नई दिल्ली।
भारतीय क्रिकेट टीम के मुख्य कोच गौतम गंभीर के भविष्य को लेकर पिछले कुछ दिनों से जारी अटकलों पर भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) ने अपनी स्थिति स्पष्ट कर दी है। न्यूजीलैंड के खिलाफ घरेलू मैदान पर वनडे और टेस्ट सीरीज में मिली करारी हार के बाद गंभीर के कोचिंग करियर को लेकर सवाल उठाए जा रहे थे। कुछ खेल विशेषज्ञों और प्रशंसकों ने तो उन्हें पद से हटाने तक की मांग कर दी थी, लेकिन बीसीसीआई के सचिव देवजीत सैकिया ने इन सभी चर्चाओं को सिरे से खारिज कर दिया है।
गौतम गंभीर के कार्यकाल के दौरान भारतीय टीम के प्रदर्शन में काफी उतार-चढ़ाव देखने को मिला है। उनके मार्गदर्शन में टीम इंडिया को घरेलू सरजमीं पर न्यूजीलैंड और दक्षिण अफ्रीका जैसी टीमों के खिलाफ टेस्ट मैचों में संघर्ष करना पड़ा है। इन सीरीज में भारत न केवल मैच हारा, बल्कि एक भी मुकाबला ड्रॉ कराने में भी असफल रहा। इसी तरह वनडे सीरीज में भी न्यूजीलैंड के हाथों मिली हार ने प्रशंसकों को निराश किया। हालांकि, इसके विपरीत टी20 अंतरराष्ट्रीय प्रारूप में टीम का प्रदर्शन शानदार रहा है और वहां लगातार सफलताएं मिल रही हैं। इसी विरोधाभास के कारण यह चर्चा तेज हो गई थी कि क्या टेस्ट क्रिकेट के लिए किसी अलग कोच की नियुक्ति की जाएगी और गंभीर को केवल सीमित ओवरों तक सीमित रखा जाएगा।
इन अफवाहों पर लगाम लगाते हुए देवजीत सैकिया ने एक साक्षात्कार में कहा कि भारत जैसे क्रिकेट प्रेमी देश में हर किसी को अपनी राय रखने का अधिकार है। उन्होंने चुटकी लेते हुए कहा कि भारत 140 करोड़ की आबादी वाला देश है और यहां लगभग हर व्यक्ति क्रिकेट की गहरी समझ रखता है। एक लोकतांत्रिक व्यवस्था होने के नाते बोर्ड किसी की आवाज नहीं दबा सकता और लोग सोशल मीडिया या अन्य माध्यमों से अपने विचार साझा करने के लिए स्वतंत्र हैं। सैकिया ने स्पष्ट किया कि मीडिया में चल रही अटकलें अपनी जगह हैं, लेकिन बीसीसीआई के फैसले पूरी तरह से विशेषज्ञों की राय पर आधारित होते हैं।
बीसीसीआई सचिव ने बोर्ड की कार्यप्रणाली को समझाते हुए बताया कि कोच और टीम से जुड़े बड़े निर्णय लेने के लिए एक विशेष क्रिकेट समिति है, जिसमें अनुभवी पूर्व क्रिकेटर शामिल हैं। यह समिति पूरी तरह से समर्पित होकर टीम के प्रदर्शन का विश्लेषण करती है। इसके साथ ही टीम के चयन के लिए पांच योग्य चयनकर्ताओं का एक पैनल है, जो अपनी निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार काम करता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि भले ही बाहर किसी भी तरह की राय बनी हो, लेकिन अंतिम फैसला हमेशा क्रिकेट समिति और चयनकर्ताओं द्वारा ही लिया जाता है।
इस विवाद के बीच पूर्व खिलाड़ी मनोज तिवारी ने भी एक सख्त टिप्पणी की थी। तिवारी का मानना है कि यदि भारतीय टीम सूर्य कुमार यादव की कप्तानी में 2026 का टी20 विश्व कप जीतने में कामयाब नहीं होती है, तो बीसीसीआई को गौतम गंभीर को पद से हटाने जैसा कड़ा निर्णय लेना चाहिए। हालांकि, सैकिया के ताजा बयान से यह संकेत मिलता है कि बोर्ड फिलहाल गंभीर के साथ किए गए अनुबंध और उनकी कार्यशैली पर पूरा भरोसा दिखा रहा है। बीसीसीआई के इस रुख से यह साफ हो गया है कि कोच को लेकर कोई भी जल्दबाजी में फैसला नहीं लिया जाएगा और उन्हें 2026 के विश्व कप तक अपनी रणनीतियों को साबित करने का पर्याप्त अवसर मिलेगा। फिलहाल, बोर्ड किसी भी बाहरी दबाव में आकर कोचिंग स्टाफ में बदलाव के मूड में नहीं दिख रहा है।