Uttarakhand: उत्तराखंड में बदलेगा मौसम का मिजाज और पहाड़ों में बर्फबारी के साथ मैदानों में बढ़ेगी ठिठुरन

देहरादून। उत्तराखंड में इस साल शीतकाल के दौरान बारिश और बर्फबारी न होने के कारण सूखी ठंड ने मैदान से लेकर पहाड़ तक जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित किया है। नमी के अभाव में बढ़ती इस ठंड से लोग खासे परेशान हैं, लेकिन अब मौसम विभाग ने राहत के संकेत दिए हैं। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, अगले दो दिनों के भीतर प्रदेश के पर्वतीय क्षेत्रों में मौसम के स्वरूप में बड़ा बदलाव आने की संभावना है। इस बदलाव के कारण न केवल पहाड़ों में बर्फबारी देखने को मिल सकती है, बल्कि पूरे प्रदेश के अधिकतम और न्यूनतम तापमान में भी उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की जाएगी।

मौसम विज्ञान केंद्र द्वारा जारी ताजा पूर्वानुमान के अनुसार, बुधवार और गुरुवार को प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में मौसम शुष्क रहने की उम्मीद है। हालांकि, मैदानी इलाकों में रहने वाले लोगों के लिए मुश्किलें कम नहीं होंगी। बुधवार के लिए विभाग ने विशेष रूप से ‘येलो अलर्ट’ जारी किया है। इसके तहत देहरादून, ऊधमसिंह नगर और हरिद्वार जैसे मैदानी जिलों के साथ-साथ नैनीताल, चंपावत और पौड़ी जैसे पहाड़ी जिलों के निचले हिस्सों में घना कोहरा छाए रहने की चेतावनी दी गई है। घने कोहरे के कारण दृश्यता कम होने से यातायात पर भी असर पड़ सकता है।

मौसम के इस बदलते चक्र में 16 जनवरी से 19 जनवरी के बीच का समय अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। वैज्ञानिकों का अनुमान है कि इस अवधि के दौरान उत्तरकाशी, चमोली और पिथौरागढ़ जिलों के कुछ हिस्सों में हल्की बारिश हो सकती है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि 3400 मीटर से अधिक की ऊंचाई वाले इलाकों में इस सीजन की अच्छी बर्फबारी के आसार बन रहे हैं। यदि उच्च हिमालयी क्षेत्रों में बर्फबारी होती है, तो इसका सीधा असर निचले इलाकों के तापमान पर पड़ेगा और सूखी ठंड से लोगों को निजात मिलेगी।

वर्तमान में सूखी ठंड का सबसे ज्यादा प्रहार मैदानी क्षेत्रों में देखा जा रहा है। बारिश न होने की वजह से हवा में धूल के कण और प्रदूषण की मात्रा भी बढ़ी हुई महसूस की जा रही है। मौसम विभाग का कहना है कि आने वाले दिनों में रात के न्यूनतम तापमान में और अधिक कमी आएगी, जिससे रात और सुबह के समय कड़ाके की ठंड महसूस होगी। वहीं, पहाड़ों में होने वाली बारिश और बर्फबारी के चलते दिन के अधिकतम तापमान में भी गिरावट आएगी, जिससे ठिठुरन बढ़ना तय है।

इस बार मकर संक्रांति के अवसर पर भी कड़ाके की ठंड के बीच श्रद्धालुओं ने गंगा में आस्था की डुबकी लगाई। हरिद्वार और ऋषिकेश जैसे तीर्थ स्थलों पर कड़ाके की सर्दी के बावजूद लोगों का उत्साह कम नहीं हुआ। अब मौसम के करवट लेने की खबर से विशेष रूप से पर्यटन व्यवसाय से जुड़े लोगों और किसानों में नई उम्मीद जगी है। पहाड़ों में बर्फबारी न होने से जहां विंटर टूरिज्म प्रभावित हो रहा था, वहीं किसान भी अपनी रबी की फसलों के लिए बारिश का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। मौसम विभाग ने नागरिकों को सलाह दी है कि वे कोहरे और गिरते तापमान के दौरान अपनी सेहत का विशेष ध्यान रखें और यात्रा के दौरान सतर्कता बरतें।

 

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