Himachal: नई ट्रांसफर पॉलिसी बनने तक पुरानी नीति ही रहेगी प्रभावी विधानसभा में बोले मुख्यमंत्री सुक्खू – The Hill News

Himachal: नई ट्रांसफर पॉलिसी बनने तक पुरानी नीति ही रहेगी प्रभावी विधानसभा में बोले मुख्यमंत्री सुक्खू

शिमला। हिमाचल प्रदेश विधानसभा के बजट सत्र के दौरान सरकारी कर्मचारियों के स्थानांतरण (ट्रांसफर) की नीति को लेकर सदन में तीखी बहस देखने को मिली। भाजपा विधायक लोकेंद्र कुमार द्वारा पूछे गए एक सवाल का जवाब देते हुए मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने स्पष्ट किया कि जब तक राज्य सरकार नई ट्रांसफर पॉलिसी तैयार नहीं कर लेती, तब तक प्रदेश में पुरानी स्थानांतरण नीति ही प्रभावी रहेगी। लोकेंद्र कुमार ने तबादलों के मापदंडों, मानकों और म्यूचुअल ट्रांसफर के नियमों पर सरकार से स्पष्टीकरण मांगा था। साथ ही उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान में मंत्री विकास कार्यों पर ध्यान देने के बजाय तबादलों में अधिक उलझे हुए हैं।

विधायक लोकेंद्र कुमार का तर्क था कि अधिकारियों और कर्मचारियों का बार-बार और कम समय के भीतर तबादला किए जाने से प्रशासनिक कामकाज की गति धीमी हो रही है। उन्होंने कहा कि किसी भी कर्मचारी को कार्य सीखने या प्रोजेक्ट की बारीकियों को समझने के लिए एक निश्चित समय चाहिए होता है, लेकिन सरकार उन्हें जल्द बदल देती है, जिससे महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट प्रभावित हो रहे हैं। इस मुद्दे पर विपक्ष ने सरकार की मंशा पर सवाल उठाए।

तबादलों के साथ-साथ कर्मचारियों की उपस्थिति के मुद्दे पर भी सदन में हंगामा हुआ। भाजपा विधायक सतपाल सिंह सत्ती ने सरकार पर महत्वपूर्ण जानकारी छिपाने का आरोप लगाया। सत्ती ने निदेशालय स्तर के उच्च अधिकारियों की बायोमेट्रिक हाजिरी से संबंधित सवाल पूछा था। उन्होंने दावा किया कि कई अधिकारी बिना किसी पूर्व अनुमति के कार्यालयों से नदारद रहते हैं और बायोमेट्रिक प्रणाली का पालन नहीं कर रहे हैं। सत्ती के आरोपों पर मुख्यमंत्री ने सदन को आश्वासन दिया कि वर्तमान में विभिन्न विभागों से आंकड़े जुटाए जा रहे हैं और आगामी जून महीने के सत्र तक इस संबंध में पूरी जानकारी सदन के पटल पर रख दी जाएगी।

वहीं, प्रदेश के आर्थिक आधार माने जाने वाले बागवानी क्षेत्र का मुद्दा उठाते हुए कांग्रेस विधायक कुलदीप सिंह राठौर ने सेब उत्पादकों के साथ हो रही धोखाधड़ी की ओर सदन का ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने बताया कि सेब की खरीद करने के बाद कई लदानी और व्यापारी बिना भुगतान किए फरार हो जाते हैं, जिससे बागवानों को करोड़ों रुपये का आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। राठौर ने इस मामले में कृषि विपणन बोर्ड (APMC) की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े किए।

जवाब में कृषि मंत्री प्रो. चंद्र कुमार ने बताया कि सरकार ठगी के मामलों को लेकर पूरी तरह सजग है और अब तक कई दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जा चुकी है। उन्होंने सदन को भरोसा दिलाया कि भविष्य में सेब उत्पादकों के हितों की रक्षा के लिए आढ़तियों और लदानियों से ली जाने वाली सुरक्षा राशि (सिक्योरिटी मनी) में बढ़ोतरी की जाएगी और धोखाधड़ी करने वालों के विरुद्ध कड़ी कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

 

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