार्ट जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से बड़ा बाजार उपलब्ध कराया जाएगा।
कृषि के क्षेत्र में सरकार का ध्यान रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम करने पर है। इसके लिए किसानों को प्राकृतिक और जैविक खेती का विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा। सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए “प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना” के तहत छतों पर सोलर पैनल लगाने और कचरे से बायोगैस बनाने वाली परियोजनाओं को प्राथमिकता दी जाएगी। निवेश को प्रोत्साहित करने के लिए खनन और बिजली जैसी बड़ी परियोजनाओं की मंजूरी प्रक्रिया को तेज किया गया है, ताकि त्वरित निर्णय लिए जा सकें। राज्य सरकार का मानना है कि इन साझा प्रयासों से उत्तराखंड न केवल ऊर्जा की बचत करेगा, बल्कि आत्मनिर्भरता की ओर भी तेजी से कदम बढ़ाएगा।