Himachal: अटल टनल के पास बर्फीले तूफान का कहर और बाल बाल बचे कई वाहन – The Hill News

Himachal: अटल टनल के पास बर्फीले तूफान का कहर और बाल बाल बचे कई वाहन

मनाली। हिमाचल प्रदेश के ऊंचाई वाले क्षेत्रों में मौसम के बदलते मिजाज ने जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित करना शुरू कर दिया है। इसी बीच सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण अटल टनल रोहतांग के पास एक बड़ी प्राकृतिक आपदा की स्थिति पैदा हुई, जहाँ तीन अलग-अलग स्थानों पर हिमस्खलन की घटना सामने आई है। टनल के नॉर्थ पोर्टल पर हुए इस हिमस्खलन के कारण एक बड़ा हादसा होते-होते रह गया। गनीमत यह रही कि इस प्राकृतिक आपदा की चपेट में कोई जान-माल का नुकसान नहीं हुआ, लेकिन इसने यात्रियों और स्थानीय प्रशासन की धड़कनें जरूर बढ़ा दीं।

घटना के वक्त केलंग से मनाली की ओर जा रहे चार वाहन उस मार्ग से गुजर रहे थे, जब अचानक पहाड़ों से बर्फ का सैलाब नीचे की ओर आने लगा। बर्फीले मलबे को गिरता देख वाहन चालकों ने सूझबूझ का परिचय दिया और अपने वाहनों को सुरक्षित स्थान पर ही रोक लिया। हिमस्खलन के थमने और स्थिति के थोड़ी सामान्य होने के बाद, ये सभी वाहन सुरक्षित रूप से मनाली की ओर निकल गए। अगर वाहनों की रफ्तार थोड़ी भी तेज होती या वे समय पर नहीं रुकते, तो परिणाम बेहद गंभीर हो सकते थे।

इस पूरी घटना की पुष्टि करते हुए थाना प्रभारी सिस्सु मुकेश ठाकुर ने बताया कि अटल टनल के पास अचानक हिमस्खलन हुआ है। उन्होंने जानकारी दी कि टनल के नॉर्थ पोर्टल के आसपास तीन जगहों पर पहाड़ों से बर्फ खिसकने की घटनाएं दर्ज की गई हैं। उन्होंने राहत की बात यह बताई कि इस हिमस्खलन की वजह से किसी भी प्रकार की क्षति नहीं हुई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जो गाड़ियां उस दौरान मार्ग पर फंसी थीं, वे थोड़ी देर के ठहराव के बाद सुरक्षित रूप से अपने गंतव्य की ओर रवाना हो गई हैं।

पुलिस और स्थानीय प्रशासन अब इस मार्ग पर अत्यधिक सतर्कता बरत रहा है। मुकेश ठाकुर के अनुसार, लाहौल घाटी में पिछले तीन दिनों से लगातार रुक-रुक कर हिमपात हो रहा है। लगातार हो रही बर्फबारी के कारण पहाड़ों पर बर्फ की परतें मोटी और अस्थिर हो गई हैं, जिससे हिमस्खलन की आशंका कई गुना बढ़ गई है। प्रशासन ने स्थानीय लोगों और पर्यटकों से अपील की है कि वे मौजूदा स्थिति की गंभीरता को समझें। उन्होंने विशेष रूप से जोर दिया है कि जब तक मौसम पूरी तरह साफ नहीं हो जाता, तब तक लोग अपने घरों से बाहर न निकलें और केवल बेहद जरूरी या आपातकालीन स्थिति में ही यात्रा करने का जोखिम उठाएं।

सुरक्षा के लिहाज से सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) ने भी अपनी रिपोर्ट साझा की है। बीआरओ अधिकारी के अनुसार, मनाली से केलंग जाने वाले मार्ग पर विशेष सावधानी की आवश्यकता है। विशेष रूप से सोलंगनाला से लेकर केलंग के बीच का पूरा हिस्सा वर्तमान में संवेदनशील बना हुआ है। इस पूरे क्षेत्र में जगह-जगह हिमस्खलन की संभावना है, जिसे देखते हुए राहगीरों और वाहन चालकों को संभलकर चलने की चेतावनी जारी की गई है।

क्षेत्र में बढ़ते खतरे को देखते हुए प्रशासन ने यात्रियों के लिए कुछ अनिवार्य दिशा-निर्देश और नियम जारी किए हैं। इन नियमों का पालन करना हर उस व्यक्ति के लिए आवश्यक है जो इस समय पहाड़ी क्षेत्रों में मौजूद है। प्रशासन ने स्पष्ट कहा है कि पहाड़ों में जमी बर्फ पर चलते समय अत्यधिक सावधानी बरतनी चाहिए क्योंकि बर्फ के नीचे गड्ढे या फिसलन भरी सतह हो सकती है। वाहन चालकों को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि वे किसी भी स्थिति में शॉर्टकट का उपयोग न करें और अपने वाहनों को निर्धारित गति सीमा के भीतर ही चलाएं।

खराब मौसम के दौरान यात्रा को पूरी तरह टालने की सलाह दी गई है। इसके साथ ही, मार्ग पर चल रहे अन्य ड्राइवरों के साथ सहयोग करने और मानवीय संवेदना बनाए रखने को कहा गया है ताकि आपात स्थिति में एक-दूसरे की मदद की जा सके। पर्यटकों के लिए विशेष निर्देश है कि वे निजी वाहनों के बजाय सार्वजनिक परिवहन सेवा या अनुभवी चालकों के साथ ही यात्रा करें, जिन्हें बर्फीले रास्तों पर गाड़ी चलाने का अनुभव हो।

लाहौल और स्पीति के ऊपरी इलाकों में हो रही इस बर्फबारी ने जहां पर्यटन की उम्मीदें जगाई हैं, वहीं सुरक्षा की चुनौतियां भी पैदा कर दी हैं। फिलहाल, पूरा प्रशासनिक अमला अलर्ट पर है और टनल के दोनों पोर्टलों पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है ताकि भविष्य में होने वाली किसी भी अप्रिय घटना को समय रहते रोका जा सके। बर्फबारी और हिमस्खलन के इस दौर ने यह स्पष्ट कर दिया है कि प्रकृति के सामने मानवीय तकनीक और निर्माण को भी अत्यंत सावधानी के साथ संचालित करने की आवश्यकता है। आने वाले दिनों में यदि मौसम का यही रुख रहता है, तो सुरक्षा कारणों से इस मार्ग पर यातायात को कुछ समय के लिए प्रतिबंधित भी किया जा सकता है। फिलहाल, यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता बनी हुई है।

 

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