शिमला। हिमाचल प्रदेश विधानसभा के मौजूदा सत्र के दौरान मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू और धर्मशाला से भारतीय जनता पार्टी के विधायक सुधीर शर्मा के बीच जबरदस्त नोकझोंक देखने को मिली। दोनों नेताओं के बीच प्रतिद्वंद्विता का एक लंबा इतिहास रहा है और आज सदन में केंद्रीय विश्वविद्यालय (सीयू) धर्मशाला कैंपस के निर्माण और विज्ञापनों पर होने वाले सरकारी खर्च को लेकर दोनों आमने-सामने आ गए। सुधीर शर्मा के एक प्रश्न का उत्तर देते हुए मुख्यमंत्री ने जानकारी दी कि पिछले तीन वर्षों में प्रदेश सरकार के विभिन्न विभागों, बोर्डों और निगमों ने विज्ञापनों पर कुल 22 करोड़ 87 लाख 74 हजार रुपये खर्च किए हैं।
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने विज्ञापनों के खर्च का ब्यौरा देते हुए स्पष्ट किया कि इसमें से सूचना एवं जन संपर्क विभाग ने 14 करोड़ रुपये का बजट खर्च किया है, जबकि शेष राशि अन्य सरकारी संस्थानों द्वारा व्यय की गई है। अपनी सरकार का बचाव करते हुए मुख्यमंत्री ने पिछली भाजपा सरकार के आंकड़ों की तुलना भी की। उन्होंने बताया कि पूर्व सरकार ने विज्ञापनों पर 28 करोड़ रुपये खर्च किए थे, जो वर्तमान सरकार के खर्च से काफी अधिक है। उन्होंने होर्डिंग पर हुए व्यय का जिक्र करते हुए कहा कि पिछली सरकार ने 6.36 करोड़ रुपये खर्च किए थे, जबकि वर्तमान सरकार ने केवल 2.40 करोड़ रुपये ही खर्च किए हैं।
मुख्यमंत्री के इस उत्तर पर पलटवार करते हुए सुधीर शर्मा ने सरकार की प्राथमिकताओं पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि सरकार ने प्रचार-प्रसार पर 22 करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि खर्च कर दी, लेकिन यदि यही बजट धर्मशाला के लिए जारी किया गया होता, तो केंद्रीय विश्वविद्यालय के नॉर्थ कैंपस का निर्माण कार्य शुरू हो सकता था। सुधीर शर्मा ने आरोप लगाया कि सरकार विकास कार्यों के बजाय अपनी छवि चमकाने पर अधिक ध्यान दे रही है।
सुधीर शर्मा की इस टिप्पणी का जवाब देते हुए मुख्यमंत्री ने गेंद केंद्र सरकार के पाले में डाल दी। उन्होंने कहा कि यदि केंद्र सरकार विश्वविद्यालय के लिए बिजली और पानी के खर्च वहन करने की जिम्मेदारी लेने को तैयार होती है, तो प्रदेश सरकार वन विभाग के बकाया पैसे तुरंत जमा करवा देगी। इसके साथ ही मुख्यमंत्री ने यह भी संकेत दिया कि आने वाले समय में सूचना एवं जन संपर्क विभाग में बड़े बदलाव किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि वर्तमान में इस विभाग में ‘व्यवस्था परिवर्तन’ होना बाकी है।
होर्डिंग के लिए विशेष स्थान निर्धारित करने के सुधीर शर्मा के सुझाव पर मुख्यमंत्री ने विचार करने का आश्वासन दिया। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि कई बार राजनीतिक दल स्वयं ही अनाधिकृत रूप से होर्डिंग लगा देते हैं, जिस पर नियंत्रण आवश्यक है। विज्ञापनों और विकास कार्यों के इस टकराव ने सदन में काफी देर तक गहमागहमी का माहौल बनाए रखा। दोनों नेताओं के बीच हुई इस बहस ने यह स्पष्ट कर दिया कि धर्मशाला केंद्रीय विश्वविद्यालय का मुद्दा आने वाले समय में भी प्रदेश की राजनीति में गर्माया रहेगा।
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