शिमला। हिमाचल प्रदेश की सुखविंदर सिंह सुक्खू सरकार ने प्रशासन में शुचिता और पारदर्शिता लाने की दिशा में एक बड़ा और निर्णायक कदम उठाया है। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने बुधवार को विधानसभा के बजट सत्र के दूसरे चरण के पहले दिन भ्रष्टाचार के विरुद्ध ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति का प्रदर्शन किया। प्रश्नकाल के दौरान एक महत्वपूर्ण घोषणा करते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि सरकार ने संवेदनशील पदों पर तैनात उन सभी अधिकारियों और कर्मचारियों को तत्काल प्रभाव से हटाने का निर्णय लिया है जिनके नाम ‘ओडीआई’ (ऑफिसर ऑफ डाउटफुल इंटीग्रिटी – संदेहास्पद निष्ठा वाले अधिकारी) सूची में शामिल हैं। इसके साथ ही, संवेदनशील पदों पर सेवा विस्तार (एक्सटेंशन) के बाद तैनात कर्मियों की सेवाएं भी समाप्त करने का आदेश दिया गया है। मुख्यमंत्री के इस तेवर से प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मच गया है।
संदेहास्पद निष्ठा वाले अधिकारियों पर गिरी गाज
विधायक सतपाल सिंह सत्ती द्वारा पूछे गए एक मूल सवाल का जवाब देते हुए मुख्यमंत्री ने सदन को जानकारी दी कि वर्तमान में ओडीआई सूची में शामिल तीन अधिकारी संवेदनशील पदों पर कार्य कर रहे थे। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार ने इन तीनों की सेवाएं तत्काल प्रभाव से समाप्त करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। जिन अधिकारियों पर यह गाज गिरी है, उनमें तहसीलदार विजय कुमार राय, ओएसडी युद्धवीर सिंह ठाकुर और राय बहादुर सिंह नेगी शामिल हैं। मुख्यमंत्री ने सदन को यह भी बताया कि पिछले दो वर्षों के दौरान दो कर्मचारियों के आचरण में सुधार या जांच के बाद उन्हें इस सूची से बाहर भी किया गया है, जिनमें वरिष्ठ सहायक महेंद्र लाल और रीडर राय बहादुर नेगी का नाम शामिल है।
सतपाल सत्ती के तीखे सवाल और भ्रष्टाचार के आरोप
इससे पूर्व, भाजपा विधायक सतपाल सिंह सत्ती ने अपने विधानसभा क्षेत्र के एक गंभीर मामले को सदन के पटल पर रखा। उन्होंने आरोप लगाया कि एक तहसीलदार को भ्रष्टाचार और रिश्वत लेने के मामले में रंगे हाथों पकड़ा गया था, लेकिन इसके बावजूद सरकार ने उसे सेवा विस्तार (एक्सटेंशन) प्रदान कर दिया। सत्ती ने कहा कि इस फैसले के विरुद्ध स्थानीय जनता में भारी रोष है और लोग सड़कों पर उतरकर धरना-प्रदर्शन कर रहे हैं।
उन्होंने आगे एक गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि कुछ ‘प्रभावशाली लोग’ पर्दे के पीछे से ऐसे भ्रष्ट अधिकारियों को संरक्षण दे रहे हैं और उनके माध्यम से कीमती जमीनों की हेराफेरी कर उन्हें अपने नाम करवा रहे हैं। सतपाल सत्ती ने मुख्यमंत्री को चुनौती देते हुए कहा कि वे सीआईडी के जरिए उन प्रभावशाली चेहरों का पता लगाएं, अन्यथा उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री स्वयं इसकी पूरी जानकारी सदन को दे देंगे।
जयराम ठाकुर और मुख्यमंत्री के बीच ओडीआई सूची पर बहस
नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने इस मुद्दे पर अनुपूरक सवाल पूछते हुए सरकार की मंशा पर सवाल उठाए। उन्होंने याद दिलाया कि प्रदेश उच्च न्यायालय ने सरकार से ओडीआई सूची तलब की है। जयराम ठाकुर ने पूछा कि मुख्यमंत्री ने सदन में केवल तीन नाम बताए हैं, तो क्या सरकार अदालत में भी केवल इन्हीं तीन नामों की सूची पेश करेगी या इसमें और भी नाम शामिल हैं? उन्होंने अंदेशा जताया कि सूची काफी लंबी हो सकती है जिसे सरकार छिपाने की कोशिश कर रही है।
इस पर मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने बेबाकी से जवाब देते हुए कहा कि वर्तमान में उनके पास जो आधिकारिक रिकॉर्ड उपलब्ध है, उसके अनुसार ही ये नाम बताए गए हैं। उन्होंने नेता प्रतिपक्ष को पलटकर जवाब दिया कि यदि उनके पास कोई ऐसे अन्य नाम हैं जो संदेहास्पद निष्ठा वाले हैं और अभी भी पदों पर जमे हुए हैं, तो वे उनके नाम साझा करें। मुख्यमंत्री ने भरोसा दिलाया कि जानकारी मिलते ही उन अधिकारियों को भी तुरंत उनके पदों से हटा दिया जाएगा।
जांच समितियों और कैबिनेट सब-कमेटी की प्रगति
सत्र के दौरान विधायक सुधीर शर्मा ने सरकार द्वारा गठित विभिन्न जांच समितियों की स्थिति पर प्रश्न पूछा। इसके उत्तर में मुख्यमंत्री ने बताया कि पिछले तीन वर्षों के दौरान प्रदेश सरकार ने विभिन्न संवेदनशील मामलों की गहराई से जांच के लिए कुल दस समितियों का गठन किया था। उन्होंने संतोष व्यक्त करते हुए कहा कि इनमें से नौ समितियों ने अपनी विस्तृत रिपोर्ट सरकार को सौंप दी है। इन रिपोर्टों की सिफारिशों के आधार पर संबंधित विभागों द्वारा आवश्यक कार्रवाई भी अमल में लाई जा चुकी है।
इसके अतिरिक्त, मुख्यमंत्री ने बताया कि सरकार ने विभिन्न विकास लक्ष्यों और प्रशासनिक कार्यों की पूर्ति के लिए 31 जुलाई 2025 तक कुल 25 मंत्रिमंडलीय उप-समितियों (कैबिनेट सब-कमेटी) का गठन किया है। राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी की अध्यक्षता में एक विशेष उप-समिति भी बनाई गई है जिसका कार्य मंत्रिमंडल द्वारा लिए गए निर्णयों के क्रियान्वयन की समीक्षा करना है। इस समिति ने 31 दिसंबर 2024 तक के सभी निर्णयों की समीक्षा पूरी कर ली है और अब जनवरी 2025 से जून 2025 तक के कालखंड के फैसलों की जांच जारी है।
आज की विधानसभा कार्यवाही ने यह साफ कर दिया है कि सुक्खू सरकार अब अधिकारियों की जवाबदेही तय करने के मूड में है। भ्रष्ट अधिकारियों को सेवा विस्तार देने के मुद्दे पर विपक्ष के घेराव के बाद मुख्यमंत्री द्वारा की गई ये घोषणाएं सरकार की छवि को सुधारने का एक प्रयास मानी जा रही हैं। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि ओडीआई सूची के अन्य नामों पर सरकार क्या रुख अपनाती है और प्रभावशाली लोगों के खिलाफ क्या कार्रवाई होती है। फिलहाल, भ्रष्ट तंत्र पर मुख्यमंत्री की इस ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ ने विपक्ष को भी सोचने पर मजबूर कर दिया है।
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