SC: वंदे मातरम् को न गाने पर सजा के सवाल पर विचार करेगा सुप्रीम कोर्ट

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम् के कितने छंद सार्वजनिक रूप से गाए जाने चाहिए, इस सवाल पर तत्काल विचार करने से इनकार कर दिया। हालांकि, अदालत ने इस महत्वपूर्ण कानूनी प्रश्न पर विचार करने की सहमति दी कि क्या राष्ट्रीय गीत न गाने को दंडनीय अपराध बनाया जा सकता है। मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने की, जिसमें न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना शामिल थे।

सुनवाई के दौरान पीठ ने राष्ट्रगान से जुड़े पुराने बिजो इमैनुएल मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले का भी उल्लेख किया। अदालत ने संकेत दिया कि उस फैसले में स्थापित कानूनी सिद्धांत के अनुसार किसी व्यक्ति को केवल राष्ट्रगान नहीं गाने के आधार पर दंडित नहीं किया जा सकता। इसी संदर्भ में वर्तमान याचिका में राष्ट्रीय गीत को लेकर बनाए गए दंडात्मक प्रावधानों की संवैधानिक वैधता पर विचार का मुद्दा सामने आया है।

याचिका में वंदे मातरम् के सभी छह छंदों का गायन अनिवार्य किए जाने से जुड़े प्रावधानों को चुनौती दी गई है। याचिकाकर्ता की ओर से तर्क दिया गया है कि गीत के अंतिम हिस्सों में धार्मिक स्वरूप की अभिव्यक्तियां मौजूद हैं और ऐसे हिस्सों को गाने के लिए कानूनी रूप से बाध्य करना संविधान में दिए गए धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकार के संदर्भ में जांचा जाना चाहिए।

पीठ ने इस मामले में केंद्र सरकार से जवाब दाखिल करने को कहा है। हालांकि, इस स्तर पर केंद्र को औपचारिक नोटिस जारी नहीं किया गया। अदालत ने यह भी कहा कि कानून में मौजूद दंड के प्रावधानों की समीक्षा संविधान के अनुच्छेद 25 और 26 में दिए गए मौलिक अधिकारों के संदर्भ में की जा सकती है। इन अनुच्छेदों में धार्मिक स्वतंत्रता और धार्मिक संस्थाओं से जुड़े अधिकारों का प्रावधान है।

यह याचिका कर्नाटक के प्रसिद्ध संगीतकार टी.एम. कृष्णा ने दाखिल की है। याचिका में वंदे मातरम् के सभी छह छंदों को गाना अनिवार्य करने वाले प्रावधान पर सवाल उठाया गया है। याचिकाकर्ता की ओर से यह भी चुनौती दी गई है कि राष्ट्रीय गीत को राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम से जुड़े कानून के दायरे में लाने का प्रावधान संवैधानिक कसौटी पर परखा जाना चाहिए।

मामला ऐसे समय में सुप्रीम कोर्ट पहुंचा है जब वंदे मातरम् के गायन को लेकर अलग-अलग स्तर पर कानूनी और प्रशासनिक बहस चल रही है। हाल ही में कर्नाटक सरकार के एक आदेश में कुछ सरकारी कार्यक्रमों में राष्ट्रीय गीत के पहले दो छंदों के गायन की व्यवस्था की गई थी। इस फैसले को कर्नाटक हाई कोर्ट में भी चुनौती दी गई है।

सुप्रीम कोर्ट में केंद्र की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने याचिका में उठाई गई चुनौती का विरोध किया। सुनवाई के दौरान उन्होंने राष्ट्रीय गीत के ऐतिहासिक महत्व से जुड़े तर्क रखे। अब मामले में केंद्र का जवाब आने के बाद अदालत यह देखेगी कि वंदे मातरम् को लेकर दंडात्मक प्रावधान संविधान के मौलिक अधिकारों के अनुरूप हैं या नहीं।

फिलहाल अदालत ने वंदे मातरम् के दो या छह छंदों में से किसी एक व्यवस्था को लेकर कोई अंतिम निर्णय नहीं दिया है। अगली सुनवाई में केंद्र के जवाब और याचिका में उठाए गए संवैधानिक प्रश्नों पर आगे विचार किया जाएगा।

 

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