नई दिल्ली। भारत और फ्रांस के बीच प्रगाढ़ होते संबंधों की एक बेहद खास और आत्मीय झलक मंगलवार को मुंबई की सड़कों पर देखने को मिली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने मुंबई में ‘भारत-फ्रांस इनोवेशन फोरम’ में शामिल होने के लिए एक ही कार में सफर किया। इस कार राइड के दौरान दोनों नेता काफी सहज और दोस्ताना अंदाज में नजर आए। राष्ट्रपति मैक्रों ने स्वयं इस सफर की एक तस्वीर सोशल मीडिया पर साझा की और कैप्शन में हिंदी के लोकप्रिय शब्द ‘Jai Ho’ का उपयोग कर भारतीय संस्कृति के प्रति अपना सम्मान प्रकट किया। यह छोटा सा क्षण दोनों देशों के बीच बढ़ते भरोसे और गहरी मित्रता का प्रतीक बन गया है।
दोनों देशों के प्रमुखों के बीच हुई इस मुलाकात के नतीजे काफी ऐतिहासिक रहे हैं। लोक भवन में आयोजित द्विपक्षीय और प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता के बाद भारत और फ्रांस ने अपने कूटनीतिक रिश्तों को ‘विशेष वैश्विक रणनीतिक साझेदारी’ का सर्वोच्च दर्जा देने का ऐलान किया। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि वर्तमान में विश्व भू-राजनीतिक अस्थिरता और अनिश्चितता के दौर से गुजर रहा है, ऐसे समय में भारत और फ्रांस की यह साझेदारी वैश्विक शांति और स्थिरता के लिए एक मजबूत स्तंभ साबित होगी। उन्होंने रेखांकित किया कि इस साझेदारी के माध्यम से फ्रांस की उच्च तकनीक और विशेषज्ञता को भारत के विशाल बाजार और सामर्थ्य के साथ जोड़ा जा रहा है।
सार्थक वार्ता के बाद दोनों देशों के बीच विभिन्न क्षेत्रों में कुल 21 महत्वपूर्ण समझौतों और दस्तावेजों पर हस्ताक्षर किए गए। इन समझौतों का दायरा रक्षा, क्रिटिकल मिनरल्स, हाई टेक्नोलॉजी, रिन्यूएबल एनर्जी और स्वास्थ्य जैसे आधुनिक क्षेत्रों तक फैला हुआ है। रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL) और फ्रांस की दिग्गज कंपनी सफरान (Safran) के बीच एक साझा उपक्रम (जॉइंट वेंचर) पर सहमति बनी है। इसके तहत अब भारत में ही घातक ‘हैमर मिसाइलों’ का निर्माण किया जाएगा।
सैन्य सहयोग को नया विस्तार देते हुए यह भी निर्णय लिया गया कि भारतीय सेना और फ्रांसीसी थल सेना के बीच अधिकारियों का आपसी तबादला किया जाएगा। इस पहल से दोनों सेनाओं को एक-दूसरे की युद्धक प्रणालियों और रणनीतियों को बेहतर तरीके से समझने का अवसर मिलेगा। प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में विश्वास जताया कि ये समझौते केवल कागजी दस्तावेज नहीं हैं, बल्कि ये दोनों महान राष्ट्रों के उज्ज्वल भविष्य की नींव हैं। इस दौरे ने स्पष्ट कर दिया है कि भारत और फ्रांस आने वाले समय में वैश्विक चुनौतियों का सामना करने के लिए कंधे से कंधा मिलाकर चलेंगे।
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