नई दिल्ली, 25 सितंबर। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की गई है। याचिका में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर से जुड़े फैसलों और प्रक्रियाओं में कथित अनियमितताओं की जांच की मांग की गई है। याचिकाकर्ता ने चुनाव आयोग के दो अन्य आयुक्तों की सहमति के बिना लिए गए कुछ फैसलों को भी चुनौती दी है।
संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत अधिवक्ता शैलेंद्र मणि त्रिपाठी की ओर से दायर याचिका में अंग्रेजी अखबार की एक रिपोर्ट का हवाला दिया गया है। रिपोर्ट में दावा किया गया था कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने एसआईआर से संबंधित फैसलों और आदेशों पर कई मौकों पर आपत्ति जताई थी। याचिका में इसी रिपोर्ट को आधार बनाते हुए उन निर्णयों की वैधानिकता पर सवाल उठाए गए हैं, जिन पर कथित तौर पर दोनों चुनाव आयुक्तों की सहमति नहीं थी।
याचिका में इन मामलों की जांच के लिए विशेष जांच दल यानी एसआईटी गठित करने की मांग भी की गई है। याचिकाकर्ता ने यह पता लगाने के लिए जांच की मांग की है कि मतदाता सूची से कथित तौर पर 13 करोड़ मतदाताओं के नाम हटाए जाने की प्रक्रिया कैसे हुई। हालांकि, यह आंकड़ा और इससे जुड़े आरोप याचिका में किए गए दावों का हिस्सा हैं।
याचिका में जनप्रतिनिधित्व कानून के प्रावधानों के तहत मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ कार्रवाई की मांग भी की गई है। इसमें सक्षम अधिकारी को शिकायत दर्ज करने और संबंधित प्रावधानों के तहत आगे की कानूनी प्रक्रिया शुरू करने का निर्देश देने का अनुरोध किया गया है।
याचिकाकर्ता ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के अलावा वरिष्ठ उप चुनाव आयुक्त मनीष गर्ग, महानिदेशक आईटी सीमा खन्ना तथा उन अन्य अधिकारियों के खिलाफ भी कार्रवाई की मांग की है, जिन्हें जांच में किसी आधिकारिक दायित्व के उल्लंघन के लिए जिम्मेदार पाया जाए।
याचिका में चुनाव आयुक्तों के बीच मतदाता सूची और उससे जुड़ी प्रक्रियाओं को लेकर कथित मतभेदों का भी उल्लेख किया गया है। इसमें कहा गया है कि मई 2026 में फॉर्म-6 में प्रस्तावित बदलाव को लेकर चुनाव आयुक्त विवेक जोशी ने आपत्ति जताई थी। याचिका के अनुसार, जोशी का मत था कि मतदाता पंजीकरण नियम, 1960 में आवश्यक संशोधन किए बिना संबंधित कानूनी फॉर्म में बदलाव नहीं किया जा सकता। बाद में चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू ने भी इस आपत्ति का समर्थन किया।
याचिका में चुनावी रोल के आंकड़ों के प्रबंधन और फॉर्म-6 में बदलाव से जुड़े निर्णयों को भी जांच के दायरे में लाने का अनुरोध किया गया है। याचिकाकर्ता का कहना है कि इन निर्णयों और प्रक्रियाओं की स्वतंत्र जांच से संबंधित तथ्यों को स्पष्ट किया जा सकता है।
मामला अब सुप्रीम कोर्ट के समक्ष है और याचिका में लगाए गए आरोपों तथा मांगी गई जांच पर न्यायालय की प्रक्रिया और आगे के आदेश महत्वपूर्ण होंगे।
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