Himachal: हिमाचल में संवैधानिक संकट के बीच घिरी सुक्खू सरकार और रणधीर शर्मा का तीखा प्रहार

बिलासपुर। भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश मुख्य प्रवक्ता एवं विधायक रणधीर शर्मा ने हिमाचल प्रदेश की सुक्खू सरकार के विरुद्ध मोर्चा खोलते हुए गंभीर आरोप लगाए हैं। शनिवार को बिलासपुर में आयोजित एक पत्रकार वार्ता के दौरान रणधीर शर्मा ने प्रदेश के वर्तमान राजनीतिक और प्रशासनिक हालातों पर गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार की अदूरदर्शिता और गलत नीतियों के कारण आज हिमाचल प्रदेश एक गंभीर संवैधानिक संकट की दहलीज पर खड़ा है। शर्मा के अनुसार, सरकार न केवल लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं में अड़ंगे डाल रही है, बल्कि संवैधानिक संस्थाओं की गरिमा को भी ठेस पहुँचा रही है।

विधायक रणधीर शर्मा ने लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह द्वारा हाल ही में आईएएस (IAS) अधिकारियों के प्रति की गई विवादास्पद टिप्पणी पर कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने इस बयान को ‘असंवैधानिक’ करार देते हुए कहा कि यह प्रदेश की प्रशासनिक व्यवस्था के लिए एक खतरनाक संकेत है। शर्मा ने तंज कसते हुए कहा कि पहले उपमुख्यमंत्री और अब कैबिनेट मंत्री द्वारा सार्वजनिक रूप से अधिकारियों को निशाना बनाना यह दर्शाता है कि सरकार के भीतर सब कुछ ठीक नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि या तो मंत्री अपने विभागों के अधिकारियों से काम करवाने में अक्षम साबित हो रहे हैं, या फिर प्रदेश की अफसरशाही पूरी तरह से बेलगाम हो चुकी है। इस पूरे विवाद पर मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री की चुप्पी गुटबाजी और आपसी घमासान की ओर स्पष्ट इशारा करती है।

पंचायती राज चुनावों को लेकर भी रणधीर शर्मा ने सरकार को कटघरे में खड़ा किया। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार जानबूझकर चुनावों को टालने का प्रयास कर रही है और इसके लिए ‘डिजास्टर एक्ट’ (आपदा अधिनियम) का अनुचित उपयोग किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि समय पर न तो आरक्षण रोस्टर जारी किया गया और न ही मतदाता सूचियों का सही तरीके से प्रकाशन हुआ, जो सीधे तौर पर चुनाव आयोग के स्वतंत्र कार्यों में हस्तक्षेप है। शर्मा ने इसे पूरी तरह अलोकतांत्रिक कृत्य बताया।

हाई कोर्ट के आदेशों की अनदेखी पर प्रहार करते हुए भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि अदालत ने स्पष्ट रूप से 30 अप्रैल से पहले पंचायत चुनाव संपन्न कराने का निर्देश दिया है, लेकिन सरकार की मंशा इस आदेश का पालन करने की नहीं दिखती। उन्होंने मुख्यमंत्री की पुरानी टिप्पणियों को न्यायपालिका की अवमानना बताया और कहा कि कोर्ट के आदेश के 10 दिन बीत जाने के बाद भी चुनावी प्रक्रिया को गति देने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए हैं।

रणधीर शर्मा ने कहा कि मंत्रियों और नौकरशाहों के बीच जारी इस वर्चस्व की जंग का खामियाजा प्रदेश की आम जनता को भुगतना पड़ रहा है। प्रशासनिक अस्थिरता के कारण विकास कार्य पूरी तरह ठप हो गए हैं और शासन व्यवस्था ध्वस्त हो चुकी है। इसके साथ ही उन्होंने पड़ोसी राज्य पंजाब की स्थिति का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि हिमाचल की तरह ही पंजाब में भी वर्तमान सरकार मीडिया की आवाज कुचलने और पत्रकारों को डराने-धमकाने का काम कर रही है। शर्मा ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने अपना रवैया नहीं सुधारा और संवैधानिक मर्यादाओं का पालन नहीं किया, तो भाजपा जनता के साथ मिलकर सड़कों पर उतरकर उग्र आंदोलन करेगी। फिलहाल, भाजपा के इन तीखे हमलों ने प्रदेश के सियासी तापमान को काफी बढ़ा दिया है।

 

Pls read:Himachal: पहाड़ी राज्यों के लिए पीएम ई-बस सेवा के नियमों में ढील की मांग और मुख्यमंत्री सुक्खू ने केंद्र के सामने रखा हिमाचल का पक्ष

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *