नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने निजी कंपनियों द्वारा आम नागरिकों के संवेदनशील व्यक्तिगत डेटा तक पहुंच बनाने और उसके व्यावसायिक इस्तेमाल पर गहरी चिंता व्यक्त की है। सोमवार को एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए अदालत ने एक ऐसे कमर्शियल टेक्नोलॉजी सिस्टम पर सवाल उठाए, जो प्रोविडेंट फंड (PF) और इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) से जुड़ी गोपनीय जानकारी को बिना किसी स्पष्ट ऑथेंटिकेशन के निकालता और वेरिफाई करता है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने इस मामले को गंभीर मानते हुए केंद्र सरकार को निर्देश दिया कि वह डोमेन एक्सपर्ट्स की मदद से इस समस्या का स्थाई समाधान निकाले।
अदालत ने माना कि हालांकि यह मामला मुख्य रूप से नीतिगत (पॉलिसी) दायरे में आता है, लेकिन सरकारी डेटा तक निजी कंपनियों की पहुंच एक बड़ा खतरा है। यह वह डेटा है जो नागरिकों ने कानूनी आदेश के तहत सरकार को सौंपा है। ऐसी जानकारी का निजी संस्थाओं द्वारा व्यावसायिक लाभ के लिए उपयोग किया जाना नागरिकों की निजता का उल्लंघन है।
बिना ओटीपी के निकल रही पूरी रोजगार हिस्ट्री
याचिकाकर्ता पीयूष शर्मा ने पीठ के समक्ष अपनी जांच के चौंकाने वाले नतीजे पेश किए। उन्होंने बताया कि वर्तमान में सक्रिय एक प्राइवेट वेरिफिकेशन सिस्टम किस तरह काम कर रहा है। याचिकाकर्ता ने दावा किया कि जब उन्होंने सिर्फ अपना पैन (PAN) और यूएएन (UAN) नंबर एक निजी वेरिफिकेशन सिस्टम को दिया, तो उन्हें उस आधार पर अपनी पूरी रोजगार हिस्ट्री प्राप्त हो गई।
सबसे चिंताजनक बात यह रही कि इस संवेदनशील जानकारी को निकालते समय सुरक्षा के बुनियादी मानकों का पालन नहीं किया गया। डेटा प्राप्त करने के लिए न तो किसी ओटीपी (OTP) ऑथेंटिकेशन की आवश्यकता पड़ी और न ही उपयोगकर्ता से कोई स्पष्ट सहमति ली गई। पहचान वेरिफाई करने के लिए कोई पारदर्शी ऑथराइजेशन प्रक्रिया भी मौजूद नहीं थी।
डेटा के गलत इस्तेमाल पर मुख्य चिंताएं
याचिका में बताया गया है कि प्राइवेट कंपनियां इस डेटा का उपयोग विभिन्न व्यावसायिक उद्देश्यों के लिए कर रही हैं, जो निम्नलिखित हैं:
| डेटा के इस्तेमाल के प्रमुख क्षेत्र | विवरण |
| मूनलाइटिंग का पता लगाना | कर्मचारी एक साथ दो जगह काम तो नहीं कर रहा, इसकी जांच। |
| लेबर मार्केट प्रोफाइलिंग | श्रमिकों और कर्मचारियों के व्यवहार और इतिहास का विश्लेषण। |
| रोजगार से जुड़े फैसले | भर्ती या छंटनी के लिए वित्तीय और कानूनी रिकॉर्ड का उपयोग। |
| निजी वेरिफिकेशन | बैकग्राउंड चेक के नाम पर संवेदनशील रिकॉर्ड तक पहुंच। |
सरकार को नीतिगत फैसला लेने का निर्देश
याचिकाकर्ता ने स्पष्ट किया कि वे इस डेटा लीक के लिए सीधे तौर पर सरकारी एजेंसियों को दोषी नहीं ठहरा रहे हैं, लेकिन कानूनों के तहत सरकार को दिए गए डेटा की असुरक्षित स्थिति पर सवाल उठा रहे हैं। उन्होंने तर्क दिया कि ईपीएफओ और आयकर डेटा को नियंत्रित करने वाले कानूनी ढांचे के बावजूद निजी कंपनियां अपनी मर्जी से नागरिकों के वित्तीय और रोजगार रिकॉर्ड तक पहुंच रही हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता की दलीलों को सुनने के बाद माना कि यह पैटर्न उभरता हुआ और चिंताजनक है। अदालत को यह भी जानकारी मिली कि याचिकाकर्ता ने इस समस्या के संबंध में केंद्र सरकार को पहले ही दो विस्तृत ज्ञापन भेजे थे। बेंच ने सरकार को आदेश दिया कि वह इन ज्ञापनों पर विचार करे और निजी कंपनियों द्वारा व्यक्तिगत डेटा के दुरुपयोग को रोकने के लिए जरूरी कदम उठाए। कोर्ट ने जोर देकर कहा कि नागरिकों के भरोसे के साथ खिलवाड़ नहीं होना चाहिए और डेटा की सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार की जिम्मेदारी है।