अयोध्या। राम नगरी अयोध्या के भव्य राम मंदिर में चढ़ावा चोरी के मामले ने शुक्रवार को एक नया और बड़ा मोड़ ले लिया है। इस प्रकरण की जांच कर रही विशेष जांच दल (एसआईटी) की प्रारंभिक रिपोर्ट आने के बाद मचे घमासान के बीच श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और सदस्य अनिल मिश्रा ने अपने पदों से इस्तीफा दे दिया है। गुरुवार को एसआईटी की रिपोर्ट के आधार पर आठ लोगों के खिलाफ नामजद प्राथमिकी दर्ज की गई थी, जिसके बाद से ही इन दोनों पदाधिकारियों पर नैतिक आधार पर पद छोड़ने का भारी दबाव था।
दिल्ली में राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र ने चंपत राय और अनिल मिश्रा के इस्तीफे की आधिकारिक पुष्टि की है। यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब मंदिर की व्यवस्था और चढ़ावे के प्रबंधन को लेकर गंभीर सवाल उठाए जा रहे थे।
ड्राइवर समेत आठ लोगों पर गिरी गाज
राम मंदिर में चढ़ावे की चोरी और वित्तीय अनियमितताओं के आरोप करीब 18 दिन पहले सामने आए थे। लंबी चुप्पी और आंतरिक जांच के बाद, ट्रस्ट ने आखिरकार गुरुवार को पुलिस में औपचारिक शिकायत दर्ज कराई। इस एफआईआर में कुल आठ लोगों को आरोपी बनाया गया है। सबसे चौंकाने वाला नाम चंपत राय के निजी चालक टिन्नू यादव का है, जिसे इस पूरे खेल का मुख्य मोहरा माना जा रहा है। अन्य सात आरोपियों में ट्रस्ट और बैंक से जुड़े कुछ कर्मचारी भी शामिल बताए जा रहे हैं। एसआईटी की जांच में पाया गया कि दानपात्रों की चाबियां और नकदी का प्रबंधन उन लोगों के हाथों में था, जो इसके लिए अधिकृत नहीं थे।
नैतिकता और निष्पक्ष जांच का सवाल
चंपत राय के इस्तीफे को लेकर पिछले कई दिनों से मांग उठ रही थी। जानकारों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का तर्क था कि जब तक वे महासचिव जैसे प्रभावशाली पद पर बने रहेंगे, तब तक उनके मातहत काम करने वाले कर्मचारियों और चालक के खिलाफ निष्पक्ष जांच होना लगभग असंभव है। इस मामले में लालकृष्ण आडवाणी द्वारा स्थापित किए गए उच्च नैतिक मानदंडों का भी उदाहरण दिया गया। जैन हवाला कांड में नाम आने पर आडवाणी ने तुरंत इस्तीफा दे दिया था और बेदाग साबित होने के बाद ही चुनावी राजनीति में वापसी की थी। इसी तर्ज पर यह कहा जा रहा था कि चंपत राय को भी जांच पूरी होने तक पद से अलग रहना चाहिए ताकि ट्रस्ट की साख पर कोई आंच न आए।
ट्रस्ट के भविष्य पर असर
चंपत राय और अनिल मिश्रा के हटने के बाद अब ट्रस्ट की कार्यप्रणाली में बड़े बदलाव की संभावना है। नृपेंद्र मिश्र और अन्य वरिष्ठ सदस्य अब जांच में पूर्ण सहयोग और मंदिर की दान व्यवस्था को और अधिक पारदर्शी बनाने पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। हालांकि, इन इस्तीफों ने मंदिर प्रशासन के भीतर चल रही खींचतान और सुरक्षा में बड़ी चूक को उजागर कर दिया है। अब देखना यह होगा कि एसआईटी की पूर्ण रिपोर्ट में और किन बड़े नामों का खुलासा होता है और गबन की गई वास्तविक राशि का क्या आंकड़ा सामने आता है। फिलहाल, इन दो बड़े इस्तीफों ने राम मंदिर की व्यवस्था में शुचिता और पारदर्शिता की बहस को फिर से तेज कर दिया है।