लखनऊ. उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में शुक्रवार को अध्यात्म, राष्ट्रवाद और सामाजिक चिंतन का एक अनूठा संगम देखने को मिला। अवसर था प्रजापिता ब्रह्माकुमारीज ईश्वरीय विश्वविद्यालय के ‘विश्व एकता एवं विश्वास के लिए ध्यान’ के राज्य स्तरीय उद्घाटन समारोह का। इस गरिमामयी कार्यक्रम में देश की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित थीं। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भारत की सनातन ऋषि परंपरा, योग और वर्तमान वैश्विक चुनौतियों पर विस्तार से अपने विचार रखे। उन्होंने दुनिया भर में फैल रहे आतंकवाद और अराजकता के लिए मनुष्य के मन की नकारात्मक और चंचल वृत्तियों को जिम्मेदार ठहराया।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भारतीय आध्यात्मिक दर्शन का उल्लेख करते हुए कहा कि हमारी संस्कृति और ऋषि परंपरा हमेशा से यह मानती आई है कि मन ही मनुष्य के बंधन और मोक्ष का असली कारण है। उन्होंने महान संत रविदास की प्रसिद्ध उक्ति ‘मन चंगा तो कठौती में गंगा’ का जिक्र करते हुए समझाया कि शुद्धि बाहरी नहीं, बल्कि आंतरिक होनी चाहिए। योगी ने कहा कि यदि कोई व्यक्ति अपने मन की बहिर्मुखी वृत्तियों को रोककर उसे अंतर्मुखी बना ले, तो वह न केवल आत्मिक संतुष्टि प्राप्त कर सकता है, बल्कि पूरे विश्व के कल्याण का मार्ग भी प्रशस्त कर सकता है।
वैश्विक परिदृश्य पर चिंता व्यक्त करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि आज दुनिया में जहां कहीं भी आतंकवाद, हिंसा या उपद्रव दिखाई दे रहा है, उसके मूल में मन की अनियंत्रित और चंचल वृत्तियां ही हैं। उन्होंने इसे ‘राक्षसी वृत्ति’ करार देते हुए कहा कि जब मन नकारात्मकता की ओर झुकता है, तो वह विनाश और अराजकता की तरफ ले जाता है। वहीं, जब यह सकारात्मकता की ओर बढ़ता है, तो अच्छे कार्यों की प्रेरणा मिलती है। उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत अपनी भौतिक और आध्यात्मिक शक्ति के समन्वय से इस नकारात्मकता के खिलाफ लगातार संघर्ष कर रहा है।
अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रयासों की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि 2014 में देश का नेतृत्व संभालने के बाद नरेंद्र मोदी ने भारत की प्राचीन योग विधा को संयुक्त राष्ट्र के मंच से वैश्विक मान्यता दिलाई। यह उन्हीं के प्रयासों का परिणाम है कि आज 21 जून को पूरी दुनिया ‘विश्व योग दिवस’ मनाती है। मुख्यमंत्री ने कहा कि ऋषि परंपरा के इस ‘प्रसाद’ को जन-जन तक पहुंचाना भारत के लिए गर्व की बात है।
मंच पर मौजूद राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु का स्वागत करते हुए योगी आदित्यनाथ ने उनके जीवन संघर्ष को हर भारतीय के लिए एक मिसाल बताया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति का जीवन एक शिक्षक के रूप में शुरू हुआ और जनसेवा के भाव से वे पार्षद बनीं। वहां से लेकर राष्ट्रपति भवन तक का उनका सफर संघर्ष और समर्पण की एक अद्भुत गाथा है, जो देश के सामान्य नागरिकों को नई प्रेरणा देती है।
मुख्यमंत्री ने ब्रह्माकुमारीज संस्था के कार्यों की भी प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि यह संस्था राजयोग और अपने विभिन्न कार्यक्रमों के जरिए समाज में सकारात्मकता फैला रही है। योगी ने लखनऊ में तैयार हो रहे नए प्रशिक्षण केंद्र की तारीफ करते हुए कहा कि यह आने वाले समय में उत्तर प्रदेश का एक उत्कृष्ट आध्यात्मिक केंद्र साबित होगा, जहां लोग मानसिक शांति के लिए आएंगे। इस अवसर पर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल और संस्था के कई वरिष्ठ पदाधिकारी भी मौजूद रहे। इससे पहले राष्ट्रपति के लखनऊ पहुंचने पर एयरपोर्ट पर उनका भव्य स्वागत किया गया।
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