शिमला। हिमाचल प्रदेश के बजट 2026-27 में मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू द्वारा ‘अर्धसैनिक कल्याण बोर्ड’ के गठन की ऐतिहासिक घोषणा का चौतरफा स्वागत हो रहा है। इस निर्णय से गदगद हिमाचल प्रदेश राज्य पूर्व अर्धसैनिक समन्वय एवं कल्याण संघ ने मुख्यमंत्री के प्रति गहरी कृतज्ञता व्यक्त की है। संघ के एक प्रतिनिधिमंडल ने शिमला में मुख्यमंत्री से मुलाकात कर इस ऐतिहासिक पहल के लिए उनका अभिनंदन किया और उन्हें सम्मानित किया।
एसोसिएशन के प्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री को बताया कि अर्धसैनिक कल्याण बोर्ड का गठन एक बहुत पुरानी और जायज मांग थी, जिसे वर्तमान सरकार ने पूरा कर राज्य के हजारों परिवारों को बड़ी राहत दी है। इस निर्णय से न केवल अर्धसैनिक बलों के सेवानिवृत्त जवानों को लाभ मिलेगा, बल्कि वीर नारियों और उनके आश्रितों को भी सरकारी योजनाओं का सीधा फायदा मिल सकेगा। संघ के पदाधिकारियों ने सुखविंदर सिंह सुक्खू के नेतृत्व की सराहना करते हुए कहा कि यह कदम उनकी दूरदर्शी कार्यशैली और अर्धसैनिक समुदाय के प्रति उनकी गहरी संवेदनशीलता का परिचायक है।
प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों ने विश्वास जताया कि बोर्ड के गठन से अर्धसैनिक परिवारों में सरकार के प्रति भरोसा और भविष्य के प्रति आशा की एक नई किरण जगेगी। एसोसिएशन ने इस महत्वपूर्ण मुद्दे को विधानसभा और सरकार के समक्ष प्रभावी ढंग से उठाने के लिए उप मुख्य सचेतक केवल सिंह पठानिया का भी विशेष रूप से आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि केवल सिंह पठानिया के निरंतर प्रयासों और अन्य सहयोगी विधायकों के समर्थन के कारण ही यह मांग आज हकीकत में बदल सकी है।
मुलाकात के दौरान मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने भी अपनी सरकार की प्राथमिकताएं स्पष्ट कीं। उन्होंने दोहराया कि प्रदेश सरकार पूर्व सैनिकों और अर्धसैनिक कर्मियों के हितों की रक्षा के लिए पूरी तरह समर्पित है। उन्होंने कहा कि देश की सीमाओं की रक्षा करने वाले इन वीरों का कल्याण सरकार की जिम्मेदारी है और भविष्य में भी उनके जीवन स्तर को बेहतर बनाने के लिए हर संभव प्रयास किए जाएंगे।
हिमाचल जैसे पहाड़ी राज्य के लिए, जहां के युवाओं का एक बड़ा हिस्सा सैन्य और अर्धसैन्य सेवाओं में शामिल है, इस बोर्ड का गठन एक मील का पत्थर माना जा रहा है। अब इस बोर्ड के माध्यम से जवानों की पेंशन, चिकित्सा सहायता और उनके बच्चों के लिए रोजगार व शिक्षा से जुड़े मसलों का समाधान अधिक व्यवस्थित और पारदर्शी तरीके से हो सकेगा। राज्य सरकार के इस फैसले ने अर्धसैनिक समुदाय के मान-सम्मान को एक नई ऊंचाई प्रदान की है।