चंडीगढ़। पंजाब में आज कौमी इंसाफ मोर्चा द्वारा बुलाए गए ‘पंजाब बंद’ का मिला-जुला और व्यापक असर देखने को मिल रहा है। यह बंद मुख्य रूप से जेलों में सजा पूरी कर चुके बंदी सिखों की रिहाई और जगतार सिंह हवारा को मानवीय आधार पर पैरोल देने की मांग को लेकर आयोजित किया गया है। इसके साथ ही मोर्चा 15 अगस्त को मोहाली-चंडीगढ़ सीमा पर प्रदर्शनकारियों के खिलाफ हुई पुलिस कार्रवाई का भी कड़ा विरोध कर रहा है। मोर्चे ने आज सुबह सात बजे से दोपहर दो बजे तक पूरे राज्य में व्यापारिक और पारगमन गतिविधियों को बंद रखने का एलान किया है।
सुबह से ही पंजाब के विभिन्न जिलों में बंद का प्रभाव स्पष्ट रूप से दिखने लगा है। बठिंडा जैसे महत्वपूर्ण व्यापारिक केंद्रों में बाजार पूरी तरह बंद हैं और सड़कों पर सामान्य दिनों की तुलना में काफी कम चहल-पहल देखी जा रही है। बस स्टैंडों पर सरकारी बसों की आवाजाही को शहर की सीमा से बाहर ही रोक दिया गया है, जिससे यात्रियों को लंबी दूरी पैदल तय करनी पड़ रही है। हालांकि, रेल सेवाओं पर अब तक कोई बड़ा असर नहीं पड़ा है और ट्रेनें अपने निर्धारित समय से संचालित हो रही हैं। मोहाली में स्थिति अधिक संवेदनशील है क्योंकि यहां के प्रमुख खरड़ फ्लाईओवर और देसूमाजरा जंक्शन को प्रदर्शनकारियों ने अवरुद्ध कर दिया है।
बंद के दौरान यातायात और शिक्षा पर प्रभाव
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बॉर्डर पॉइंट: मोहाली और चंडीगढ़ को जोड़ने वाले पांच मुख्य प्रवेश द्वार सुरक्षा कारणों से बंद किए गए हैं।
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स्कूल-कॉलेज: शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) के सभी संस्थानों समेत कई निजी स्कूलों में आज अवकाश घोषित किया गया है।
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राजमार्ग: नेशनल हाईवे, स्टेट हाईवे और जिला मार्गों पर दोपहर दो बजे तक यातायात रोकने की योजना है।
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सघन निगरानी: संवेदनशील क्षेत्रों में पुलिस द्वारा ड्रोन और वीडियोग्राफी के जरिए प्रदर्शनकारियों पर नजर रखी जा रही है।
सुरक्षा की दृष्टि से प्रशासन ने कड़े कदम उठाए हैं। मोहाली जिले में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए 1000 से अधिक पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई है। पुलिस ने आम जनता के लिए एडवाइजरी जारी कर अपील की है कि वे चंडीगढ़ आने-जाने के लिए वैकल्पिक मार्गों का प्रयोग करें और अनावश्यक रूप से प्रदर्शन वाले क्षेत्रों की ओर जाने से बचें। कौमी इंसाफ मोर्चा के कार्यकर्ता राज्य के प्रमुख राजमार्गों और कुछ स्थानों पर रेलवे ट्रैक पर बैठने की तैयारी में हैं, जिससे बस, ऑटो और निजी वाहनों का आवागमन बुरी तरह प्रभावित होने की संभावना है।
इस बंद को शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) के साथ-साथ शिरोमणि अकाली दल (अमृतसर), दल खालसा, अकाली दल (वारिस पंजाब दे) और हवारा कमेटी जैसे प्रमुख पंथक संगठनों का पुरजोर समर्थन मिला है। कई किसान और मजदूर यूनियनें भी इस विरोध प्रदर्शन में शामिल होकर अपनी एकजुटता दिखा रही हैं। एसजीपीसी ने इस मुद्दे को समर्थन देते हुए अपने अधीन आने वाले सभी दफ्तरों और शिक्षण संस्थानों को आज बंद रखने का फैसला किया है।
मोर्चे के नेताओं ने स्पष्ट किया है कि उनका उद्देश्य शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगें सरकार के समक्ष रखना है और वे किसी भी दुकानदार या संस्थान को जबरन बंद नहीं करवाएंगे। प्रशासन ने भी स्थिति की गंभीरता को देखते हुए कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए चप्पे-चप्पे पर सुरक्षा बल तैनात किया है। बंद के कारण व्यापारिक प्रतिष्ठान, थोक मंडियां और शॉपिंग मॉल भी दोपहर तक बंद रहने की उम्मीद है, जिससे जनजीवन काफी हद तक प्रभावित रहेगा। अब सभी की नजरें दोपहर बाद की स्थिति पर टिकी हैं कि क्या सरकार और मोर्चे के बीच मांगों को लेकर कोई सकारात्मक संवाद हो पाता है या नहीं।