US: अमेरिका ने चीन पर चुनावों में दखल का लगाया आरोप, बढ़ा तनाव

वाशिंगटन डी.सी. – अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन ने चीन की अपनी तीन दिवसीय यात्रा के बाद CNN को दिए एक इंटरव्यू में चिंता जताई है कि चीन आगामी अमेरिकी चुनावों को प्रभावित करने और उनमें दखल देने की कोशिश कर रहा है। ब्लिंकन का यह आरोप चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग द्वारा पहले किए गए वादे के विपरीत है जिसमें उन्होंने इस तरह की गतिविधियों से बचने की बात कही थी। ब्लिंकन की यात्रा के दौरान उनकी राष्ट्रपति शी सहित शीर्ष चीनी अधिकारियों के साथ कई घंटों की बैठकें हुईं, जिनमें अमेरिकी तकनीकी नियंत्रण से लेकर मॉस्को को बीजिंग के समर्थन जैसे कई विवादास्पद मुद्दों पर चर्चा हुई। उन्होंने पिछले साल नवंबर में सैन फ्रांसिस्को में हुए शिखर सम्मेलन के दौरान राष्ट्रपति जो बाइडन द्वारा शी जिनपिंग को दिए गए संदेश को दोहराया, जिसमें उन्होंने 2024 के अमेरिकी राष्ट्रपति चुनावों में हस्तक्षेप न करने का अनुरोध किया था। शी ने उस समय इस पर सहमति जताई थी। जब ब्लिंकन से पूछा गया कि क्या चीन पहले से ही इस वादे का उल्लंघन कर रहा है, तो उन्होंने कहा, “हाँ, हमने ऐसा देखा है,“ हालांकि उन्होंने इस बारे में विस्तार से जानकारी नहीं दी। उन्होंने अमेरिका में मौजूदा सामाजिक विभाजनों का फायदा उठाने के लिए चीन और अन्य देशों द्वारा चलाए जा रहे प्रभाव अभियानों पर भी चिंता व्यक्त की। चीन ने इन आरोपों का खंडन किया है और कहा है कि वह अन्य देशों के आंतरिक मामलों में दखल नहीं देता। हालांकि, ब्लिंकन के बयानों से दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ने की संभावना है। अब देखना होगा कि अमेरिका इन आरोपों पर क्या कार्रवाई करता है और चीन इस पर कैसी प्रतिक्रिया देता है।   Pls read:US: अमेरिकी विश्वविद्यालाओं में इजराइल-हमास युद्ध के विरोध में उबाल,…

US: अमेरिकी विश्वविद्यालाओं में इजराइल-हमास युद्ध के विरोध में उबाल, कई जगह झड़पें

न्यूयॉर्क: इज़राइल और हमास के बीच जारी युद्ध के विरोध में अमेरिका के कई विश्वविद्यालयों में प्रदर्शन उग्र हो गए हैं। कई जगहों पर पुलिस को प्रदर्शनकारियों को नियंत्रित करने के लिए बुलाना पड़ा है, जिससे झड़पें और गिरफ्तारियां हुई हैं। मुख्य घटनाक्रम: व्यापक विरोध प्रदर्शन: कैलिफोर्निया के दक्षिणी विश्वविद्यालय, ऑस्टिन में टेक्सास विश्वविद्यालय, बोस्टन के इमर्सन कॉलेज, कैलिफोर्निया स्टेट पॉलिटेक्निक यूनिवर्सिटी, हम्बोल्ट, ब्राउन यूनिवर्सिटी, मिशिगन यूनिवर्सिटी, एमआईटी और कोलंबिया विश्वविद्यालय सहित कई विश्वविद्यालयों में विरोध प्रदर्शन हुए हैं। पुलिस से झड़प और गिरफ्तारियां: दक्षिणी कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय में 93, ऑस्टिन में टेक्सास विश्वविद्यालय में दर्जनों और इमर्सन कॉलेज में 108 प्रदर्शनकारियों को गिरफ्तार किया गया है। इमर्सन कॉलेज में झड़प के दौरान चार पुलिस अधिकारी घायल भी हुए हैं। परिसर बंद: बढ़ते विरोध प्रदर्शनों के कारण दक्षिणी कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय ने अपने परिसर को बंद करने की घोषणा की है। यहूदी विरोधी भावना का आरोप: कुछ यहूदी छात्रों ने आरोप लगाया है कि विरोध प्रदर्शन यहूदी विरोधी भावना में बदल रहे हैं। प्रदर्शनकारियों की मांग: प्रदर्शनकारी अमेरिकी सरकार पर गाजा में नागरिकों पर इजरायली हमलों को रोकने के लिए दबाव बनाने की मांग कर रहे हैं। राजनीतिक हस्तियों की भागीदारी: अमेरिकी प्रतिनिधि सभा के अध्यक्ष माइक जॉनसन जब कोलंबिया विश्वविद्यालय में यहूदी छात्रों का समर्थन करने पहुंचे, तो उनका सामना फलस्तीन समर्थक प्रदर्शनकारियों के विरोध से हुआ। स्थिति यह दर्शाती है कि इज़राइल–हमास युद्ध को लेकर अमेरिका में गहरे मतभेद और तनाव हैं, जो विश्वविद्यालय परिसरों में भी साफ दिखाई दे रहे हैं।   Pls read:US: अमेरिका ने ईरान से…

