Uttarakhand: पाकिस्तान को सेना प्रमुख उपेंद्र द्विवेदी की दो टूक चेतावनी और ऑपरेशन सिंदूर पर बड़ा खुलासा

नई दिल्ली। भारतीय थल सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने पाकिस्तान को कड़ी चेतावनी देते हुए स्पष्ट किया है कि भविष्य में पड़ोसी देश की किसी भी नापाक हरकत का मुंहतोड़ जवाब दिया जाएगा। मंगलवार को एक महत्वपूर्ण प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए सेना प्रमुख ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की वर्तमान स्थिति और सीमा पार के सुरक्षा हालातों पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि ऑपरेशन सिंदूर अभी भी जारी है और भारतीय सेना अपनी सीमाओं की रक्षा के लिए पूरी तरह तैयार है।

जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने खुफिया जानकारियों के हवाले से बताया कि पाकिस्तान की ओर से भारत में अस्थिरता पैदा करने की कोशिशें लगातार की जा रही हैं। उन्होंने खुलासा किया कि वर्तमान में करीब 8 सक्रिय आतंकी शिविर भारतीय सेना की निगरानी में हैं। इन शिविरों का विवरण देते हुए उन्होंने बताया कि इनमें से 2 कैंप अंतरराष्ट्रीय सीमा (आईबी) सेक्टर में स्थित हैं, जबकि 6 अन्य कैंप नियंत्रण रेखा (एलसी) सेक्टर में सक्रिय हैं। सेना प्रमुख का यह बयान उन दावों की पुष्टि करता है कि पाकिस्तान अभी भी अपनी जमीन पर आतंकी बुनियादी ढांचे को खाद-पानी दे रहा है।

ऑपरेशन सिंदूर की सफलता और इसकी बारीकियों पर प्रकाश डालते हुए उपेंद्र द्विवेदी ने कहा कि यह अभियान भारतीय सेना, वायु सेना और नौसेना के बीच एक अद्वितीय और बेहतरीन तालमेल का शानदार उदाहरण रहा है। उन्होंने बताया कि इस ऑपरेशन की योजना और क्रियान्वयन अत्यंत सटीकता के साथ किया गया था। पूरी कार्रवाई के समयक्रम की जानकारी देते हुए उन्होंने कहा कि इसकी शुरुआत से लेकर समापन तक कुल 88 घंटे का समय लगा। इस ऑपरेशन की तीव्रता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि मुख्य हमले शुरू होने के पहले 22 मिनट के भीतर ही दुश्मन के हौसले पस्त कर दिए गए थे।

सेना प्रमुख के अनुसार, इस ऑपरेशन का उद्देश्य केवल तात्कालिक नुकसान पहुंचाना नहीं था, बल्कि सीमा पार मौजूद आतंकी तंत्र को जड़ से हिलाना था। उन्होंने कहा कि इस सैन्य कार्रवाई ने न केवल आतंकी ढांचे को गहराई तक तोड़ा, बल्कि पाकिस्तान की उस पुरानी रणनीति की भी हवा निकाल दी जिसमें वह समय-समय पर परमाणु हथियारों की धमकी देकर भारत को डराने का प्रयास करता था। इस ऑपरेशन के जरिए भारत ने दुनिया को अपनी ठोस रणनीतिक और सैन्य क्षमता का परिचय दिया है।

उपेंद्र द्विवेदी ने तकनीकी सफलता का जिक्र करते हुए बताया कि अभियान के दौरान कुल 9 महत्वपूर्ण लक्ष्य निर्धारित किए गए थे। इनमें से 7 लक्ष्यों को भारतीय सेना ने पूरी तरह तबाह कर दिया। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सेना केवल हवाई या लंबी दूरी के हमलों तक सीमित नहीं थी, बल्कि किसी भी संभावित जमीनी हमले (ग्राउंड ऑफेंसिव) के लिए भी पूरी तरह तैयार थी। ऑपरेशन की सबसे बड़ी विशेषता इसकी नैतिकता और सटीकता रही। भारत ने चुन-चुनकर केवल उन्हीं ठिकानों को नष्ट किया जहां आतंकी गतिविधियां संचालित हो रही थीं। इस पूरी कार्रवाई के दौरान किसी भी आम नागरिक या पाकिस्तानी सैन्य ठिकाने को निशाना नहीं बनाया गया, जो भारतीय सेना के अनुशासित और पेशेवर आचरण को दर्शाता है।

अंत में सेना प्रमुख ने कड़ा संदेश देते हुए कहा कि भारत अब किसी भी उकसावे को बर्दाश्त नहीं करेगा। यदि पाकिस्तान ने अपनी हरकतों में बदलाव नहीं किया, तो उसे भविष्य में इससे भी अधिक गंभीर परिणामों का सामना करना पड़ सकता है। भारतीय सेना देश की संप्रभुता और अखंडता की रक्षा के लिए हर समय मुस्तैद खड़ी है।

 

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