धर्मशाला. हिमाचल प्रदेश विधानसभा के शीतकालीन सत्र का तीसरा दिन भी भारी हंगामे और शोर-शराबे की भेंट चढ़ गया। धर्मशाला के तपोवन में चल रहे इस सत्र के दौरान शुक्रवार को सदन के भीतर और बाहर दोनों जगह सियासी पारा सातवें आसमान पर रहा। सत्ताधारी कांग्रेस और विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी के बीच तनातनी इतनी बढ़ गई कि दोनों ही दलों ने एक-दूसरे के खिलाफ जमकर प्रदर्शन किए। एक तरफ जहां विपक्ष ने सरकार को कर्मचारी विरोधी बताते हुए मोर्चा खोला, वहीं सदन के भीतर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ यानी आरएसएस को लेकर मंत्री की टिप्पणी पर भारी बवाल हुआ।
दिन की शुरुआत ही प्रदर्शनों के साथ हुई। भारतीय जनता पार्टी के विधायक विपक्ष के कक्ष से बाहर निकले और हाथों में तख्तियां व बैनर लेकर सुखविंदर सिंह सुक्खू सरकार के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी। विपक्ष ने सरकार पर कर्मचारियों के हितों की अनदेखी करने का आरोप लगाया। भाजपा विधायकों की मुख्य मांग थी कि पूर्व कर्मचारियों की रुकी हुई ग्रेच्युटी तुरंत जारी की जाए। इसके अलावा, उन्होंने पूर्व कर्मचारियों को समय पर पेंशन का भुगतान न होने और उनके चिकित्सा बिलों (मेडिकल रिम्बर्समेंट) के लटके हुए भुगतान को लेकर भी सरकार को घेरा। नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर और भाजपा दल के तमाम विधायक हाथों में तख्तियां लेकर नारेबाजी करते दिखाई दिए।
सदन के भीतर की कार्यवाही भी सुचारू रूप से नहीं चल सकी। शुक्रवार को जब विधानसभा की कार्यवाही प्रश्नकाल के साथ शुरू हुई, तो उस वक्त भाजपा विधायक सदन में मौजूद नहीं थे। विधानसभा अध्यक्ष ने नियमानुसार प्रश्नकाल शुरू करवा दिया। कुछ देर बाद जब नेता प्रतिपक्ष और भाजपा विधायक सदन में पहुंचे, तो जयराम ठाकुर ने ‘ज्वाइंट ऑफ ऑर्डर’ के तहत अपनी बात रखने के लिए समय मांगा। लेकिन सत्ता पक्ष के सदस्यों ने इसका विरोध किया। सत्ता पक्ष का कहना था कि पिछले दो दिनों से प्रश्नकाल नहीं हो पा रहा है, इसलिए इसे बाधित न किया जाए। विधानसभा अध्यक्ष ने भी प्रश्नकाल जारी रखने का निर्णय लिया।
अध्यक्ष के इस फैसले से नाराज विपक्ष के सदस्य अपनी सीटों पर खड़े हो गए और जोर-जोर से नारेबाजी करने लगे। देखते ही देखते माहौल इतना गर्म हो गया कि कई विपक्षी विधायक नारेबाजी करते हुए वेल (सदन के बीचों-बीच) में आ गए। भारी शोर-शराबे और हंगामे को देखते हुए विधानसभा अध्यक्ष को सदन की कार्यवाही 10 मिनट के लिए स्थगित करनी पड़ी।
हंगामे की एक बड़ी वजह राजस्व मंत्री द्वारा आरएसएस के खिलाफ की गई टिप्पणी भी थी। नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने इस मुद्दे को जोर-शोर से उठाया। उन्होंने कहा कि राजस्व मंत्री द्वारा आरएसएस के खिलाफ गलत और अमर्यादित शब्दों का प्रयोग निंदनीय है। उन्होंने मांग की कि मंत्री को अपने शब्दों के लिए माफी मांगनी चाहिए और उन शब्दों को रिकॉर्ड से हटाया जाना चाहिए। जयराम ठाकुर ने मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री की न जाने क्या मजबूरी है कि वे अपने मंत्री को टोक नहीं रहे हैं।
जयराम ठाकुर ने आरोप लगाया कि आज सुबह जब विपक्ष सदन के बाहर शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहा था, तब यही मंत्री अन्य विधायकों के साथ वहां पहुंच गए और विपक्ष के प्रदर्शन में व्यवधान डालने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि सत्ता पक्ष के इस रवैये से कानून व्यवस्था खराब हो सकती थी। कुल मिलाकर तीसरे दिन भी जनहित के मुद्दों पर चर्चा से ज्यादा सियासी रस्साकशी हावी रही।
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