US: अमेरिका ने ईरान से व्यापार करने पर पाकिस्तान को प्रतिबंधों की चेतावनी दी

वॉशिंगटन: अमेरिका ने पाकिस्तान को ईरान के साथ व्यापारिक समझौतों को लेकर चेतावनी दी है। अमेरिकी विदेश विभाग के उप प्रवक्ता वेदांत पटेल ने कहा कि ईरान के साथ व्यापार करने वाले देशों को अमेरिकी प्रतिबंधों के जोखिम के बारे में पता होना चाहिए। मुख्य बिंदु: ईरानी राष्ट्रपति की हालिया पाकिस्तान यात्रा के दौरान दोनों देशों ने आठ समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए और द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ाने पर सहमति जताई। अमेरिका ने इस सप्ताह पाकिस्तान के बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम के आपूर्तिकर्ताओं पर प्रतिबंध लगाए, जिनमें चीन की तीन कंपनियां भी शामिल हैं। अमेरिका का कहना है कि ये प्रतिबंध सामूहिक विनाश के हथियारों के प्रसार को रोकने के लिए लगाए गए हैं। अमेरिका ने पाकिस्तान को स्पष्ट किया है कि ईरान के साथ व्यापार करने पर उसे भी प्रतिबंधों का सामना करना पड़ सकता है। इस चेतावनी से पाकिस्तान की मुश्किलें बढ़ सकती हैं जो पहले से ही आर्थिक संकट से जूझ रहा है। पाकिस्तान को अब अमेरिका और ईरान के बीच संतुलन बनाए रखने की चुनौती का सामना करना पड़ेगा।   Pls read:US: अमेरिका के हस्ताक्षेप के बाद ईरान…

UK: ब्रिटिश संसद ने पारित किया विवादास्पद रंवाडा निर्वासन बिल

लंदन (नवंबर 6, 2023): ब्रिटेन की संसद ने विवादित रवांडा निर्वासन विधेयक को पारित कर दिया है। इस विधेयक के तहत अवैध रूप से ब्रिटेन में प्रवेश करने वाले शरणार्थियों को रवांडा भेजा जाएगा। विधेयक के पारित होने के दौरान संसद में काफी हंगामा भी हुआ। प्रधानमंत्री ऋषि सुनक ने जानकारी दी कि अगले 10 से 12 हफ्तों के भीतर अवैध शरणार्थियों के पहले जत्थे को रवांडा भेजने की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। इसके लिए ब्रिटेन सरकार ने कमर्शियल चार्टर विमानों को बुक किया है। गौरतलब है कि सुनक ने प्रधानमंत्री बनने से पहले ही रवांडा नीति लागू करने का वादा किया था। पिछले कुछ वर्षों में इंग्लिश चैनल पार करके हजारों शरणार्थी रवांडा से ब्रिटेन पहुँच चुके हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, इस साल जनवरी से मार्च के बीच 4600 से ज़्यादा लोग इंग्लिश चैनल पार करके ब्रिटेन पहुँचे हैं। ब्रिटेन और रवांडा के बीच अप्रैल 2022 में शरणार्थी नीति पर एक समझौता हुआ था। इस समझौते के तहत ब्रिटेन ने रवांडा को 12 करोड़ पाउंड की आर्थिक सहायता प्रदान की थी। इस धनराशि का उपयोग रवांडा में रहने वाले लोगों के लिए आवास और रोजगार की व्यवस्था करने के लिए किया जाना था।   PLs read:US: अमेरिका के हस्ताक्षेप के बाद ईरान पर आग बबूला…

