Delhi: भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर लोकसभा में बरसे अखिलेश यादव, डील को बताया ढील – The Hill News

Delhi: भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर लोकसभा में बरसे अखिलेश यादव, डील को बताया ढील

नई दिल्ली। लोकसभा में बजट सत्र के दौरान समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और सांसद अखिलेश यादव ने केंद्र की भाजपा सरकार की नीतियों पर कड़ा प्रहार किया। भारत और अमेरिका के बीच हाल ही में हुए व्यापार समझौते पर सवाल उठाते हुए उन्होंने इसे एकतरफा करार दिया। अखिलेश यादव ने तंज कसते हुए कहा कि यह वास्तव में कोई ‘डील’ नहीं बल्कि ‘ढील’ है। उन्होंने सरकार से पूछा कि इस तरह के समझौतों से देश की आत्मनिर्भरता और स्वदेशी के नारे का क्या होगा?

सदन में चर्चा के दौरान अखिलेश यादव ने कहा कि भाजपा अक्सर गर्व से कहती है कि उसने दुनिया के कई देशों के साथ मुक्त व्यापार समझौते (FTA) किए हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि जो लोग कभी रुपये की गिरती कीमत को लेकर बहुत चिंतित रहते थे, उन्हें अब बताना चाहिए कि इतने सारे समझौतों के बाद भारतीय रुपया किस स्थिति में पहुंचेगा। उन्होंने अमेरिका के साथ हुए 500 बिलियन डॉलर के व्यापारिक लक्ष्य पर भी संदेह जताया और पूछा कि क्या यह समझौता पूरी तरह एकतरफा नहीं है? उन्होंने चिंता जताई कि ऐसे फैसलों से देश की आत्मनिर्भरता पर बुरा असर पड़ेगा।

अखिलेश यादव ने सरकार की व्यापारिक शर्तों पर भी स्पष्टीकरण मांगा। उन्होंने पूछा कि इस समझौते के तहत टैरिफ की दर क्या है? क्या यह शून्य प्रतिशत है या 18 प्रतिशत? उन्होंने चुटकी लेते हुए कहा कि देश की जनता अब यह जानना चाहती है कि सरकार की नजर में ‘0 बड़ा है कि 18’। उन्होंने भाजपा सरकार के प्रमुख कार्यक्रमों ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ की प्रासंगिकता पर सवाल खड़े किए और कहा कि ऐसे समझौतों के बीच स्वदेशी का नारा कहीं पीछे छूट गया है।

केंद्रीय बजट 2026 की आलोचना करते हुए समाजवादी पार्टी के नेता ने कहा कि इस पूरे बजट में देश के पिछड़ेपन को दूर करने के लिए कोई ठोस विजन नजर नहीं आता। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार के पास पिछड़े इलाकों के विकास के लिए न तो कोई स्पष्ट रणनीति है और न ही कोई सही दृष्टिकोण। बजट पर चर्चा के दौरान विपक्षी सांसदों के हंगामे के कारण सदन की कार्यवाही भी कई बार प्रभावित हुई। अखिलेश यादव ने अपने संबोधन में यह स्पष्ट करने की कोशिश की कि सरकार के आर्थिक दावे और जमीनी हकीकत में बड़ा अंतर है, विशेषकर उन क्षेत्रों में जो विकास की बाट जोह रहे हैं। उन्होंने अंत में कहा कि सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि इन बड़े समझौतों से आम जनता और स्थानीय उद्योगों को क्या लाभ होने वाला है।

 

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