मनाली। हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने प्रदेश की राजनीति में एक बड़ी हलचल पैदा करते हुए मंत्रिमंडल में विस्तार और व्यापक फेरबदल के स्पष्ट संकेत दिए हैं। मनाली में आयोजित विंटर कार्निवाल का विधिवत शुभारंभ करने के बाद मीडिया से बातचीत के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार के कामकाज को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए मंत्रियों की कार्यक्षमता यानी ‘परफार्मेंस’ का बारीकी से मूल्यांकन किया जाएगा। उन्होंने साफ किया कि इसी मूल्यांकन के आधार पर मंत्रियों के विभागों में बदलाव किया जाएगा और नए चेहरों को कैबिनेट में जगह दी जाएगी।
मुख्यमंत्री सुखविन्द्र सिंह सुक्खू का यह बयान ऐसे समय में आया है जब वे हाल ही में दिल्ली के दौरे से लौटे हैं, जहाँ उन्होंने कांग्रेस पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के साथ मंत्रिमंडल विस्तार की संभावनाओं और प्रशासनिक स्थितियों पर विस्तृत चर्चा की थी। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कर दिया है कि विस्तार के साथ-साथ फेरबदल होना भी तय है, जिसका सीधा अर्थ है कि वर्तमान में कार्यरत मंत्रियों के विभागों में बड़ी कटौती या बदलाव संभव है।
हिमाचल की सियासत पिछले कुछ समय से काफी गरमाई हुई है। विशेष रूप से लोक निर्माण विभाग के मंत्री विक्रमादित्य सिंह द्वारा उत्तर प्रदेश और बिहार के अधिकारियों को लेकर की गई टिप्पणी के बाद राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में खींचतान बढ़ गई थी। विक्रमादित्य सिंह के इस रुख पर मुख्यमंत्री ने कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए उन्हें दूसरों पर सवाल उठाने के बजाय अपने विभाग के कार्यों पर अधिक ध्यान देने की नसीहत दी थी। इसके जवाब में विक्रमादित्य सिंह के समर्थन में उनके आवास ‘होलीलॉज’ पर भारी संख्या में कार्यकर्ताओं का जमावड़ा भी देखा गया था। इन तमाम घटनाक्रमों के बाद अब मुख्यमंत्री द्वारा फेरबदल की बात कहना यह दर्शाता है कि वे सरकार के भीतर अनुशासन और जवाबदेही को लेकर कड़ा रुख अपनाने जा रहे हैं।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस फेरबदल के दौरान कुछ वरिष्ठ मंत्रियों के पर कतरे जा सकते हैं और उनके महत्वपूर्ण विभाग उनसे छीने जा सकते हैं। मुख्यमंत्री का मुख्य फोकस उन क्षेत्रों पर है जिन्हें मंत्रिमंडल में उचित प्रतिनिधित्व की आवश्यकता है। क्यास लगाए जा रहे हैं कि आगामी विस्तार में मंडी और कांगड़ा संसदीय क्षेत्रों से नए मंत्रियों की नियुक्ति की जाएगी। मंडी संसदीय क्षेत्र के अंतर्गत कुल्लू के विधायक सुंदर ठाकुर का नाम इस दौड़ में सबसे आगे चल रहा है। वहीं, सामरिक रूप से महत्वपूर्ण कांगड़ा जिले से संजय रतन और आशीष बुटेल को कैबिनेट में शामिल किए जाने की प्रबल संभावना है।
इस फेरबदल में एक और चौंकाने वाला नाम विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप पठानिया का हो सकता है। चर्चा है कि कुलदीप पठानिया को भी मंत्री पद की जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है। यदि ऐसी स्थिति बनती है, तो प्रदेश विधानसभा को नया अध्यक्ष मिलेगा। मुख्यमंत्री सुखविन्द्र सिंह सुक्खू के इस आक्रामक रुख ने सचिवालय में खलबली मचा दी है। हर मंत्री अब अपने कार्यकाल के दौरान किए गए कार्यों की रिपोर्ट सुधारने में जुट गया है। मुख्यमंत्री ने संदेश दे दिया है कि सरकार में केवल उन्हीं को महत्वपूर्ण जिम्मेदारी मिलेगी जो जनहित के कार्यों में सक्रिय और प्रभावी साबित होंगे। आने वाले कुछ दिनों में होने वाला यह सांगठनिक बदलाव हिमाचल सरकार की भविष्य की दिशा तय करेगा।
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