Gaza: गाजा में इजराली हमलों में 22 फलस्तीनी मारे गए, 14 बच्चों की भी मौत

यरुशलम: गाजा पट्टी में इजरायली सेना के हमले जारी हैं। शनिवार–रविवार की रात मिस्र सीमा के शहर रफाह पर इजरायल के हवाई हमले में 22 फलस्तीनियों की मौत हो गई। मारे गए लोगों में 18 बच्चे हैं। इससे एक दिन पहले इजरायली कार्रवाई में रफाह में नौ लोग मारे गए थे जिनमें दो महिलाएं और छह बच्चे थे। रफाह में गाजा के विभिन्न इलाकों से आए करीब 14 लाख लोगों ने शरण ले रखी है। रफाह में हमास और इस्लामिक जिहाद के लड़ाकों के छिपे होने का कयास लगाकर इजरायल वहां पर जमीनी सैन्य कार्रवाई की योजना करीब डेढ़ महीने से बना रहा है। हालांकि, भारी खूनखराबे की आशंका से अमेरिका, यूरोपीय देश और संयुक्त राष्ट्र इजरायल को इस कार्रवाई के लिए रोक रहे थे। लेकिन 14 अप्रैल को इजरायल पर ईरान के हमले के बाद उसे बड़ा जवाबी हमला करने से रोकने के लिए अमेरिका ने रफाह में कार्रवाई के लिए इजरायली सेना को कुछ छूट देने पर बात की है। माना जा रहा है कि अमेरिका की हरी झंडी के बाद ही इजरायल ने रफाह पर हवाई हमले तेज किए हैं। इससे पहले रफाह पर हमले के लिए इजरायली विमान कभी–कभार उसकी ओर रुख करते थे। रफाह में हुए ताजा दो हमलों में से एक में एक ही परिवार की दो महिलाएं और 17 बच्चे मारे गए, जबकि दूसरे हमले में एक पुरुष, एक महिला और उनका तीन वर्ष का बच्चा मारा गया। अब तक 34,000 से अधिक फलस्तीनी मारे गए गाजा में सात अक्टूबर, 2023 से जारी इजरायली कार्रवाई में अब तक 34,000 से अधिक फलस्तीनी मारे गए हैं। अमेरिकी संसद के सदन प्रतिनिधि सभा ने शनिवार को इजरायल को 26 अरब डॉलर की सहायता देने का प्रस्ताव पारित किया है, जिसमें विभिन्न प्रकार के हथियार और गोला–बारूद शामिल हैं। इस धनराशि में से नौ अरब डॉलर मानवीय सहायता के लिए गाजा को मिलेंगे।

Iraq: ईरान के बाद अब ईरान में पीएमएफ के ठिकानों पर हवाई हमले

बगदाद। इराक के सैन्य अड्डों पर शुक्रवार को जबरदस्त हवाई हमले हुए हैं। बगदाद के दक्षिण…

Kiev: यूक्रेन के शहर चेर्नेहिव पर रूस का हमला, 17 नागरिकों की मौत

कीव। यूक्रेन के शहर चेर्नेहिव को रुस की मिसाइलों ने निशाना बनाया। हमले में कम से कम…

