Punjab: डीए मामले में आदेश की अनदेखी पर पंजाब सरकार को हाईकोर्ट की फटकार

चंडीगढ़। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने डीए मामले में पूर्व में दिए गए न्यायिक आदेश का पालन न करने और निर्धारित रिपोर्ट दाखिल नहीं किए जाने पर पंजाब सरकार के रवैये पर कड़ी नाराजगी जताई है। अदालत ने स्पष्ट किया कि सरकार को किसी आदेश के खिलाफ अपील करने का पूरा कानूनी अधिकार है, लेकिन केवल अपील दायर कर देने से पहले से जारी आदेश के अनुपालन को रोका नहीं जा सकता।

सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से बताया गया कि संबंधित आदेश के खिलाफ अपील दाखिल की जा चुकी है, हालांकि उसमें कुछ खामियां रह गई हैं। इन्हें दूर करने की प्रक्रिया चल रही है। इस पर हाईकोर्ट ने राज्य पक्ष को निर्देश दिया कि अपील में मौजूद कमियों को जल्द दूर किया जाए और मामले को शीघ्र सुनवाई के लिए आगे बढ़ाया जाए।

अदालत ने कहा कि वह सरकार के अपील के अधिकार को सीमित नहीं कर रही है। यदि किसी न्यायिक आदेश से राज्य पक्ष असहमत है तो वह कानून में उपलब्ध उचित उपाय का इस्तेमाल कर सकता है। हालांकि, अपील लंबित होने का आधार बनाकर पहले से दिए गए आदेश के पालन से बचने की अनुमति नहीं दी जा सकती।

95 वर्ष तक के आवेदक मामले में शामिल

सुनवाई के दौरान अदालत को बताया गया कि मामले में शामिल कुछ आवेदकों की उम्र काफी अधिक है और इनमें 95 वर्ष तक के लोग भी हैं। इस तथ्य को देखते हुए अदालत ने मामले को अनावश्यक रूप से लंबित रखने के बजाय कानूनी प्रक्रिया को तेजी से आगे बढ़ाने पर जोर दिया।

राज्य पक्ष की ओर से 90 दिन की अपील अवधि का उल्लेख किए जाने पर अदालत ने सवाल किया कि इस अवधि के दौरान पहले से जारी न्यायिक निर्देशों का क्या होगा। अदालत ने स्पष्ट किया कि अपील का अधिकार और मौजूदा आदेश का पालन दो अलग-अलग विषय हैं तथा दोनों को एक-दूसरे से जोड़कर आदेश के अनुपालन को टाला नहीं जा सकता।

अपील की खामियां जल्द दूर करने का निर्देश

सरकार की ओर से यह भी बताया गया कि मूल मामले से जुड़ी अवमानना कार्यवाही लंबित है। आवेदकों की ओर से अदालत के आदेश का पालन नहीं होने के संबंध में अवमानना याचिका दायर की गई है। राज्य पक्ष ने आशंका जताई कि अलग-अलग कानूनी कार्यवाहियों के कारण मामला और लंबा खिंच सकता है।

इस पर हाईकोर्ट ने कहा कि यदि सरकार को मूल आदेश पर आपत्ति है तो उसे अपनी अपील पर शीघ्र सुनवाई करवाने की दिशा में कदम उठाना चाहिए। अदालत ने राज्य पक्ष को प्रक्रिया में देरी के बजाय मामले को जल्द आगे बढ़ाने के लिए कहा।

अदालत ने सरकार को चेताया

हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान पंजाब सरकार के रवैये पर सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि न्यायिक प्रक्रिया के साथ किसी तरह का खेल नहीं किया जा सकता। अदालत ने राज्य पक्ष को कानूनी प्रक्रिया का सम्मान करने और आदेशों के अनुपालन को लेकर गंभीरता बरतने की हिदायत दी।

अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि सरकार को हाईकोर्ट के आदेश पर आपत्ति है तो वह सक्षम न्यायिक मंच के समक्ष उसे चुनौती दे सकती है, लेकिन चुनौती देने की प्रक्रिया का इस्तेमाल आदेश के पालन को टालने के लिए नहीं किया जा सकता।

सुप्रीम कोर्ट में जल्द सुनवाई कराने को कहा

हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार को दस दिन का समय देते हुए कहा कि इस अवधि में सुप्रीम कोर्ट में दायर अपील पर सुनवाई करवाने का प्रयास किया जाए। अदालत ने संकेत दिया कि यदि निर्धारित समय में सुप्रीम कोर्ट में मामले की सुनवाई नहीं होती है तो हाईकोर्ट अपने स्तर पर मामले की आगे सुनवाई करेगा।

इस मामले में अदालत की सख्ती का मुख्य केंद्र न्यायिक आदेश के अनुपालन और अपील के अधिकार के बीच संतुलन बनाए रखना रहा। हाईकोर्ट ने साफ किया कि कानूनी चुनौती का रास्ता खुला है, लेकिन जब तक किसी आदेश पर रोक नहीं लगती, तब तक उसके पालन की जिम्मेदारी संबंधित पक्ष की बनी रहती है।

 

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