चंडीगढ़। पंजाब विजिलेंस ब्यूरो ने भ्रष्टाचार के विरुद्ध अपनी मुहिम को जारी रखते हुए जालंधर जिले के महतपुर सब-तहसील में तैनात एक कानूनगो के भाई को रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया है। आरोपी परमिंदर सिंह अपने भाई कानूनगो जतिंदर सिंह के लिए रिश्वत की रकम वसूलने आया था। विजिलेंस ब्यूरो ने जाल बिछाकर उसे 20,000 रुपये की रिश्वत लेते हुए दो सरकारी गवाहों की मौजूदगी में दबोच लिया। हालांकि, मुख्य आरोपी कानूनगो जतिंदर सिंह फिलहाल फरार है और पुलिस उसकी सरगर्मी से तलाश कर रही है।
विजिलेंस ब्यूरो के एक प्रवक्ता ने बताया कि यह गिरफ्तारी जालंधर के नकोदर निवासी एक व्यक्ति की शिकायत पर की गई है। शिकायतकर्ता, जो खेती और कार ट्रेडिंग का व्यवसाय करता है, ने हरिपुर गांव में 12 मरले का एक मकान खरीदा था। इस मकान की रजिस्ट्री को लेकर चल रहे अदालती विवाद में फैसला शिकायतकर्ता के पक्ष में आया था। अदालत के आदेशानुसार मकान की सेल डीड तो पंजीकृत हो गई, लेकिन मकान का वास्तविक कब्जा दिलाने की प्रक्रिया कानूनगो जतिंदर सिंह के पास लंबित थी।
शिकायत के अनुसार, कब्जा दिलाने के नाम पर कानूनगो ने पहले ही ‘कंप्यूटरीकृत निशानदेही’ के बहाने 15,000 रुपये ऐंठ लिए थे। इसके बाद, कब्जा दिलाने में मदद करने के एवज में कानूनगो जतिंदर सिंह ने तहसीलदार के नाम पर एक लाख रुपये की भारी-भरकम रिश्वत की मांग की। शिकायतकर्ता के बार-बार अनुरोध के बावजूद कानूनगो टस से मस नहीं हुआ और रिश्वत की मांग पर अड़ा रहा। उसने मौके पर ही 10,000 रुपये अग्रिम ले लिए और बाकी रकम किश्तों में देने का दबाव बनाया। जागरूक शिकायतकर्ता ने इस पूरी बातचीत को रिकॉर्ड कर लिया।
जब कानूनगो ने रिश्वत की अगली किश्त के लिए दबाव बनाना शुरू किया, तो शिकायतकर्ता ने भ्रष्टाचार के आगे झुकने के बजाय विजिलेंस ब्यूरो रेंज जालंधर से संपर्क किया। ब्यूरो ने शिकायत की प्रारंभिक जांच के बाद जाल बिछाया। कानूनगो ने खुद न आकर अपने भाई परमिंदर सिंह को पैसे लेने के लिए भेजा। जैसे ही परमिंदर सिंह ने शिकायतकर्ता से 20,000 रुपये पकड़े, विजिलेंस की टीम ने उसे रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया।
विजिलेंस ब्यूरो ने इस मामले में दोनों भाइयों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत जालंधर के विजिलेंस पुलिस स्टेशन में मुकदमा दर्ज किया है। फरार कानूनगो जतिंदर सिंह की गिरफ्तारी के लिए कई स्थानों पर छापेमारी की जा रही है। ब्यूरो के अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि भ्रष्टाचार के इस मामले की तह तक जाया जाएगा और यह भी पता लगाया जाएगा कि क्या इसमें तहसीलदार या अन्य किसी वरिष्ठ अधिकारी की भी संलिप्तता थी। फिलहाल मामले की विस्तृत जांच जारी है।