नई दिल्ली। पश्चिमी एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और अमेरिका व ईरान के बीच जारी टकराव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने एक बड़ा बयान दिया है। डोनल्ड ट्रंप ने संदेह जताया है कि रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन संभवतः ईरान की सैन्य या रणनीतिक रूप से मदद कर रहे हैं। शुक्रवार को एक रेडियो इंटरव्यू के दौरान दी गई इस टिप्पणी ने अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के गलियारों में एक नई बहस छेड़ दी है। डोनल्ड ट्रंप का यह मानना है कि महाशक्तियों के बीच चल रहे इस खेल में रूस पूरी तरह से तटस्थ नहीं है और वह पर्दे के पीछे से ईरान के साथ खड़ा हो सकता है।
रेडियो साक्षात्कार में किया खुलासा
अमेरिकी राष्ट्रपति ने यह महत्वपूर्ण टिप्पणी फॉक्स न्यूज के चर्चित होस्ट ब्रायन किल्मीड के साथ बातचीत के दौरान की। साक्षात्कार के दौरान जब ब्रायन किल्मीड ने डोनल्ड ट्रंप से सीधे तौर पर यह सवाल पूछा कि क्या उनकी नजर में व्लादिमीर पुतिन इस समय ईरान की सहायता कर रहे हैं, तो डोनल्ड ट्रंप ने अत्यंत संक्षिप्त लेकिन गंभीर जवाब दिया। उन्होंने कहा, “मुझे लगता है कि वह शायद थोड़ी मदद कर रहे होंगे।” हालांकि डोनल्ड ट्रंप ने यह स्पष्ट नहीं किया कि यह मदद किस प्रकार की है, लेकिन उनके शब्दों से यह साफ झलकता है कि अमेरिकी खुफिया तंत्र और नेतृत्व रूस की गतिविधियों पर कड़ी नजर रखे हुए है।
सहयोगियों और युद्ध का समीकरण
अपने बयान को विस्तार देते हुए डोनल्ड ट्रंप ने अंतरराष्ट्रीय संबंधों के एक पेचीदा पहलू की ओर भी इशारा किया। उन्होंने तर्क दिया कि रूस को भी ऐसा महसूस होता होगा कि अमेरिका यूक्रेन का साथ देकर उसके हितों के खिलाफ काम कर रहा है। गौरतलब है कि 2022 में यूक्रेन पर रूस के हमले के बाद से ही अमेरिका लगातार यूक्रेन को सैन्य और वित्तीय सहायता प्रदान कर रहा है। डोनल्ड ट्रंप ने कहा कि जिस तरह अमेरिका यूक्रेन की मदद कर रहा है, उसी तर्ज पर रूस भी अपने सहयोगी ईरान के साथ खड़ा हो सकता है।
डोनल्ड ट्रंप ने चीन का भी उल्लेख करते हुए कहा कि बीजिंग भी इसी नजरिए से स्थिति का विश्लेषण कर सकता है। उनके अनुसार, दुनिया की बड़ी शक्तियां वर्तमान में अपने-अपने गुटों और सहयोगियों की मदद करने के एक चक्र में फंसी हुई हैं। डोनल्ड ट्रंप का यह बयान इस वास्तविकता को दर्शाता है कि ईरान और अमेरिका का संघर्ष अब केवल दो देशों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसमें रूस और चीन जैसे बड़े खिलाड़ियों के हित भी जुड़ गए हैं।
पुतिन के साथ फोन पर हुई चर्चा
हैरानी की बात यह है कि डोनल्ड ट्रंप का यह संदेह उस बातचीत के कुछ ही दिनों बाद सामने आया है जो उन्होंने सोमवार को व्लादिमीर पुतिन के साथ फोन पर की थी। दोनों नेताओं के बीच हुई इस सीधी वार्ता के बाद अमेरिका के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ ने एक साक्षात्कार में रूसी पक्ष का हवाला दिया था। स्टीव विटकॉफ के अनुसार, रूस ने आधिकारिक तौर पर यह दावा किया है कि वह ईरान के साथ किसी भी प्रकार की संवेदनशील या खुफिया जानकारी साझा नहीं कर रहा है।
स्टीव विटकॉफ ने तब यह भी कहा था कि फिलहाल रूस के इस औपचारिक आश्वासन पर भरोसा किया जा सकता है। उन्होंने उम्मीद जताई थी कि रूस वास्तव में ईरान को ऐसी कोई जानकारी प्रदान नहीं कर रहा होगा जिससे अमेरिकी हितों या सुरक्षा को खतरा पैदा हो। लेकिन शुक्रवार को डोनल्ड ट्रंप द्वारा व्यक्त किया गया संदेह यह बताता है कि रूस के दावों और अमेरिकी नेतृत्व के विश्वास के बीच अभी भी एक बड़ा फासला है।
अंतरराष्ट्रीय कूटनीति पर प्रभाव
डोनल्ड ट्रंप के इस बयान के बाद अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक हलकों में हलचल तेज हो गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि रूस वास्तव में ईरान की मदद कर रहा है, तो इससे मध्य पूर्व में जारी संघर्ष और अधिक जटिल हो सकता है। रूस और ईरान के बीच ऐतिहासिक रूप से गहरे संबंध रहे हैं, विशेषकर सीरियाई गृहयुद्ध के दौरान दोनों ने मिलकर काम किया है। ऐसे में डोनल्ड ट्रंप का यह सार्वजनिक बयान रूस पर दबाव बनाने की एक रणनीति भी हो सकता है।
फिलहाल, वाशिंगटन और मॉस्को के बीच इस मुद्दे पर कोई नया आधिकारिक स्पष्टीकरण नहीं आया है, लेकिन डोनल्ड ट्रंप की इस टिप्पणी ने यह साफ कर दिया है कि ईरान के प्रति अमेरिकी नीति में रूस की भूमिका एक बड़ा चिंता का विषय बनी हुई है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या अमेरिका अपने इस संदेह के पक्ष में कोई पुख्ता प्रमाण पेश करता है या रूस अपने दावों को साबित करने के लिए कोई नया कदम उठाता है। वैश्विक शांति के लिहाज से महाशक्तियों के बीच का यह संदेह किसी बड़े संकट की आहट भी साबित हो सकता है।
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