देहरादून, 16 अगस्त। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सचिवालय में जल जीवन मिशन की प्रगति की गहन समीक्षा की। बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि जल जीवन मिशन की सफलता केवल आंकड़ों या नल कनेक्शन की संख्या से नहीं मापी जाएगी, बल्कि इसकी असली सार्थकता तब है जब प्रत्येक ग्रामीण परिवार तक नियमित, पर्याप्त और गुणवत्तापूर्ण पेयजल पहुँचे। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि राज्य के शेष बचे सभी पात्र ग्रामीण परिवारों को निर्धारित समय सीमा के भीतर नल कनेक्शन से जोड़ा जाए और इस कार्य में किसी भी प्रकार की शिथिलता न बरती जाए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का लक्ष्य ‘हर घर जल’ के संकल्प को शत-प्रतिशत पूरा करना है। उन्होंने अधिकारियों को आदेश दिया कि जिन क्षेत्रों में योजनाएं पूरी हो चुकी हैं, वहां केवल कागजी रिपोर्ट पर भरोसा न करें, बल्कि धरातल पर जाकर भौतिक सत्यापन (Physical Verification) सुनिश्चित करें। उन्होंने जोर देकर कहा कि लोगों को सुरक्षित और स्वच्छ पानी मिलना उनके स्वास्थ्य और जीवन स्तर के लिए अनिवार्य है।
पर्वतीय जल स्रोतों का संरक्षण अनिवार्य
उत्तराखंड की भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए मुख्यमंत्री ने पेयजल स्रोतों के संरक्षण और उनके पुनर्जीवीकरण पर विशेष ध्यान देने को कहा। उन्होंने निर्देश दिए कि पहाड़ी क्षेत्रों में जल स्रोतों के रिचार्ज (पुनर्भरण) के लिए वर्षा जल संचयन (Rainwater Harvesting) जैसी तकनीकों को प्रभावी ढंग से लागू किया जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि केवल पाइप लाइन बिछाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि भविष्य की जरूरतों को देखते हुए जल स्रोतों को जीवित रखना भी विभाग की जिम्मेदारी है।
| जल जीवन मिशन: उत्तराखंड की वर्तमान स्थिति |
| • कुल पेयजल योजनाएं: 16,555 |
| • पूरी हो चुकी योजनाएं: 15,540 (औसत प्रगति 92.46%) |
| • वर्तमान में निर्माणाधीन: 1,015 योजनाएं |
| • लाभान्वित परिवार: 14.20 लाख (कुल लक्ष्य 14.48 लाख में से) |
| • सत्यापित गांव: 9,796 गांव (कुल 14,979 में से) |
जवाबदेही और तकनीकी समाधान
बैठक में मुख्यमंत्री ने जिलाधिकारियों को निर्देश दिए कि वे अपने-अपने जनपदों में निर्माणाधीन और लंबित योजनाओं की नियमित समीक्षा करें। उन्होंने कहा कि यदि किसी स्तर पर अनावश्यक देरी पाई जाती है, तो संबंधित कार्यदायी संस्था और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाएगी। इसके अलावा, जलापूर्ति से जुड़ी तकनीकी समस्याओं के त्वरित समाधान के लिए प्रत्येक जिले में एक मजबूत व्यवस्था विकसित करने के निर्देश भी दिए गए। मुख्यमंत्री ने कहा कि संचालन और रखरखाव (O&M) के लिए एक स्थायी नीति होनी चाहिए ताकि योजनाएं लंबे समय तक सुचारू रूप से काम कर सकें।
वित्तीय प्रबंधन और समन्वय
मुख्यमंत्री ने योजनाओं के वित्तीय प्रबंधन को और अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि सभी विभागों को आपसी समन्वय के साथ काम करना चाहिए ताकि बुनियादी ढांचे के निर्माण में कोई बाधा न आए। बैठक के दौरान बताया गया कि राज्य में अब तक 14.20 लाख परिवारों को नल से जल उपलब्ध कराया जा चुका है, जो कुल लक्ष्य का एक बड़ा हिस्सा है। अवशेष कार्यों को मिशन मोड में पूरा करने की तैयारी है।
बैठक में अवस्थापना अनुश्रवण परिषद के उपाध्यक्ष विश्वास डाबर, प्रमुख सचिव आर.के. सुधांशु, सचिव पेयजल रणवीर सिंह चौहान, अपर सचिव रोहित मीणा, झरना कमठान सहित कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। मुख्यमंत्री ने अंत में दोहराया कि सुशासन का असली अर्थ तभी सिद्ध होगा जब सरकारी योजनाओं का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पारदर्शी तरीके से पहुँचे। उन्होंने अधिकारियों को आगामी कार्ययोजना के साथ अगले चरण की प्रगति रिपोर्ट जल्द प्रस्तुत करने को कहा है।