Punjab: पंजाब सरकार पहले पड़ाव में 260 खेल नर्सरियाँ खोलेगी: मीत हेयर

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  • खिलाडिय़ों की माँग पर नए खेल और नर्सरियों की संख्या बढ़ाई
  • खेल सुपरवाईजऱों और प्रशिक्षकों की भर्ती के लिए 10 मार्च तक आवेदन पत्र माँगे

चंडीगढ़, 29 फरवरी:
पंजाब सरकार द्वारा नयी खेल नीति के अंतर्गत स्थापित की जाने वाली 1000 खेल नर्सरियों में से 260 नर्सरियाँ पहले पड़ाव में स्थापित की जा रही हैं, जिनकी स्थापना के लिए खेल सुपरवाईजऱों और प्रशिक्षकों की भर्ती के लिए 10 मार्च तक आवेदन पत्र माँगे गए हैं।

खेल मंत्री गुरमीत सिंह मीत हेयर ने कहा कि पंजाब में खेल सभ्याचार पैदा करने और गाँव स्तर पर खिलाडिय़ों के लिए बुनियादी ढांचा बनाने की कोशिशों के चलते मुख्यमंत्री स. भगवंत सिंह मान के दिशा-निर्देशों पर बनाई गई नयी खेल नीति के अंतर्गत हर 4-5 किलोमीटर के दायरे में एक खेल नर्सरी बनाई जा रही है।
खेल मंत्री ने कहा कि पहले पड़ाव में 205 नर्सरियाँ खोलने का प्रस्ताव था, जिस सम्बन्धी बाकायदा भर्ती के लिए विज्ञापन भी दिया गया। इसके बाद कई खिलाडिय़ों और सम्बन्धित पक्षों द्वारा सम्पर्क करके और नर्सरियाँ खोलने की माँग की गई। इसके अलावा ऐसे खेलों को भी शामिल करने की पुरज़ोर माँग उठी जो पहले पड़ाव में शामिल नहीं थे। उन्होंने कहा कि लोगों की भावनाओं की कद्र करते हुए अब खेल विभाग पहले पड़ाव में 2024-25 सैशन में ही 260 खेल नर्सरियाँ खोलने जा रहा है, जिसके लिए संशोधित विज्ञापन जारी करके इस सम्बन्धी विवरण विभाग की वैबसाईट www.pbsports.punjab.gov.in पर डाल दिए गए हैं।

मीत हेयर ने बताया कि 260 खेल नर्सरियों के लिए 260 प्रशिक्षक और 26 सुपरवाइजऱ भर्ती किये जा रहे हैं। उन्होंने खेलों के अनुसार विवरण जारी करते हुए बताया कि खेल नर्सरियों के लिए एथलैटिक्स के लिए 58, हॉकी और वॉलीबॉल के लिए 22-22, कुश्ती और बैडमिंटन के लिए 20, फ़ुटबॉल, मुक्केबाज़ी और बास्केटबॉल के लिए 15-15, कबड्डी के लिए 12, तीरअन्दाज़ी और तैराकी के लिए 10-10, वेटलिफ्टिंग और जूडो के लिए 5-5, जिम्नास्टिक, रोइंग और साईकलिंग के लिए 4-4, हैंडबॉल, वुशू और क्रिकेट के लिए 3-3, खो-खो, तलवारबाजी, टैनिस और टेबल टैनिस के लिए 2-2, किक बॉक्सिंग और नैटबॉल के लिए 1-1 प्रशिक्षक की भर्ती की जा रही है।

खेल मंत्री ने आगे बताया कि जिस इलाके में जो खेल अधिक प्रसिद्ध है और सम्बन्धित खेल के खिलाडिय़ों की संख्या अधिक है, वहाँ उसी खेल की नर्सरी बनाई जा रही है। उन्होंने कहा कि ‘खेडां वतन पंजाब दियां’ की सफलता के बाद विभाग के पास डाटा मौजूद है कि किस इलाके में कौन सी खेल अधिक खेली जाती है।

 

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