कोटद्वार। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी सोमवार को उत्तराखंड के दीपक कुमार से मुलाकात की। दीपक कुमार, जिन्हें स्थानीय लोग ‘मोहम्मद दीपक’ के नाम से भी पुकारते हैं, हाल ही में उस समय चर्चा में आए थे जब उन्होंने एक मुस्लिम दुकानदार के पक्ष में खड़े होकर भाईचारे की मिसाल पेश की थी। राहुल गांधी का यह दौरा सामाजिक एकता और सद्भाव का संदेश देने के उद्देश्य से काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
कांग्रेस ने इस मुलाकात की तस्वीरें साझा करते हुए दीपक कुमार की जमकर सराहना की है। पार्टी की ओर से जारी संदेश में कहा गया कि राहुल गांधी ने दीपक से मिलकर उनके साहस को सलाम किया है। दीपक ने नफरत और अन्याय के खिलाफ खड़े होकर देश के युवाओं के लिए एक प्रेरणा पेश की है। कांग्रेस के अनुसार, दीपक कुमार ‘मोहब्बत की दुकान’ के एक सच्चे योद्धा हैं और उनके जैसे लोग ही देश के साझा ताने-बाने को सुरक्षित रखते हैं। राहुल गांधी ने बातचीत के दौरान दीपक से उस पूरी घटना की जानकारी ली और उनके निडर व्यवहार की तारीफ की।
विवाद की जड़ें जनवरी महीने में हुई एक घटना से जुड़ी हैं। कोटद्वार के पटेल मार्ग पर ‘बाबा’ नाम से कपड़ों की एक दुकान है, जिसके मालिक वकील अहमद हैं। कुछ समय पहले बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने इस दुकान के बाहर विरोध प्रदर्शन किया था और मालिक पर दुकान का नाम बदलने का दबाव बनाया था। इसी दौरान वकील अहमद के दोस्त के बेटे दीपक कुमार वहां पहुंच गए और प्रदर्शनकारियों का विरोध किया। दीपक और प्रदर्शनकारियों के बीच तीखी बहस और भिड़ंत हुई, जिसके बाद मामला पुलिस तक पहुंच गया था।
प्रशासन ने उस समय स्थिति को संभालने के लिए भारी पुलिस बल तैनात किया था और घटना के संबंध में तीन अलग-अलग एफआईआर दर्ज की गई थीं। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक चंद्र मोहन सिंह ने इस मामले में सख्त रुख अपनाते हुए चेतावनी दी थी कि शहर की शांति के साथ खिलवाड़ करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। पुलिस ने स्पष्ट किया था कि किसी को भी कानून हाथ में लेने या सांप्रदायिक माहौल बिगाड़ने की इजाजत नहीं दी जाएगी।
राहुल गांधी के इस दौरे ने कोटद्वार में एक नई चर्चा छेड़ दी है। दीपक कुमार ने राहुल गांधी से मुलाकात के बाद कहा कि वे हमेशा भाईचारे और न्याय के साथ खड़े रहेंगे। राहुल गांधी ने अपनी इस संक्षिप्त यात्रा के माध्यम से यह संदेश देने का प्रयास किया है कि समाज में नफरत के खिलाफ खड़ा होना ही सबसे बड़ी देशभक्ति है। इस मुलाकात के दौरान कई स्थानीय कांग्रेस नेता और कार्यकर्ता भी उपस्थित रहे। राहुल गांधी का यह कदम देश के मौजूदा सामाजिक माहौल में एकजुटता की राजनीति को मजबूती देने के तौर पर देखा जा रहा है।