शिमला। हिमाचल प्रदेश सरकार ने हाल ही में सेवानिवृत्त होने वाले अधिकारियों और
कर्मचारियों को दिए जाने वाले सेवा विस्तार और दोबारा रोजगार पर पाबंदी
लगाने का कड़ा फैसला लिया था। लेकिन इस नीतिगत निर्णय के बावजूद प्रदेश के
प्रशासनिक गलियारों में एक नया आदेश चर्चा का केंद्र बन गया है। सरकार ने लोक
निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) के महत्वपूर्ण पद पर तैनात इंजीनियर-इन-चीफ
नरेंद्र पाल सिंह को छह महीने का सेवा विस्तार देने का निर्णय लिया है।
कार्मिक विभाग की ओर से इस संबंध में आधिकारिक निर्देश जारी कर दिए गए हैं। मूल रूप
से जिला हमीरपुर से संबंध रखने वाले नरेंद्र पाल सिंह को 1 मई 2026 से 31
अक्टूबर 2026 तक की अवधि के लिए उनके वर्तमान पद पर बनाए रखने की
अनुमति दी गई है। सरकार ने अपने जारी किए गए आदेशों में इस फैसले का मुख्य
आधार ‘जनहित’ को बताया है। विभाग का मानना है कि वर्तमान परिस्थितियों और
महत्वपूर्ण परियोजनाओं को देखते हुए उनका पद पर बने रहना आवश्यक
है।
यह निर्णय प्रशासनिक स्तर पर इसलिए भी हैरान करने वाला माना जा रहा है क्योंकि अभी
कुछ ही समय पहले यानी 7 अप्रैल 2026 को ही राज्य सरकार ने एक बड़ा आदेश जारी किया
था। इस आदेश में स्पष्ट तौर पर कहा गया था कि भविष्य में किसी भी अधिकारी या
कर्मचारी को सेवा विस्तार या पुनर्रोजगार नहीं दिया जाएगा। इस रोक के
लागू होने के महज तीन हफ्तों के भीतर ही एक शीर्ष अधिकारी के लिए इस तरह की राहत
प्रदान करना सरकार की ही नीति पर सवाल खड़े कर रहा है। इससे यह संकेत मिलता
है कि सरकार विशेष परिस्थितियों में अपने ही फैसलों में बदलाव कर सकती है।
सेवा विस्तार की शर्तों को लेकर भी विभाग ने स्थिति स्पष्ट की है। वित्त विभाग
द्वारा 23 जून 2015 को निर्धारित किए गए पुराने दिशा-निर्देशों के अनुरूप
ही नरेंद्र पाल सिंह को यह विस्तार दिया गया है। आदेश के अनुसार, इस छह महीने की
अतिरिक्त सेवा अवधि के दौरान उन्हें कोई वार्षिक वेतन वृद्धि (इंक्रीमेंट) का
लाभ नहीं दिया जाएगा। उन्हें वही वेतन मिलता रहेगा जो वह विस्तार मिलने से ठीक पहले
प्राप्त कर रहे थे।
इसके साथ ही सरकार ने यह भी साफ कर दिया है कि यह विस्तार केवल एक निश्चित अवधि के
लिए है। नरेंद्र पाल सिंह 31 अक्टूबर 2026 की दोपहर को अपनी विस्तार अवधि पूरी
करने के बाद अनिवार्य रूप से सेवानिवृत्त मान लिए जाएंगे। हिमाचल प्रदेश में
सेवा विस्तार को लेकर पहले भी कई बार विवाद होते रहे हैं, लेकिन नई पाबंदी के
तत्काल बाद लिया गया यह फैसला अब प्रदेश की राजनीति और नौकरशाही में बहस का
मुद्दा बन गया है। अन्य विभागों के कर्मचारी भी अब इस फैसले को आधार बनाकर भविष्य
में ऐसी ही राहत की उम्मीद कर सकते हैं।