Uttarakhand: सनातन संस्कृति के संरक्षण और राष्ट्र चेतना को समर्पित हरिद्वार का भव्य संत सम्मेलन – The Hill News

Uttarakhand: सनातन संस्कृति के संरक्षण और राष्ट्र चेतना को समर्पित हरिद्वार का भव्य संत सम्मेलन

हरिद्वार। उत्तराखंड की पावन नगरी हरिद्वार के सप्तऋषि आश्रम मैदान में आयोजित ‘संत सम्मेलन’ में देश की बड़ी राजनीतिक और आध्यात्मिक हस्तियों का समागम हुआ। इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शिरकत की। सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य सनातन संस्कृति के संरक्षण और राष्ट्र निर्माण में संतों की भूमिका पर चर्चा करना था। इस अवसर पर पुष्कर सिंह धामी ने स्पष्ट किया कि उनकी सरकार सनातन मूल्यों की रक्षा और कानून के राज को स्थापित करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। कार्यक्रम में मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव, जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा और बिहार के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान सहित कई प्रतिष्ठित संत और धर्मगुरु उपस्थित रहे।

सम्मेलन को संबोधित करते हुए पुष्कर सिंह धामी ने सत्यमित्रानंद गिरी महाराज को श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने कहा कि सत्यमित्रानंद गिरी महाराज सनातन चेतना के जीवंत प्रतीक और राष्ट्र चेतना से जुड़े एक दिव्य संत थे। उनका पूरा जीवन राष्ट्रधर्म, सेवा, त्याग और करुणा के लिए समर्पित रहा। पुष्कर सिंह धामी ने भारत माता मंदिर की स्थापना के लिए उनके योगदान को याद करते हुए कहा कि उन्होंने आध्यात्मिक ज्ञान को सामाजिक सेवा से जोड़कर मानवता का मार्ग दिखाया। वर्ष 1998 के कुंभ मेले में उनके आचार्य महामंडलेश्वर बनने के बाद से अब तक 10 लाख से अधिक नागा साधुओं को दीक्षा दी जा चुकी है। मुख्यमंत्री के अनुसार, सत्यमित्रानंद गिरी महाराज की मूर्ति की स्थापना नई पीढ़ी के लिए आध्यात्मिक जागरण का एक सशक्त माध्यम बनेगी।

पुष्कर सिंह धामी ने सनातन धर्म की शाश्वत प्रकृति पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह किसी मनुष्य द्वारा निर्मित नहीं है, बल्कि शाश्वत सिद्धांतों पर आधारित है जो कभी पराजित नहीं होता। उन्होंने वसुधैव कुटुंबकम के भाव को भारतीय संत परंपरा की मूल आत्मा बताया, जो संपूर्ण विश्व को जोड़ने का कार्य करती है। उन्होंने जोर देकर कहा कि उनकी सरकार ने राज्य में शांति और संस्कृति की रक्षा के लिए कई कठोर कदम उठाए हैं। उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) को लागू करना इसी दिशा में एक बड़ा ऐतिहासिक कदम है, जिससे सभी नागरिकों के लिए समान कानून सुनिश्चित किया गया है।

कानून-व्यवस्था और सामाजिक सुरक्षा पर बात करते हुए पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि उत्तराखंड में धर्मांतरण विरोधी कानून और सख्त दंगारोधी कानून को पूरी कड़ाई के साथ लागू किया गया है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि लैंड जिहाद, लव जिहाद और थूक जिहाद जैसी विकृत मानसिकताओं के विरुद्ध राज्य सरकार ने कठोरतम कार्रवाई की है और यह अभियान भविष्य में भी जारी रहेगा। युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वालों के लिए सख्त नकल विरोधी कानून बनाया गया है, जिसके सुखद परिणाम सामने आ रहे हैं। इस कानून की पारदर्शिता के कारण ही राज्य के 28 हजार से अधिक युवाओं को सरकारी नौकरियों में पारदर्शी तरीके से नियुक्तियां प्राप्त हुई हैं।

सांस्कृतिक उत्थान के संदर्भ में मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व की सराहना की। उन्होंने कहा कि देश में सांस्कृतिक चेतना का एक नया युग प्रारंभ हुआ है। अयोध्या में भव्य श्रीराम मंदिर का निर्माण और बदरीनाथ धाम का मास्टर प्लान जैसे कार्य इस बात का प्रमाण हैं कि भारत पुनः विश्व गुरु बनने की राह पर अग्रसर है।

कार्यक्रम में उपस्थित मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि हरिद्वार का भारत माता मंदिर देश की सांस्कृतिक चेतना का केंद्र है। उन्होंने सत्यमित्रानंद गिरी महाराज के जीवन को निरंतर साधना और सद्कर्मों की प्रेरणा बताया। मोहन यादव ने आगामी 2027 के कुंभ मेले की तैयारियों का भी उल्लेख किया और कहा कि संतों का मार्गदर्शन राष्ट्र को हमेशा सही दिशा प्रदान करता है।

जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने देश की आर्थिक प्रगति पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि बीते वर्षों में भारत ने अभूतपूर्व परिवर्तन देखे हैं और आज देश विश्व की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन चुका है। मनोज सिन्हा ने आधारभूत संरचना के विकास का उल्लेख करते हुए कहा कि जल, थल और वायु मार्गों के विस्तार ने देश को नई गति दी है। उन्होंने युवा शक्ति को विकसित राष्ट्र का आधार बताया और कहा कि संत समाज भारतीय संस्कृति को एकता के सूत्र में पिरोने का महान कार्य कर रहा है।

बिहार के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान ने अपने संबोधन में संतों के सान्निध्य को जीवन के दुखों का समाधान बताया। उन्होंने कहा कि परमात्मा एक है और उसकी अभिव्यक्ति विभिन्न आस्थाओं के माध्यम से होती है। भारत की मूल पहचान उसकी सनातन संस्कृति में निहित है। उन्होंने आदि शंकराचार्य द्वारा स्थापित चार मठों को देश की आध्यात्मिक और भौगोलिक एकता का प्रतीक बताया।

संत सम्मेलन के दौरान योग गुरु बाबा रामदेव और शंकराचार्य राजराजेश्वराश्रम महाराज सहित कई अन्य गणमान्य व्यक्ति भी मंच पर मौजूद रहे। संतों ने एक स्वर में राष्ट्र की एकता और अखंडता के लिए कार्य करने का संकल्प दोहराया। इस सम्मेलन ने न केवल आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार किया, बल्कि उत्तराखंड सरकार के सुशासन और सांस्कृतिक संरक्षण के संकल्पों को भी जनता के सामने मजबूती से रखा। भारी संख्या में उपस्थित श्रद्धालुओं और संतों ने पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में लिए जा रहे कड़े निर्णयों का स्वागत किया। अंत में, मुख्यमंत्री ने सभी संतों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनके मार्गदर्शन में ही उत्तराखंड को एक आदर्श राज्य बनाया जाएगा।

 

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