देहरादून। उत्तराखंड में जल संरक्षण, पर्यावरण सुरक्षा और कृषि विकास की दिशा में राज्य सरकार ने कई बड़े फैसले लिए हैं। मुख्य सचिव आनंद बर्धन की अध्यक्षता में आयोजित स्प्रिंग एंड रिवर रिजुवनेशन अथॉरिटी (SARA) और उत्तराखंड जलवायु अनुकूल बारानी कृषि परियोजना (UCRRFP) की उच्चस्तरीय बैठकों में महत्वपूर्ण रणनीतियों पर मुहर लगाई गई। बैठकों का मुख्य एजेंडा प्रदेश की नदियों के पुनर्जीवन, पारंपरिक जल स्रोतों के संरक्षण और जलवायु परिवर्तन के बीच खेती को अधिक टिकाऊ बनाना था।
सारा (SARA) की बैठक के दौरान मुख्य सचिव ने देहरादून की सॉन्ग नदी और उत्तरकाशी की कमल नदी से जुड़ी परियोजनाओं की विस्तृत समीक्षा की। उन्होंने निर्देश दिए कि सॉन्ग नदी के उन विशिष्ट क्षेत्रों का चिन्हीकरण किया जाए जहाँ सुधार की तत्काल आवश्यकता है। इन क्षेत्रों के लिए कार्यदायी संस्थाओं को जल्द से जल्द विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार करने के आदेश दिए गए। मुख्य सचिव ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि इन परियोजनाओं का भविष्य में क्या प्रभाव पड़ेगा, इसका आईआईटी रुड़की जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों से वैज्ञानिक मूल्यांकन कराया जाए।
पारंपरिक जल स्रोतों के प्रति संवेदनशीलता दिखाते हुए मुख्य सचिव ने सभी जिलों को निर्देश दिए कि वे अपने क्षेत्रों के पौराणिक नौलों और धारों का चिन्हीकरण करें। उन्होंने कहा कि इन स्रोतों का उपचार इस तरह किया जाए कि उनकी नैसर्गिक और प्राचीन संरचना प्रभावित न हो। जल संरक्षण के कार्यों को गति देने के लिए वन क्षेत्रों में ‘कैंपा फंड’ का उपयोग करने का भी सुझाव दिया गया।
दूसरी ओर, बारानी कृषि को बढ़ावा देने के लिए ‘उत्तराखंड जलवायु अनुकूल बारानी कृषि परियोजना’ (UCRRFP) की हाई पावर कमेटी ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए 187.11 करोड़ रुपये की वार्षिक कार्ययोजना को मंजूरी दी। इसके अलावा, चालू वित्त वर्ष 2025-26 के लिए 62.19 करोड़ रुपये की संशोधित योजना को भी हरी झंडी दिखाई गई। मुख्य सचिव ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि परियोजना का लाभ केवल फाइलों तक सीमित न रहकर ग्राम स्तर तक पहुँचना चाहिए। उन्होंने कहा कि स्थानीय आवश्यकताओं के अनुसार योजनाएं बनाई जाएं ताकि ग्रामीण अपनी आजीविका को अधिक सक्षम बना सकें।
बैठकों में परियोजना संचालन से जुड़ी विभिन्न गाइडलाइन्स और फाइनेंशियल मैनेजमेंट मैनुअल को भी अनुमोदित किया गया। इन महत्वपूर्ण बैठकों में सचिव दिलीप जावलकर, सी रविशंकर, अपर सचिव हिमांशु खुराना, अपूर्वा पांडेय और अन्य वरिष्ठ विभागीय अधिकारी उपस्थित रहे। सरकार के ये कदम न केवल प्रदेश की पारिस्थितिक स्थिरता को मजबूत करेंगे, बल्कि पहाड़ की आर्थिकी और जल सुरक्षा के लिए भी दूरगामी परिणाम लेकर आएंगे।
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