चंडीगढ़। पंजाब विधानसभा के बजट सत्र का आखिरी दिन हंगामे और जबरदस्त राजनीतिक विरोध की भेंट चढ़ गया। सोमवार को सदन की कार्यवाही शुरू होने से पहले ही राज्य में गहराती गैस किल्लत का मुद्दा गरमा गया। आम आदमी पार्टी के विधायकों और मंत्रियों ने इस समस्या को लेकर केंद्र सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। विधानसभा भवन के बाहर इकट्ठा होकर सत्तापक्ष के सदस्यों ने नारेबाजी की और रसोई गैस की कमी के लिए केंद्र सरकार की नीतियों को प्रत्यक्ष रूप से जिम्मेदार ठहराया। इस दौरान विधायकों का विरोध जताने का अंदाज चर्चा का विषय बना रहा, क्योंकि वे इस मुद्दे पर प्रदर्शन करने के लिए एक विशेष प्रकार का चोला पहनकर पहुंचे थे।
सदन के भीतर विशेष चोले पर स्पीकर का ऐतराज
प्रदर्शनकारी विधायक और मंत्री केवल सदन के बाहर ही नहीं रुके, बल्कि वे उसी विशेष ‘विरोध वाले चोले’ को पहनकर सदन की कार्यवाही में हिस्सा लेने पहुंच गए। जैसे ही सत्र शुरू हुआ, विपक्षी और सत्तापक्ष के बीच तनातनी दिखने लगी। सदन की मर्यादा को लेकर गंभीर रहने वाले स्पीकर कुलतार सिंह संधवां ने इस तरह के पहनावे के साथ सदन में बैठने पर कड़ा ऐतराज जताया। उन्होंने सदस्यों को टोकते हुए कहा कि यह सदन एक पवित्र स्थान है और इसकी गरिमा बनाए रखना प्रत्येक निर्वाचित प्रतिनिधि की नैतिक जिम्मेदारी है। उन्होंने इस तरह के प्रदर्शन को सदन के नियमों के विपरीत बताया। हालांकि, आप विधायक काफी समय तक अपने विरोध पर अड़े रहे और अपनी बात रखते रहे। इस गहमागहमी और अव्यवस्था के कारण सदन का माहौल इतना बिगड़ गया कि स्पीकर को कार्यवाही 20 मिनट के लिए स्थगित करनी पड़ी।
गैस एजेंसियों की मनमानी और जनता की परेशानी
विधानसभा परिसर के बाहर मीडिया और सदन के भीतर मंत्रियों ने गैस की किल्लत से जुड़ी जमीनी हकीकत पेश की। विधायक मनविंदर सिंह ग्यासपुरा ने आरोप लगाया कि राज्य में गैस एजेंसियां पूरी तरह से मनमानी पर उतारू हैं। उन्होंने कहा कि जब आम लोग गैस सिलेंडर की बुकिंग के लिए एजेंसियों के नंबर मिलाते हैं, तो फोन नहीं उठाया जाता। लोग घंटों कोशिश करते हैं लेकिन उनकी बुकिंग तक नहीं हो पा रही है। उन्होंने कहा कि इस लापरवाही के कारण हजारों परिवारों के सामने चूल्हा जलाने का संकट पैदा हो गया है और लोगों में भारी आक्रोश है।
खाद्य आपूर्ति मंत्री लाल चंद कटारूचक ने भी राज्य के विभिन्न हिस्सों से मिल रही फीडबैक की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि मोहाली सहित कई प्रमुख शहरों में गैस की किल्लत ने विकराल रूप ले लिया है। लोग गैस सिलेंडर हासिल करने के लिए सुबह से ही लंबी कतारों में लगने को मजबूर हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि यह कोई सामान्य समस्या नहीं है और इसे तत्काल हल करने की आवश्यकता है, क्योंकि जनता का धैर्य अब जवाब दे रहा है।
केंद्र की विदेश नीति पर साधा निशाना
पंजाब के वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने इस संकट को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उपजी परिस्थितियों से जोड़ा। उन्होंने केंद्र सरकार की विदेश नीति को कटघरे में खड़ा करते हुए कहा कि वैश्विक स्तर पर चल रहे तनाव और केंद्र के गलत कूटनीतिक फैसलों के कारण ही देश में गैस की आपूर्ति प्रभावित हुई है। चीमा ने यह भी चेतावनी दी कि राज्य सरकार इस किल्लत के बीच किसी को भी कालाबाजारी करने की इजाजत नहीं देगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि जो भी वितरक या व्यक्ति गैस की जमाखोरी या कालाबाजारी में लिप्त पाया जाएगा, उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी और दोषी एजेंसियों को काली सूची (ब्लैक लिस्ट) में डाल दिया जाएगा।
बिजली व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए नए ग्रिड
सत्र के दौरान केवल हंगामे ही नहीं हुए, बल्कि कुछ विकास योजनाओं की जानकारी भी साझा की गई। बिजली मंत्री संजीव अरोड़ा ने एक प्रश्न के उत्तर में बताया कि पंजाब सरकार राज्य की बिजली व्यवस्था को और अधिक मजबूत बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने घोषणा की कि प्रदेश में बिजली के नए ग्रिड स्थापित किए जाएंगे, जिन पर लगभग छह करोड़ रुपये की लागत आने का अनुमान है। इन नए ग्रिडों के लग जाने से संबंधित क्षेत्रों में बिजली की ट्रिपिंग और लो वोल्टेज की समस्या से निजात मिलेगी।
सदन की अन्य महत्वपूर्ण कार्यवाही
बजट सत्र के समापन दिवस पर कई विधायी कार्यों को भी निपटाया जाना है। सदन में विभिन्न समितियों की रिपोर्ट के साथ-साथ नियंत्रक व महालेखा परीक्षक (कैग) की महत्वपूर्ण रिपोर्टें भी मेज पर रखी जाएंगी। इसके अलावा, सरकार दो महत्वपूर्ण विधेयक पेश करने की तैयारी में है, जिन पर चर्चा के बाद उन्हें पारित किया जा सकता है।
ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के जरिए क्षेत्रीय समस्याओं को भी सदन के पटल पर लाया गया। मानसा क्षेत्र के गांव ढैपई में सरकारी औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान (ITI) तक जाने वाली सड़क न होने के कारण छात्रों को होने वाली दिक्कतों का मुद्दा उठाया जाएगा। साथ ही, फिरोजपुर से फाजिल्का मार्ग को चौड़ा करने की योजना पर भी चर्चा होगी। तलवंडी साबो स्थित रिफाइनरी द्वारा सामाजिक दायित्व निधि (CSR फंड) के उपयोग की पारदर्शिता पर भी सदस्यों ने सवाल उठाए हैं, जिस पर सरकार अपना जवाब पेश कर सकती है।
आज की कार्यवाही से यह स्पष्ट हो गया कि पंजाब में गैस की किल्लत एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन चुकी है। जहां सत्तापक्ष इसके लिए केंद्र सरकार को घेर रहा है, वहीं प्रशासन कालाबाजारी रोकने के लिए अलर्ट मोड पर है। विधानसभा में उठी ये आवाजें दर्शाती हैं कि आने वाले दिनों में यह संकट पंजाब की राजनीति को और अधिक गरमा सकता है। फिलहाल, 20 मिनट के स्थगन के बाद जब सदन दोबारा शुरू हुआ, तब भी गैस किल्लत और जनकल्याण के मुद्दों पर चर्चा जारी रही।