चंडीगढ़। पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने मंत्रिमंडल से बर्खास्त किए गए मंत्री लालजीत सिंह भुल्लर के विभागों का कार्यभार अन्य मंत्रियों को सौंप दिया है। सरकारी आदेशों के अनुसार, वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा अब परिवहन विभाग की जिम्मेदारी संभालेंगे, जबकि जेल विभाग का प्रभार डॉ. रवजोत को दिया गया है। मुख्यमंत्री ने इन विभागों का बंटवारा कर यह स्पष्ट संकेत दे दिया है कि वे फिलहाल कैबिनेट में रिक्त हुए पद को भरने के लिए किसी प्रकार की जल्दबाजी में नहीं हैं।
लालजीत सिंह भुल्लर को शनिवार को कैबिनेट से हटा दिया गया था और ताजा घटनाक्रम में उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया है। इस पूरे विवाद की शुरुआत तीन दिन पहले हुई थी, जब पंजाब राज्य गोदाम निगम के जिला मैनेजर गगनदीप सिंह रंधावा ने जहरीला पदार्थ निगलकर आत्महत्या कर ली थी। रंधावा ने मृत्यु से पूर्व एक वीडियो संदेश जारी किया था, जिसमें उन्होंने सीधे तौर पर लालजीत सिंह भुल्लर पर उन्हें प्रताड़ित करने और मानसिक रूप से परेशान करने के गंभीर आरोप लगाए थे। इस वीडियो के सामने आते ही राज्य की राजनीति में हड़कंप मच गया।
मुख्यमंत्री भगवंत मान ने घटना की गंभीरता को देखते हुए तुरंत भुल्लर को मंत्रिमंडल से बाहर कर दिया। हालांकि, विपक्षी दल केवल बर्खास्तगी से संतुष्ट नहीं थे। शिरोमणि अकाली दल, कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी के नेताओं ने लालजीत सिंह भुल्लर, उनके पिता सुरेंद्र पाल सिंह भुल्लर और उनके निजी सहायक की तत्काल गिरफ्तारी की मांग को लेकर मोर्चा खोल दिया और धरना प्रदर्शन शुरू कर दिया। विपक्ष का आरोप था कि रंधावा की मौत के लिए जिम्मेदार लोगों को बचाने की कोशिश की जा रही है।
मामले ने उस समय और तूल पकड़ लिया जब अमृतसर के सांसद गुरजीत सिंह औजला ने इस मुद्दे को लोकसभा में उठाया। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए केंद्रीय गृह मंत्री ने आश्वासन दिया कि यदि पंजाब के सांसद लिखित में मांग करते हैं, तो वे इस मामले की जांच सीबीआई को सौंपने के लिए तैयार हैं। केंद्र सरकार के इस कड़े रुख और बढ़ते राजनीतिक दबाव के बीच लालजीत सिंह भुल्लर ने अंततः गोबिंदगढ़ के थाने में आत्मसमर्पण कर दिया।
फिलहाल, मुख्यमंत्री भगवंत मान ने सीबीआई जांच की मांग पर कोई सीधी प्रतिक्रिया नहीं दी है, लेकिन विभागों के पुनर्वितरण के जरिए उन्होंने प्रशासनिक कार्यों को सुचारू रूप से चलाने की व्यवस्था कर दी है। भुल्लर के विभाग अब दो भरोसेमंद मंत्रियों के पास चले गए हैं, जिससे सरकार यह संदेश देना चाहती है कि वह भ्रष्टाचार और प्रताड़ना के मामलों में जीरो टॉलरेंस की नीति अपना रही है। अब सभी की नजरें इस मामले की आगामी कानूनी कार्रवाई और जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं।
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