शिमला। केंद्र सरकार ने गुरुवार को देश के कई राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के संवैधानिक प्रमुखों के दायित्वों में बड़ा फेरबदल किया है। इस प्रशासनिक निर्णय के तहत हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ल का तबादला कर दिया गया है। उन्हें अब तेलंगाना के नए राज्यपाल के रूप में नई जिम्मेदारी सौंपी गई है। उनकी जगह भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता कविंद्र गुप्ता को हिमाचल प्रदेश का नया राज्यपाल नियुक्त किया गया है।
कविंद्र गुप्ता इससे पहले केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख के उपराज्यपाल के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे थे। उन्होंने जुलाई 2025 में सेवानिवृत्त ब्रिगेडियर डॉ. बीडी मिश्रा का स्थान लिया था। लद्दाख में लगभग आठ महीने का कार्यकाल पूरा करने के बाद उन्होंने अपने पद से इस्तीफा दे दिया था, जिसके बाद अब उन्हें हिमाचल प्रदेश के राजभवन की जिम्मेदारी दी गई है। कविंद्र गुप्ता का राजनीतिक और सामाजिक सफर काफी लंबा और संघर्षपूर्ण रहा है।
कविंद्र गुप्ता का जन्म 2 दिसंबर 1959 को हुआ था। वे अपने छात्र जीवन के शुरुआती दिनों में ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की विचारधारा से प्रभावित हो गए थे। उन्होंने मात्र 13 वर्ष की अल्पायु में ही संघ की सदस्यता ग्रहण कर ली थी। उनके जीवन का एक महत्वपूर्ण पड़ाव देश में लगे आपातकाल के दौरान आया। उस समय उन्होंने कड़ा संघर्ष किया और इसी कारण उन्हें 13 महीनों तक जेल की सजा भी काटनी पड़ी थी। जेल से बाहर आने के बाद भी उनका सामाजिक कार्यों के प्रति जुड़ाव बना रहा और वे 1978 से 1979 तक विश्व हिंदू परिषद पंजाब के सचिव पद पर कार्यरत रहे।
90 के दशक में उन्होंने जम्मू-कश्मीर की सक्रिय राजनीति में कदम रखा। वे 1993 से 1998 तक जम्मू-कश्मीर भारतीय जनता युवा मोर्चा के अध्यक्ष रहे, जहाँ उन्होंने संगठन को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाई। उनकी लोकप्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वे 2005 से 2010 के बीच लगातार तीन बार जम्मू के मेयर चुने गए। साल 2014 के विधानसभा चुनावों में उन्होंने जम्मू के गांधीनगर निर्वाचन क्षेत्र से चुनाव लड़कर बड़ी जीत हासिल की। इस चुनाव में उन्होंने कांग्रेस के दिग्गज नेता और पूर्व मंत्री रमण भल्ला को शिकस्त दी थी।
19 मार्च 2015 को कविंद्र गुप्ता के नाम एक ऐतिहासिक उपलब्धि दर्ज हुई, जब उन्हें जम्मू-कश्मीर विधानसभा का अध्यक्ष (स्पीकर) चुना गया। वे जम्मू-कश्मीर के इतिहास में भारतीय जनता पार्टी के पहले नेता थे, जिन्होंने स्पीकर का पद संभाला था। इसके बाद 30 अप्रैल 2018 को हुए मंत्रिमंडल विस्तार में उन्हें जम्मू-कश्मीर का उपमुख्यमंत्री बनाया गया। उन्होंने निर्मल सिंह की जगह यह पदभार संभाला था। हालांकि, राजनीतिक घटनाक्रम बदलने और भाजपा द्वारा तत्कालीन पीडीपी सरकार से समर्थन वापस लेने के कारण वे केवल 51 दिनों तक ही इस पद पर रह सके। कविंद्र गुप्ता जम्मू-कश्मीर भाजपा इकाई के सचिव भी रह चुके हैं और उन्हें उनकी स्पष्टवादिता और बेबाक बयानों के लिए विशेष रूप से जाना जाता है। अब हिमाचल के राज्यपाल के रूप में उनकी नई पारी पर सभी की नजरें रहेंगी।