Uttarakhand: मेरठ में जुटेगा खेल और विचार का संगम, सरसंघचालक मोहन भागवत खिलाड़ियों से करेंगे सीधा संवाद – The Hill News

Uttarakhand: मेरठ में जुटेगा खेल और विचार का संगम, सरसंघचालक मोहन भागवत खिलाड़ियों से करेंगे सीधा संवाद

मेरठ। देश की खेल नगरी मेरठ इस सप्ताहांत एक महत्वपूर्ण वैचारिक विमर्श का गवाह बनने जा रही है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक मोहन भागवत दो दिवसीय प्रवास (21 व 22 फरवरी) पर मेरठ पहुँच रहे हैं। उनके इस दौरे का मुख्य आकर्षण खिलाड़ियों और प्रबुद्धजनों के साथ होने वाला विशेष संवाद कार्यक्रम है। आरएसएस के इतिहास में यह पहली बार है जब संगठन खेल जगत की हस्तियों के साथ इतने व्यापक स्तर पर सीधे संवाद की पहल कर रहा है।

मोहन भागवत के इस दो दिवसीय कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश के 28 जिलों के प्रबुद्ध नागरिक और लगभग 500 राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी शिरकत करेंगे। मेरठ का चयन इस आयोजन के लिए इसलिए किया गया है क्योंकि यह शहर न केवल खेल उत्पादों का वैश्विक केंद्र है, बल्कि इसने देश को कई महान खिलाड़ी भी दिए हैं। कार्यक्रम के पहले दिन का केंद्र बिंदु खेल जगत के सामाजिक अनुभव रहेंगे। संवाद के लिए सुरेश रैना, भुवनेश्वर कुमार, प्रवीण कुमार और अर्जुन अवार्डी अलका तोमर जैसे दिग्गजों को आमंत्रित किया गया है।

संघ के इस अभियान का मुख्य उद्देश्य ‘सामाजिक समरसता’ है। चूँकि खेल का मैदान वह स्थान है जहाँ जाति, धर्म, भाषा और आर्थिक पृष्ठभूमि की दीवारें टूट जाती हैं और खिलाड़ी की जर्सी पर लिखा देश का नाम ही उसकी एकमात्र पहचान होती है, इसलिए संघ खिलाड़ियों के माध्यम से समरसता के संदेश को समाज तक पहुँचाना चाहता है। मोहन भागवत खिलाड़ियों के उन अनुभवों को समझेंगे कि कैसे उन्होंने सामाजिक बाधाओं को पार कर सफलता हासिल की और कैसे खेल समाज में एकता का सेतु बन सकता है।

आरएसएस के एक वरिष्ठ पदाधिकारी ने बताया कि आज के युवा खिलाड़ियों को अपना रोल मॉडल मानते हैं। यदि ये खिलाड़ी सामाजिक एकता और भाईचारे का संदेश देते हैं, तो उसका प्रभाव युवाओं पर गहरा और सकारात्मक होगा। यह आयोजन खेल और समाज के आपसी रिश्तों को नए सिरे से परिभाषित करने की एक कोशिश है।

समारोह की गरिमा को बढ़ाते हुए मेरठ के सलावा में बन रहे उत्तर प्रदेश के पहले राज्य खेल विश्वविद्यालय के प्रथम कुलपति, रिटायर्ड मेजर जनरल दीप अहलावत खिलाड़ियों वाले सत्र की अध्यक्षता करेंगे। यह विश्वविद्यालय इसी वर्ष से शिक्षण कार्य शुरू करने की तैयारी में है, जो प्रदेश में खेल संस्कृति को बढ़ावा देने की दिशा में एक बड़ा कदम है। दो दिनों तक चलने वाले इस महामंथन से निकलने वाले विचार न केवल खेल जगत बल्कि सामाजिक ताने-बाने को मजबूत करने के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण साबित होंगे।

 

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