देहरादून। उत्तराखंड की राजधानी देहरादून के कोतवाली नगर क्षेत्र में हाल ही में हुई एक युवती की जघन्य हत्या के मामले में पुलिस मुख्यालय ने कड़ा रुख अपनाया है। इस संवेदनशील प्रकरण की निष्पक्ष और गहन जांच सुनिश्चित करने के लिए नामित जांच अधिकारी, पुलिस अधीक्षक विशाखा अशोक भदाणे (आईपीएस) ने गुरुवार को स्वयं मोर्चा संभाला। उन्होंने न केवल घटनास्थल का सूक्ष्म निरीक्षण किया, बल्कि पीड़ित परिवार से मिलकर उन्हें न्याय का भरोसा भी दिलाया। इस हत्याकांड ने पूरे शहर में सनसनी फैला दी है और पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी कई सवाल खड़े हुए हैं, जिन्हें दूर करने के लिए मुख्यालय अब पूरी सक्रियता दिखा रहा है।
जांच अधिकारी विशाखा अशोक भदाणे ने घटनास्थल का बारीकी से निरीक्षण कर साक्ष्य जुटाने का प्रयास किया। उन्होंने अपराध के तौर-तरीकों और घटना से जुड़ी छोटी-बड़ी कड़ियों का गहन परीक्षण किया। इसके उपरांत, उन्होंने पीड़ित परिवार के सदस्यों से भेंट की और उनके पक्ष को विस्तार से सुना। परिवार के सदस्यों के बयान दर्ज करते हुए उन्होंने उन सभी महत्वपूर्ण बिंदुओं पर जानकारी जुटाई जो इस अपराध की तह तक पहुँचने में सहायक हो सकते हैं। पुलिस अधीक्षक ने शोकाकुल परिवार के प्रति अपनी गहरी संवेदनाएं व्यक्त कीं और उन्हें स्पष्ट शब्दों में आश्वस्त किया कि जांच पूरी तरह से पारदर्शी और तथ्यों पर आधारित होगी। उन्होंने यह भी कहा कि यदि जांच के दौरान पुलिस प्रशासन के किसी भी स्तर पर लापरवाही या कर्तव्य निर्वहन में कोई त्रुटि पाई जाती है, तो संबंधित पुलिसकर्मियों के खिलाफ भी सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
इस मामले में पुलिस रिस्पॉन्स की भूमिका पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इसी सिलसिले में पुलिस अधीक्षक विशाखा अशोक भदाणे ने कोतवाली नगर और खुड़बुड़ा पुलिस चौकी का दौरा किया। वहां उन्होंने हत्याकांड से संबंधित सभी पुराने रिकॉर्ड, अभिलेखों और घटना के दिन प्राप्त हुई सूचनाओं के दस्तावेजों का गहराई से अवलोकन किया। उन्होंने जांच के दौरान इस बात पर विशेष फोकस रखा कि घटना की सूचना मिलने के बाद पुलिस की प्रतिक्रिया क्या थी और सूचनाओं पर कितनी तत्परता से कार्यवाही की गई। विशाखा अशोक भदाणे ने स्पष्ट किया कि महिलाओं की सुरक्षा पुलिस की सर्वोच्च प्राथमिकता है और इस मामले में किसी भी स्तर पर ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
पुलिस मुख्यालय की ओर से इस प्रकरण की संवेदनशीलता को देखते हुए नियमित रूप से मॉनिटरिंग की जा रही है। पुलिस महानिरीक्षक (अपराध एवं कानून व्यवस्था) सुनील कुमार मीणा ने बताया कि इस हत्याकांड को सर्वोच्च प्राथमिकता में रखा गया है। मुख्यालय की मंशा है कि जांच में न केवल अपराधियों को कड़ी सजा मिले, बल्कि सिस्टम में मौजूद उन कमियों की भी पहचान की जाए जिनके कारण ऐसी घटनाएं होती हैं। सुनील कुमार मीणा के अनुसार, जांच अधिकारी को स्वतंत्र रूप से कार्य करने के निर्देश दिए गए हैं ताकि वे हर पहलू का निष्पक्ष परीक्षण कर सकें।
देहरादून का यह हत्याकांड कानून-व्यवस्था की दृष्टि से प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है। आम जनता के बीच बढ़ते आक्रोश को देखते हुए पुलिस विभाग अब अपनी साख बचाने और अपराधियों को सलाखों के पीछे पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध नजर आ रहा है। विशाखा अशोक भदाणे द्वारा स्वयं फील्ड में उतरकर की जा रही जांच से यह संकेत मिलता है कि मामले में किसी भी प्रकार की लीपापोती नहीं होने दी जाएगी। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि जांच के हर दस्तावेजी और मौखिक प्रमाण को सुरक्षित रखा जाए।
मीडिया सेल, पुलिस मुख्यालय उत्तराखंड द्वारा जारी जानकारी के अनुसार, पुलिस अधीक्षक की यह विस्तृत समीक्षा आगामी कानूनी कार्रवाई का आधार बनेगी। इस जांच में न केवल हत्याकांड के मुख्य आरोपियों की भूमिका तय की जाएगी, बल्कि घटना से जुड़े उन सामाजिक और सुरक्षा संबंधी कारणों का भी विश्लेषण होगा जो इस अपराध का आधार बने। फिलहाल, पीड़ित परिवार ने जांच अधिकारी के समक्ष अपनी बातें रखी हैं और पुलिस ने उन्हें निष्पक्ष जांच का पूरा भरोसा दिया है। अब देखना होगा कि सीबीआई या अन्य उच्च स्तरीय जांच के सुझावों के बीच, राज्य पुलिस की यह जांच किस निष्कर्ष पर पहुँचती है और कितनी जल्दी दोषियों को सजा दिलाई जाती है। पुलिस मुख्यालय का कहना है कि वे इस मामले में न्याय सुनिश्चित करने के लिए हर संभव कदम उठाएंगे।