चंडीगढ़। नगर निगम चंडीगढ़, चंडीगढ़ स्मार्ट सिटी लिमिटेड (सीएससीएल) और क्रेस्ट के खातों से जुड़े करोड़ों रुपये के महाघोटाले में चंडीगढ़ पुलिस की अपराध शाखा (क्राइम ब्रांच) को एक बड़ी सफलता हाथ लगी है। इस घोटाले के मुख्य सूत्रधार और रियल एस्टेट निवेशक विक्रम वधवा को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। वधवा की गिरफ्तारी के बाद अब इस पूरे खेल की परतें धीरे-धीरे खुलने लगी हैं। जांच के दौरान यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है कि जैसे ही इस घोटाले में आईडीएफसी फर्स्ट बैंक के तत्कालीन मैनेजर ऋभव ऋषि का नाम उजागर हुआ, वधवा गिरफ्तारी के डर से रातों-रात चंडीगढ़ छोड़कर शिमला फरार हो गया था।
विक्रम वधवा कई दिनों तक शिमला की पहाड़ियों में छिपा रहा। पुलिस उसकी तलाश में लगातार छापेमारी कर रही थी और उसकी गतिविधियों पर नजर रखने के लिए लुकआउट सर्कुलर भी जारी कर दिया गया था। पुलिस को उम्मीद थी कि वह जल्द ही किसी न किसी काम से पंजाब या चंडीगढ़ के आसपास वापस आएगा। हुआ भी ऐसा ही, वधवा किसी व्यक्तिगत काम के सिलसिले में मोहाली के खरड़ पहुंचा। अपराध शाखा को इसकी गुप्त सूचना मिली और बिना वक्त गंवाए पुलिस ने घेराबंदी कर उसे दबोच लिया। वधवा की गिरफ्तारी इस मामले में एक निर्णायक मोड़ मानी जा रही है।
पूछताछ में यह बात सामने आई है कि इस पूरे घोटाले की नींव बैंक मैनेजर ऋभव ऋषि और विक्रम वधवा की साठगांठ से रखी गई थी। ऋभव ऋषि ने बैंक मैनेजर के पद पर रहते हुए वधवा को उन सरकारी खातों की गोपनीय जानकारी दी, जिनमें करोड़ों रुपये का फंड जमा था। इन दोनों ने मिलकर सरकारी खजाने पर डाका डालने की एक सुनियोजित योजना बनाई। योजना के तहत सरकारी विभागों के इन खातों से मोटी रकम निकाली गई और उसे शेल (फर्जी) कंपनियों के जरिए ठिकाने लगाया गया।
जांच एजेंसियों के अनुसार, इस घोटाले में पैसे को इधर-उधर घुमाने के लिए कैपको फिनटेक सर्विसेज, आरएस ट्रेडर्स और स्वास्तिक देश प्रोजेक्ट्स जैसी फर्जी कंपनियों का इस्तेमाल किया गया। इन कंपनियों का कोई वास्तविक व्यावसायिक वजूद नहीं था, बल्कि इनका उपयोग केवल सरकारी पैसे की लॉन्ड्रिंग के लिए किया गया था। इन कंपनियों के खातों में करोड़ों रुपये ट्रांसफर किए गए और वहां से इस रकम को सफेद बनाकर रियल एस्टेट के कारोबार में निवेश कर दिया गया।
पूछताछ के दौरान यह भी पता चला कि विक्रम वधवा ने पिछले तीन-चार वर्षों के दौरान चंडीगढ़, मोहाली, खरड़ और आसपास के इलाकों में कई बड़े आवासीय और व्यावसायिक प्रोजेक्ट्स शुरू किए थे। जांच एजेंसियों को अब पुख्ता संदेह है कि इन सभी परियोजनाओं में जो पैसा लगाया गया है, वह दरअसल सरकारी विभागों के खातों से निकाला गया वही फंड है जिसे धोखाधड़ी से हासिल किया गया था। पुलिस अब वधवा की इन सभी संपत्तियों की रजिस्ट्री और निवेश के दस्तावेजों की बारीकी से जांच कर रही है ताकि घोटाले की कुल राशि का सही आकलन किया जा सके।
इस मामले में चंडीगढ़ स्मार्ट सिटी लिमिटेड के आउटसोर्स अकाउंटेंट अनुभव मिश्रा की भूमिका भी अब गंभीर संदेह के घेरे में है। अनुभव मिश्रा 24 फरवरी के बाद से कार्यालय नहीं आया है और तब से वह रहस्यमयी तरीके से गायब है। उसका मोबाइल फोन भी लगातार बंद आ रहा है। पुलिस को अंदेशा है कि अनुभव मिश्रा को इस पूरे घोटाले की तकनीकी और वित्तीय जानकारी थी और वह वधवा व ऋभव ऋषि के बीच एक महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में कार्य कर रहा था। उसकी तलाश के लिए पुलिस की टीमें विभिन्न स्थानों पर छापेमारी कर रही हैं।
जांच के दौरान जो सबसे बड़ा तकनीकी साक्ष्य पुलिस के हाथ लगा है, वह है 116.84 करोड़ रुपये की फर्जी फिक्स्ड डिपॉजिट रसीदें (एफडीआर)। चंडीगढ़ स्मार्ट सिटी लिमिटेड के सरकारी रिकॉर्ड में 11 ऐसी एफडीआर दिखाई गई थीं, जिनका कुल मूल्य करोड़ों में था। लेकिन जब पुलिस ने बैंक के डिजिटल सिस्टम से इनका मिलान किया, तो वहां ऐसी किसी भी एफडीआर का कोई रिकॉर्ड मौजूद नहीं था। आरोप है कि ये फर्जी रसीदें मार्च और अप्रैल 2025 के दौरान ऋभव ऋषि द्वारा कागजों पर तैयार करके जारी की गई थीं ताकि ऑडिट के दौरान किसी को शक न हो।
इसके अलावा, बैंक स्टेटमेंट की विस्तृत जांच में 8.22 करोड़ रुपये के तीन ऐसे संदिग्ध लेनदेन भी मिले हैं, जिनका नगर निगम के किसी भी सरकारी रिकॉर्ड में कोई हिसाब-किताब मौजूद नहीं है। पुलिस अब इन विशिष्ट लेनदेन की भी जांच कर रही है कि यह पैसा किस खाते में और किसके आदेश पर भेजा गया।
पुलिस अब पूरे ‘मनी ट्रेल’ यानी पैसे के आने-जाने के रास्तों का नक्शा तैयार कर रही है। अधिकारी यह जानने की कोशिश कर रहे हैं कि सरकारी खजाने से निकाली गई कुल कितनी रकम को रियल एस्टेट में खपाया गया है और क्या इस सिंडिकेट में कुछ अन्य प्रभावशाली लोग भी शामिल हैं। विक्रम वधवा से पुलिस हिरासत में गहन पूछताछ की जा रही है और उम्मीद जताई जा रही है कि अनुभव मिश्रा की गिरफ्तारी के बाद इस महाघोटाले के कई और चौंकाने वाले राज सामने आएंगे। फिलहाल, पुलिस वधवा की संपत्तियों को कुर्क करने की प्रक्रिया पर भी विचार कर रही है।
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