Myanmar: आंग सान सू की को जेल से नजरबंध में स्थानांतरित किया

बैंकॉक।म्यांमार की लोकतंत्र समर्थक नेता और नोबेल पुरस्कार विजेता आंग सान सू की को भीषण गर्मी के बीच स्वास्थ्य कारणों से जेल से नजरबंदी में स्थानांतरित कर दिया गया है। 78 वर्षीय सू की पर विभिन्न आरोपों में 27 साल की जेल की सजा सुनाई गई थी, जिन्हें उनके समर्थक राजनीति से प्रेरित मानते हैं। मुख्य बिंदु: गर्मी से राहत: म्यांमार में भीषण गर्मी के कारण आंग सान सू की और पूर्व राष्ट्रपति विन म्यिंट सहित कई बुजुर्ग कैदियों को जेल से बाहर लाया गया। नजरबंदी: सू की को नेपीता में उनके घर में नजरबंद रखा गया है, जबकि विन म्यिंट को ताउंगू में नजरबंद किया गया है। राजनीतिक संघर्ष: म्यांमार में 2021 में सेना द्वारा चुनी हुई सरकार को हटाए जाने के बाद से राजनीतिक संघर्ष जारी है। अंतर्राष्ट्रीय निंदा: सेना के इस कदम की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर निंदा की जा रही है और सू की की रिहाई की मांग की जा रही है। भविष्य: आंग सान सू की की नजरबंदी म्यांमार में चल रहे राजनीतिक संघर्ष में एक नया मोड़ है। यह देखना बाकी है कि क्या यह कदम देश में शांति और स्थिरता की दिशा में कोई कदम बढ़ाएगा या तनाव को और बढ़ाएगा।

US: अमेरिका के हस्ताक्षेप के बाद ईरान पर आग बबूला इजरायल के नरम पड़े तेवर

तेल अवीव में हाल ही में ईरान द्वारा किए गए हमले के बाद, इजरायल की प्रतिक्रिया अपेक्षा से कम आक्रामक रही है। इसके पीछे अमेरिका का दबाव प्रमुख कारण माना जा रहा है। आइए, इस स्थिति का विश्लेषण करते हैं: घटनाक्रम: इजरायल पर सीरिया में ईरानी दूतावास पर हमला करने और राजदूतों को मारने का आरोप लगाया गया। इसके जवाब में, ईरान ने इजरायल पर 300 ड्रोन और मिसाइलों से हमला किया। इजरायल के रक्षा तंत्र ने कई मिसाइलों को रोक दिया, लेकिन कुछ ने नुकसान पहुंचाया। इजरायल के प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने जवाबी कार्रवाई की कसम खाई, लेकिन “वार कैबिनेट“ बैठक में समय और तरीके पर कोई निर्णय नहीं लिया गया। अमेरिका का हस्तक्षेप: अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने नेतन्याहू से बात की और स्पष्ट किया कि अमेरिका युद्ध में सक्रिय रूप से भाग नहीं लेगा। बाइडन ने हथियार और अन्य सहायता का आश्वासन दिया, लेकिन युद्ध में शामिल होने से इनकार कर दिया। अमेरिका का मानना ​​है कि युद्ध से पश्चिम एशिया में स्थिति और बिगड़ जाएगी। इजरायल की नरमी के कारण: अमेरिकी दबाव: अमेरिका का समर्थन इजरायल के लिए महत्वपूर्ण है। अमेरिका के युद्ध में शामिल न होने के फैसले ने इजरायल की आक्रामक प्रतिक्रिया की संभावना को कम कर दिया है। क्षेत्रीय स्थिरता: इजरायल को इस बात की भी चिंता है कि पूर्ण युद्ध से क्षेत्रीय स्थिरता को खतरा हो सकता है और अन्य देशों को भी संघर्ष में घसीटा जा सकता है। आंतरिक राजनीति: नेतन्याहू की सरकार आंतरिक राजनीतिक चुनौतियों का सामना कर रही है। एक बड़ा युद्ध जनता के बीच अलोकप्रिय साबित हो सकता है। भविष्य: अभी भी यह स्पष्ट नहीं है कि इजरायल कैसे प्रतिक्रिया देगा। सीमित जवाबी कार्रवाई या कूटनीतिक प्रयासों की संभावना है।…

US: ईरान कभी भी कर सकता है इजरायल पर हमला- अमेरिका

नई दिल्ली। इजरायल की गाजा में जंग के बीच अब एक नया युद्ध छिड़ने की कगार…