Uttarakhand: विधानसभा में रखा गया यूसीसी विधेयक, यह है मुख्य बिंदु

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देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने आज मंगलवार को विधानसभा सदन के पटल पर यूसीसी विधेयक रखा। इसके साथ ही सदन में जय श्री राम के नारे गूंज उठए। उत्तराखंड में UCC की एक्सपर्ट कमेटी ने जो रिपोर्ट तैयार की है उसमें लगभग 400 सेक्शन है। ख़ास बात यह है कि जनजाति पर यह क़ानून लागू नहीं होगा। मतलब उत्तराखंड में निवास करने वाली किसी भी जनजाति इस क़ानून से मुक्त रहेंगी। पिछले दिनों आसाम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा भी कह चुके है कि वो भी अपने प्रदेश में जनजाति और आदिवासियों को इस क़ानून से मुक्त रखेंगे।

एक्सपर्ट कमेटी की रिपोर्ट के मुख्य बिंदु

(1) राज्य की चार प्रतिशत जनजाति को क़ानून से मुक्त रखा गया है, उत्तराखंड में किसी भी जनजाति पर UCC क़ानून लागू नहीं होगा।

(2) विहाह से संबंधित बिंदु
A. सभी धर्म जातियों में विवाह की आयु 18 वर्ष होगी
B. बहुविवाह प्रथा पर रोक लगेगी
C. विवाह का पंजीकरण अनिवार्य करना (लोकल बॉडी में होगा)
D. कोर्ट के अलावा हर प्रकार के तलाक पर रोक रहेगी
E. पुनर्विवाह के लिए किसी भी प्रकार की शर्त पर रोक रहेगी (हलाला, इद्दत, इत्यादि)
F. वर्जित विवाह परिभाषित किए गए, सगे व चचेरे, ममेरे भाई बहन से विवाह वर्जित होगा, लेकिन यदि किसी धर्म में पहले से ही इसका रिवाज और मान्यता है तो वो ऐसे विवाहों के लिए स्वतंत्र है

(3) लिव इन रिलेशनशिप
A. साथ रहने से पहले पंजीकरण अनिवार्य होगा
B. पंजीकरण के टर्मिनेशन का भी पंजीकरण होगा
C. इस दौरान कोई संतान पैदा होती है तो उसके हितों का संरक्षण करना होगा और उसे माता-पिता का नाम भी देना होगा
( उपरोक्त सभी के उल्लंघन पर कड़े दंड का प्रावधान किया गया है।

(4) उत्तराधिकार की व्यवस्था माता-पिता की संपत्ति में पुत्र पुत्री को समान अधिकार

(5) गोद लेना, हर्ज़ा खर्चा, संरक्षता के प्रावधान भी किये गए हैं। इनसे संबंधित सभी कानूनों के प्रावधान भी UCC में शामिल किए है।

यूसीसी की एक्सपर्ट कमेटी को मिले सुझाव

ऑनलाइन, डाक द्वारा, डायरेक्ट 2 लाख 31 हज़ार सुझाव मिले है

20 हज़ार लोगों से कमेटी ने सीधे संपर्क किया है।
इस दौरान सभी धर्म गुरुओं, संगठनों, राजनीतिक दलों, कानूनविदों से बातचीत की गई है।

उत्तराखंड में जनजाति समुदाय
राज्य में पांच प्रकार की जनजातियां है जिनमें थारू, बोक्सा, राजी, भोटिया और जौनसारी समुदाय शामिल है।
चीन के साथ 1962 की लड़ाई के बाद 1967 में इनको संविधान के अनुच्छेद 342 के तहत जनजाति समुदाय में शामिल करने के लिए अधिसूचित किया गया है।

 

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