नई दिल्ली। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने ईरान के खिलाफ जारी सैन्य संघर्ष को लेकर एक अत्यंत महत्वपूर्ण और बड़ा बयान दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि यदि आवश्यकता पड़ी तो अमेरिकी सेना ईरान पर आगामी चार से पांच सप्ताह तक लगातार हमले जारी रखने में पूरी तरह सक्षम है। इसके साथ ही ट्रंप ने सुझाव दिया है कि तेहरान में युद्ध के बाद होने वाले सत्ता परिवर्तन को ‘वेनेजुएला मॉडल’ के आधार पर आकार दिया जा सकता है। इस विशेष मॉडल के तहत केवल देश के शीर्ष नेतृत्व को पद से हटाया जाता है, जबकि सरकार के प्रशासनिक ढांचे के ज्यादातर हिस्से और कर्मचारियों को उनके पदों पर बनाए रखा जाता है।
एक साक्षात्कार के दौरान डोनल्ड ट्रंप ने इस सैन्य अभियान को लेकर अपना दृढ़ विश्वास व्यक्त किया। उन्होंने लातिन अमेरिका में किए गए पिछले सफल अभियानों की ओर इशारा करते हुए कहा कि वेनेजुएला में जो रणनीति अपनाई गई थी, वह ईरान के मौजूदा हालातों के लिए एकदम सही सिनेरियो है। ट्रंप के अनुसार, वहां दो मुख्य लोगों को छोड़कर बाकी सभी सरकारी कर्मियों की नौकरियां बची रहीं, जिससे देश का कामकाज प्रभावित नहीं हुआ। उन्होंने संकेत दिए कि वे ईरान में भी इसी तरह का बदलाव देखना चाहते हैं।
युद्ध की क्षमता और संसाधनों पर चर्चा करते हुए डोनल्ड ट्रंप ने कहा कि चार से पांच हफ्ते तक हमले जारी रखना अमेरिका के लिए कोई मुश्किल काम नहीं होगा। उन्होंने दावा किया कि अमेरिकी सेना के पास गोले-बारूद का विशाल भंडार मौजूद है, जो दुनिया के अलग-अलग देशों में रणनीतिक रूप से रखा गया है।
ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत के बाद वहां के भावी नेतृत्व को लेकर पूछे गए सवाल पर ट्रंप ने खुलासा किया कि उनके पास नेतृत्व के लिए तीन बहुत ही ठोस विकल्प मौजूद हैं। हालांकि, उन्होंने फिलहाल उन नामों का खुलासा करने से यह कहकर इनकार कर दिया कि पहले अभियान का काम पूरा हो जाने देना चाहिए। ट्रंप ने यह भविष्यवाणी भी की कि एक समय ऐसा आएगा जब ईरानी सेना स्वयं हथियार डाल देगी और जनता के सामने आत्मसमर्पण कर देगी। उनके अनुसार, ईरानी अधिकारी अपने हथियार आम लोगों को सौंप देंगे क्योंकि वे लंबे समय से इस बदलाव की बात कर रहे हैं।
प्रतिबंधों के भविष्य पर बात करते हुए डोनल्ड ट्रंप ने कहा कि यदि ईरान का नया नेतृत्व व्यावहारिक और सकारात्मक साबित होता है, तो वे उन पर लगे प्रतिबंधों को हटाने पर विचार कर सकते हैं। हालांकि, उन्होंने किसी भी तरह की सुरक्षा गारंटी या तुरंत कमिटमेंट करने से मना कर दिया। ट्रंप ने यह भी स्पष्ट किया कि ईरान पर सैन्य कार्रवाई के लिए उन्हें फारस की खाड़ी के अरब देशों के साथ की कोई खास जरूरत महसूस नहीं होती। उन्होंने अंत में कहा कि वर्तमान अभियान अपने निर्धारित समय से काफी आगे चल रहा है।
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