शिमला। हिमाचल प्रदेश से मानसून की विदाई हुए कुछ दिन ही बीते हैं, लेकिन मौसम ने एक बार फिर करवट बदल ली है। पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने के कारण प्रदेश के कई हिस्सों में बारिश, ओलावृष्टि और तेज हवाओं का दौर शुरू हो गया है। मौसम विज्ञान केंद्र ने 8 और 9 अक्टूबर को प्रदेश के कई जिलों में खराब मौसम को लेकर यलो अलर्ट जारी किया है। मौसम के इस बदलाव से पहाड़ी क्षेत्रों में ठंड भी बढ़ने लगी है।
मौसम विभाग के अनुसार 8 अक्टूबर को कांगड़ा, मंडी, शिमला और सिरमौर में गरज-चमक के साथ बारिश होने की संभावना है। इस दौरान 30 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं। वहीं 9 अक्टूबर को सोलन, शिमला और सिरमौर में बारिश के साथ तेज हवाओं का अलर्ट जारी किया गया है। प्रदेश के ऊंचाई वाले इलाकों में हल्की बर्फबारी होने की भी संभावना जताई गई है।
पालमपुर में 82.2 मिलीमीटर बारिश
मंगलवार रात से बुधवार तक प्रदेश के कई इलाकों में मौसम ने अपना असर दिखाया। कुछ स्थानों पर तेज बारिश के साथ ओलावृष्टि और आंधी चली। पिछले 24 घंटों में कांगड़ा जिले के पालमपुर में सबसे अधिक 82.2 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई। शिमला के सराहन में 28.7 मिलीमीटर और कुल्लू के कोठी में 19 मिलीमीटर बारिश रिकॉर्ड हुई।
पालमपुर में तेज हवाओं ने भी लोगों को परेशान किया। यहां हवा की गति 56 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच गई। अचानक बदले मौसम से कई इलाकों में जनजीवन प्रभावित हुआ और किसानों की चिंताएं भी बढ़ गई हैं।
किन्नौर में ओलावृष्टि से फसलों को नुकसान
मौसम की सबसे ज्यादा मार किन्नौर जिले के किसानों पर पड़ी है। जिले के प्रवेश क्षेत्र चौरा और तरंडा पंचायतों में भारी ओलावृष्टि से खेतों में तैयार हो रही फसलों को काफी नुकसान पहुंचा है। स्थानीय स्तर पर उगाई जाने वाली कोदा, चौलाई, मक्की, दालों और विभिन्न सब्जियों पर ओलावृष्टि का व्यापक असर पड़ा है।
किसानों के सामने अब केवल फसल खराब होने की चिंता नहीं है, बल्कि पशुओं के चारे का संकट भी खड़ा हो गया है। ओलावृष्टि के कारण पेड़ों की पत्तियां बड़ी संख्या में झड़ गई हैं। ऐसे में आने वाली सर्दियों के दौरान पशुओं के लिए चारा जुटाना ग्रामीणों के लिए चुनौती बन सकता है।
पंचायत उपप्रधान नरगू सेन और स्थानीय लोगों अजेंदर नेगी तथा भूपेश नेगी ने प्रशासन से प्रभावित क्षेत्रों में नुकसान का आकलन करने और किसानों को उचित मुआवजा देने की मांग की है।
कुकुमसेरी में सबसे ज्यादा ठंड
बारिश और ऊंचाई वाले इलाकों में बर्फबारी की संभावना के बीच हिमाचल में ठंड भी बढ़ने लगी है। लाहुल-स्पीति का कुकुमसेरी प्रदेश का सबसे ठंडा स्थान रहा, जहां न्यूनतम तापमान 2.9 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। केलेग में न्यूनतम तापमान 3.7 डिग्री और ताबो में 4.9 डिग्री सेल्सियस रहा।
मनाली में न्यूनतम तापमान 10.1 डिग्री, जबकि राजधानी शिमला में 14.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। मौसम विभाग ने अगले दो दिनों के दौरान लोगों और पर्यटकों को मौसम की स्थिति को ध्यान में रखकर यात्रा की योजना बनाने की सलाह दी है।
Pls read:Himachal: राहुल गांधी की हिरासत के विरोध में दिल्ली रवाना हुए सुखविंद्र सिंह सुक्खू