लखनऊ। उत्तर प्रदेश विधानमंडल के विशेष सत्र के दौरान महिला आरक्षण के मुद्दे पर
सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस और टकराव देखने को मिला। मुख्यमंत्री
योगी आदित्यनाथ ने सदन को संबोधित करते हुए समाजवादी पार्टी और कांग्रेस को
महिलाओं के अधिकारों का विरोधी करार दिया। उन्होंने कहा कि आज पूरा देश
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभारी है, जिन्होंने महिलाओं के सशक्तिकरण के
लिए ऐसे कार्य किए हैं जिनकी सराहना हर जगह हो रही है। मुख्यमंत्री के भाषण के
दौरान समाजवादी पार्टी के सदस्यों ने सदन के भीतर और बाहर जमकर नारेबाजी
और हंगामा किया।
योगी आदित्यनाथ ने अपने संबोधन में विपक्षी दलों पर कड़ा प्रहार करते हुए कहा कि
समाजवादी पार्टी और कांग्रेस ने हमेशा से महिला आरक्षण का विरोध किया है।
उन्होंने सपा के आचरण को महिला विरोधी बताते हुए कहा कि इस दल ने महिलाओं
के लिए शुरू की गई हर योजना में बाधा डाली है, यहां तक कि महिलाओं के बैंक खाते
खोलने तक का विरोध किया गया था। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी
की पहल पर देश में 30 करोड़ महिलाओं के बैंक खाते खुले, जिससे अब सरकारी
योजनाओं का लाभ सीधे उनके खातों में पहुंच रहा है। उन्होंने तंज कसते
हुए कहा कि सपा नेताओं के बार-बार रंग बदलने वाले व्यवहार को देखकर तो गिरगिट भी
सहम जाए।
सदन में नारी शक्ति वंदन संशोधन विधेयक के लोकसभा में गिरने को लेकर सत्ता पक्ष की
ओर से निंदा प्रस्ताव पेश किया गया। इसके जवाब में समाजवादी पार्टी ने भाजपा
सरकार पर झूठ बोलने का आरोप लगाते हुए अपना अलग ‘अति निंदा प्रस्ताव’
पारित किया। सपा प्रमुख अखिलेश यादव की मौजूदगी में हुई बैठक में यह आरोप
लगाया गया कि भाजपा महिला आरक्षण का केवल ढोंग कर रही है। सपा का मानना है कि
सरकार का असली मकसद महिला सशक्तिकरण नहीं, बल्कि निर्वाचन क्षेत्रों का मनचाहा
परिसीमन करके चुनाव जीतना है।
अखिलेश यादव ने स्पष्ट किया कि महिला आरक्षण बिल 2023 में ही पारित होकर कानून बन
चुका है और यदि सरकार की नीयत साफ होती, तो इसे अगले चुनाव से ही लागू किया जा
सकता था। उन्होंने कहा कि भाजपा इस बिल के जरिए केवल दिखावटी सहानुभूति का नाटक
कर रही है। सपा के प्रस्ताव में यह भी उठाया गया कि भाजपा ने इस आरक्षण में
पिछड़ी और अल्पसंख्यक वर्ग की महिलाओं के राजनीतिक प्रतिनिधित्व के लिए कोई
स्पष्ट प्रावधान नहीं किया है। वहीं, सदन में नेता विरोधी दल माता प्रसाद पांडेय ने
भी सरकार की मंशा पर सवाल उठाए और निंदा प्रस्ताव पारित घोषित किया। मुख्यमंत्री ने
अंत में कहा कि यह सत्र आधी आबादी को समर्पित है, लेकिन विपक्ष महिला सशक्तिकरण की
राह में रोड़ा अटकाने का काम कर रहे हैं।