शिमला। हिमाचल पथ परिवहन निगम (एचआरटीसी) में भ्रष्टाचार और पद के दुरुपयोग का एक बड़ा मामला सामने आया है। निगम के शिमला डिवीजन में तैनात अधीक्षक ग्रेड-1 जगदीश चंद आजाद को उनके विरुद्ध लगे गंभीर आरोपों के कारण तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। जगदीश चंद आजाद निगम में जांच अधिकारी के रूप में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी संभाल रहे थे, लेकिन अब उन पर विभागीय कार्रवाई की गाज गिरी है। निलंबन का यह आदेश एचआरटीसी के प्रबंध निदेशक निपुण जिंदल द्वारा जारी किया गया है।
जगदीश चंद आजाद पर अनुशासनहीनता, कदाचार और अपने पद का नाजायज फायदा उठाने के बेहद गंभीर आरोप लगे हैं। मिली जानकारी के अनुसार, उन पर यह आरोप है कि जांच अधिकारी के पद पर रहते हुए उन्होंने उन कर्मचारियों से रिश्वत की मांग की, जिनके विरुद्ध वे विभागीय जांच कर रहे थे। उन्होंने आरोपित कर्मचारियों को उनके पक्ष में रिपोर्ट तैयार करने और उन्हें विभागीय कार्रवाई से बचाने के बदले अनुचित लाभ या घूस मांगी थी। एक जांच अधिकारी के रूप में इस तरह का आचरण सेवा नियमों का खुला उल्लंघन माना गया है।
इन आरोपों की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने जगदीश चंद आजाद के विरुद्ध केंद्रीय सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियम, 1965 के तहत विस्तृत जांच करने का निर्णय लिया है। निलंबन की अवधि के दौरान आजाद का मुख्यालय शिमला ही निर्धारित किया गया है। नियमों के मुताबिक, वे सक्षम प्राधिकारी की पूर्व अनुमति लिए बिना अपना मुख्यालय नहीं छोड़ सकेंगे। निलंबन काल के दौरान उन्हें नियमानुसार निर्वाह भत्ता (सब्सिस्टेंस अलाउंस) दिया जाएगा। प्रबंध निदेशक द्वारा जारी आदेशों में यह भी स्पष्ट किया गया है कि यह निलंबन आगामी आदेशों तक प्रभावी रहेगा और जांच प्रक्रिया पूरी होने तक जारी रहेगा।
इस पूरे विवाद की शुरुआत 22 जनवरी 2025 को हुई थी, जब एक कर्मचारी नेता ने जगदीश चंद आजाद के विरुद्ध औपचारिक शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में विस्तार से बताया गया था कि किस प्रकार जांच अधिकारी रहते हुए वे अपने अधिकारों का दुरुपयोग कर रहे थे। आरोप था कि जो भी अनुशासनात्मक मामले उनके पास जांच के लिए आते थे, उनमें वे आरोपित व्यक्ति के साथ साठगांठ कर उसके पक्ष में निर्णय देने का प्रयास करते थे। इस शिकायत के बाद निगम प्रशासन ने प्राथमिक जांच की और आरोपों में सत्यता पाते हुए निलंबन की कार्रवाई को अंजाम दिया।
जगदीश चंद आजाद के निलंबन के बाद अब निगम के भीतर एक नई मांग जोर पकड़ने लगी है। कर्मचारियों का कहना है कि जिस अधिकारी पर जांच रिपोर्ट बदलने के लिए रिश्वत मांगने का आरोप लगा है, उसके द्वारा अतीत में दी गई सभी रिपोर्टों पर सवालिया निशान खड़ा होता है। एचआरटीसी इंटक के अध्यक्ष उमेश शर्मा ने प्रबंधन के समक्ष यह जोरदार मांग रखी है कि उक्त अधिकारी ने अभी तक जितने भी मामलों की जांच की है, उन सभी फाइलों को दोबारा खोला जाए और उनकी गहन समीक्षा की जाए।
कर्मचारी संगठन का तर्क है कि इस जांच अधिकारी द्वारा पिछली रिपोर्टों के आधार पर जो भी निर्णय लिए गए हैं, उनमें पारदर्शिता का अभाव हो सकता है। उमेश शर्मा ने मांग की है कि प्रबंधन इस पहलू की भी बारीकी से जांच करे कि पुरानी जांच रिपोर्टों के निपटारे के लिए क्या आधार अपनाए गए थे। इस कार्रवाई के बाद हिमाचल पथ परिवहन निगम में हड़कंप मचा हुआ है और यह माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में जांच का दायरा और बढ़ सकता है। प्रशासन की इस सख्ती से यह संदेश देने की कोशिश की गई है कि भ्रष्टाचार और पद के दुरुपयोग को किसी भी स्तर पर सहन नहीं किया जाएगा।
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