जगराओं।
पंजाब के लुधियाना जिले के अंतर्गत आने वाले जगराओं के सिविल अस्पताल में गुरुवार की सुबह उस समय भीषण अफरा-तफरी और दहशत का माहौल बन गया, जब एक ही परिवार के सात सदस्य एक साथ इलाज के लिए पहुंचे। इन सभी सात लोगों में रेबीज जैसे गंभीर और जानलेवा बीमारी के लक्षण दिखाई दे रहे थे। अस्पताल प्रशासन ने स्थिति की गंभीरता और बीमारी के संदिग्ध लक्षणों को देखते हुए तुरंत सक्रियता दिखाई और प्राथमिक जांच के बाद सभी मरीजों को बेहतर इलाज और पुख्ता जांच के लिए चंडीगढ़ के पीजीआई अस्पताल रेफर कर दिया है।
इस पूरे मामले की जानकारी देते हुए सिविल अस्पताल जगराओं की वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी (एसएमओ) गुरविंदर कौर ने बताया कि यह एक प्रवासी परिवार है, जो पिछले करीब तीन वर्षों से जगराओं के शेरपुरा चौक के समीप स्थित एक निजी फैक्ट्री में काम कर रहा है। शुरुआती पूछताछ में यह तथ्य सामने आया है कि इस परिवार के सदस्यों को कुछ समय पहले कुत्तों ने काटा था। रेबीज जैसी घातक बीमारी के प्रति जागरूकता की कमी या लापरवाही के चलते इस परिवार ने समय पर डॉक्टरी सलाह नहीं ली और न ही कुत्तों के काटने के बाद लगाए जाने वाले जरूरी इंजेक्शन लगवाए। यही कारण रहा कि अब परिवार के सदस्यों में रेबीज के लक्षण उभरने लगे हैं।
अस्पताल के सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, इन सात मरीजों में पति-पत्नी, उनके तीन मासूम बच्चे और उनकी बहन के दो बच्चे शामिल हैं। चिंताजनक बात यह है कि रेबीज के संदिग्ध इन सात मरीजों में से पांच छोटे बच्चे हैं। डॉ. गुरविंदर कौर के मुताबिक, जब ये लोग अस्पताल पहुंचे तो उनकी स्थिति सामान्य नहीं थी। मरीजों के मुंह से अत्यधिक लार टपक रही थी, उन्हें बोलने में काफी कठिनाई हो रही थी और वे अपनी बात दूसरों को समझाने में असमर्थ थे। ये सभी लक्षण रेबीज के शुरुआती और खतरनाक चरण की ओर इशारा करते हैं।
मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए अस्पताल प्रबंधन ने बिना किसी देरी के सरकारी एम्बुलेंस के जरिए पूरे परिवार को चंडीगढ़ पीजीआई रवाना कर दिया। स्वास्थ्य विभाग की टीम खुद उन्हें वहां छोड़कर आई है ताकि रास्ते में किसी तरह की परेशानी न हो। बताया जा रहा है कि फिलहाल सिविल अस्पताल के आधिकारिक रजिस्टर में इन मरीजों के नाम दर्ज नहीं हो सके हैं क्योंकि प्राथमिकता उनकी जान बचाने और उन्हें उच्च स्तरीय संस्थान भेजने की थी।
चिकित्सा विशेषज्ञों का कहना है कि रेबीज एक ऐसी बीमारी है जिसका असर अगर एक बार शरीर और मस्तिष्क पर दिखने लगे, तो इलाज बेहद मुश्किल हो जाता है। कुत्तों या अन्य जानवरों के काटने के तुरंत बाद टीकाकरण ही इससे बचने का एकमात्र प्रभावी उपाय है। इस परिवार ने चूंकि लंबे समय तक इलाज में देरी की, इसलिए अब उनकी स्थिति नाजुक बनी हुई है। पीजीआई में शुक्रवार को होने वाले विशेष परीक्षणों और रिपोर्ट के बाद ही यह पूरी तरह स्पष्ट हो पाएगा कि यह रेबीज ही है या कोई अन्य संक्रमण।
इस घटना ने स्थानीय प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की चिंता बढ़ा दी है। औद्योगिक क्षेत्रों में काम करने वाले प्रवासी परिवारों के बीच स्वास्थ्य जागरूकता की कमी एक बड़ी चुनौती बनकर उभरी है। फिलहाल, सभी सात मरीजों को पीजीआई में विशेषज्ञ डॉक्टरों की कड़ी निगरानी में रखा गया है और उन्हें गहन उपचार दिया जा रहा है। अस्पताल प्रशासन और स्थानीय लोग अब पीजीआई की रिपोर्ट का इंतजार कर रहे हैं, ताकि बीमारी की वास्तविक स्थिति का पता चल सके। स्थानीय स्वास्थ्य अधिकारियों ने क्षेत्र के लोगों से अपील की है कि यदि किसी को भी कुत्ता या कोई अन्य संदिग्ध जानवर काटता है, तो उसे हल्के में न लें और तुरंत सरकारी अस्पताल जाकर नि:शुल्क टीकाकरण करवाएं।