Delhi: परीक्षा पे चर्चा में मोदी के मंत्र सपनों के साथ कर्म को बनाएं अपनी ताकत – The Hill News

Delhi: परीक्षा पे चर्चा में मोदी के मंत्र सपनों के साथ कर्म को बनाएं अपनी ताकत

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को ‘परीक्षा पे चर्चा’ के नौवें संस्करण के माध्यम से देश भर के छात्र-छात्राओं, शिक्षकों और अभिभावकों के साथ संवाद किया। इस कार्यक्रम के दौरान उन्होंने न केवल परीक्षा के तनाव को दूर करने के उपाय बताए, बल्कि जीवन जीने के व्यापक दृष्टिकोण पर भी अपनी बात रखी। संवाद के दौरान छात्रों ने कई दिलचस्प और चुनौतीपूर्ण सवाल पूछे, जिनका जवाब नरेंद्र मोदी ने अपने चिर-परिचित मजाकिया और प्रेरक अंदाज में दिया। उन्होंने युवाओं को तकनीक के जाल से बचने और समय की कीमत समझने की विशेष सलाह दी।

कार्यक्रम की शुरुआत में मोदी ने अपने जीवन के प्रति सकारात्मक नजरिए को साझा करते हुए एक दिलचस्प वाकया सुनाया। उन्होंने अपनी उम्र का जिक्र करते हुए कहा कि हाल ही में 17 सितंबर को उनके जन्मदिन पर एक नेता का फोन आया। उस नेता ने उन्हें याद दिलाया कि अब वे 75 वर्ष के हो गए हैं। इस पर मोदी ने पलटकर जवाब दिया कि अभी तो 25 साल बाकी हैं। उन्होंने छात्रों को प्रेरित करते हुए कहा कि वे बीते हुए समय को नहीं, बल्कि जो समय बचा है, उसे गिनते हैं। यह संदेश उन छात्रों के लिए था जो अक्सर छोटी-सी असफलता या बीते हुए कल की चिंताओं में डूबे रहते हैं। मोदी ने स्पष्ट किया कि भविष्य की ओर देखना और सकारात्मक ऊर्जा बनाए रखना ही सफलता की पहली सीढ़ी है।

तकनीक के इस दौर में छात्रों की इंटरनेट पर निर्भरता को लेकर भी मोदी ने अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि आज के समय में इंटरनेट बहुत सस्ता और सुलभ है, लेकिन इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि छात्र अपना कीमती समय इस पर बर्बाद करें। उन्होंने ‘डिजिटल फास्टिंग’ का सुझाव देते हुए कहा कि तकनीक एक उपकरण होनी चाहिए, न कि जीवन का केंद्र। इंटरनेट का उपयोग ज्ञान बढ़ाने के लिए होना चाहिए, न कि केवल मनोरंजन के नाम पर घंटों समय गंवाने के लिए।

संवाद के दौरान एक छात्र ने सबसे ज्वलंत सवाल पूछा कि ‘स्किल’ ज्यादा जरूरी है या ‘मार्क्स’। इसका उत्तर देते हुए मोदी ने कहा कि जीवन में हर चीज के बीच संतुलन होना बहुत जरूरी है। यदि आप किसी एक तरफ ज्यादा झुकेंगे, तो संतुलन बिगड़ना तय है। उन्होंने स्किल को दो भागों में बांटा— लाइफ स्किल और प्रोफेशनल स्किल। मोदी ने समझाया कि किसी भी स्किल की बुनियाद ज्ञान और अध्ययन ही होता है। बिना किसी चीज को गहराई से ऑब्जर्व किए या बिना ज्ञान प्राप्त किए कोई भी स्किल हासिल नहीं की जा सकती। इसलिए अंकों का अपना महत्व है और कौशल का अपना, दोनों को साथ लेकर चलना ही बुद्धिमानी है।

मोदी ने छोटे शहरों और गांवों से आने वाले बच्चों की सफलता की जमकर सराहना की। उन्होंने कहा कि पहले एक धारणा थी कि केवल बड़े परिवारों और बड़े स्कूलों के बच्चे ही बोर्ड परीक्षाओं में टॉप करते हैं, लेकिन अब यह बदल चुका है। आज छोटे-छोटे गांवों और सामान्य पृष्ठभूमि वाले बच्चे अपनी मेहनत से कीर्तिमान स्थापित कर रहे हैं। इस संदर्भ में उन्होंने नेत्रहीन (ब्लाइंड) महिला क्रिकेट टीम के साथ हुई अपनी मुलाकात का भावुक अनुभव साझा किया। मोदी ने बताया कि जब उन्होंने उन बच्चियों के संघर्ष और जीत की कहानी सुनी, तो उनकी आंखों में आंसू आ गए। उन्होंने कहा कि जो बच्चे दिव्यांग होने और सुविधाओं के अभाव के बावजूद दुनिया जीत सकते हैं, तो सामान्य छात्रों के लिए कुछ भी असंभव नहीं है।

छात्रों को आत्मविश्वास का पाठ पढ़ाते हुए मोदी ने कहा कि आपके शिक्षक, माता-पिता या सहपाठी कुछ भी कहें, लेकिन आपको स्वयं पर अटूट विश्वास होना चाहिए। उन्होंने लक्ष्य निर्धारण पर एक बहुत गहरी बात कही। उन्होंने कहा कि हमारा लक्ष्य ऐसा होना चाहिए जो पहुँच में तो हो, लेकिन पकड़ में न हो। यानी लक्ष्य इतना छोटा न हो कि आसानी से मिल जाए और न ही इतना असंभव हो कि आप हताश हो जाएं। निरंतर प्रयास और अपनी पकड़ को मजबूत करना ही असली चुनौती है।

मोदी ने परीक्षा की तैयारी के लिए पांच प्रमुख ‘एग्जाम मंत्र’ भी दिए। उन्होंने कहा कि परीक्षा को तनाव के बजाय एक उत्सव की तरह मनाना चाहिए। छात्रों को दूसरों के बजाय खुद से प्रतिस्पर्धा करनी चाहिए ताकि वे हर रोज खुद का बेहतर संस्करण बन सकें। उन्होंने सुझाव दिया कि पढ़ाई के दौरान मुश्किल विषयों और कामों को पहले निपटाना चाहिए ताकि बाद में मन शांत रहे। मोदी ने छात्रों से ‘रट्टू तोता’ बनने के बजाय ‘एग्जाम वॉरियर’ बनने का आह्वान किया।

सपनों और कर्म के संबंध पर चर्चा करते हुए मोदी ने कहा कि सपने न देखना एक अपराध के समान है। हर किसी को बड़े सपने देखने चाहिए, लेकिन केवल सपनों को दोहराते रहने से कुछ हासिल नहीं होता। उन्होंने कर्म को प्रधान बताते हुए कहा कि सपनों को हकीकत में बदलने के लिए मेहनत और योजनाबद्ध तरीके से काम करना जरूरी है। उन्होंने छात्रों को ‘कंफर्ट जोन’ से बाहर निकलने की सलाह दी और कहा कि असली जीवन चुनौतियों का सामना करने और संघर्षों से लड़कर ही बनता है। इस कार्यक्रम के अंत में उन्होंने सभी छात्रों को आगामी परीक्षाओं के लिए अपनी शुभकामनाएं दीं और उन्हें निडर होकर मैदान में उतरने के लिए प्रेरित किया।

 

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