US: अमेरिका और ईरान के बीच भीषण सैन्य संघर्ष के चलते तेल की कीमतों में भारी उछाल

नई दिल्ली, 21 जुलाई। पश्चिम एशिया के होर्मुज जलडमरूमध्य में अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य तनाव अपने चरम पर पहुंच गया है। अमेरिकी सेना ने सोमवार देर रात ईरान के सैन्य ठिकानों पर हमलों का एक और दौर शुरू किया। यह लगातार दसवीं रात है जब अमेरिका ईरानी ठिकानों को निशाना बना रहा है। इस संघर्ष का मुख्य उद्देश्य होर्मुज जलडमरूमध्य को व्यापारिक जहाजों के लिए फिर से खोलना है, जो फिलहाल ईरान की सैन्य गतिविधियों के कारण बाधित है।


लगातार दसवें दिन अमेरिकी हवाई हमले जारी
यूएस सेंट्रल कमांड द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, कमांडर-इन-चीफ के आदेश पर सोमवार शाम ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई का नया चरण शुरू किया गया। अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि इन हमलों का लक्ष्य ईरान की उन सैन्य क्षमताओं को नष्ट करना है, जिनका उपयोग होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले कमर्शियल जहाजों पर हमले के लिए किया जा रहा है। अमेरिका का तर्क है कि क्षेत्रीय सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार को सुनिश्चित करने के लिए यह कार्रवाई अनिवार्य हो गई है।


सैनिक की मौत और सहयोगियों पर हमले से भड़का तनाव
इस सैन्य टकराव में तेजी तब आई जब हाल ही में एक अमेरिकी सैनिक की मौत हो गई और ईरान ने अमेरिका के सहयोगी देशों कुवैत, जॉर्डन और बहरीन पर हमले किए। गौरतलब है कि बहरीन में ही अमेरिकी नौसेना का पांचवां बेड़ा तैनात है। इन हमलों के बाद होर्मुज जलडमरूमध्य में व्यापारिक जहाजों की आवाजाही लगभग पूरी तरह ठप हो गई है। दोनों देशों के बीच बढ़ते इस गतिरोध ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता पैदा कर दी है, क्योंकि यह क्षेत्र वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।


कच्चे तेल की कीमतों ने छुआ रिकॉर्ड स्तर
युद्ध जैसे हालातों का सीधा असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर दिखाई दे रहा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें तीन प्रतिशत बढ़कर 90 डॉलर प्रति बैरल के पार चली गई हैं। वहीं, अमेरिका में भी तेल की कीमतों में जबरदस्त इजाफा हुआ है और वहां पेट्रोल की कीमत चार डॉलर प्रति गैलन तक पहुंच गई है। तेल की इन बढ़ती कीमतों ने नवंबर में होने वाले मध्यावधि चुनावों के मद्देनजर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर भारी राजनीतिक दबाव बना दिया है, क्योंकि घरेलू स्तर पर महंगाई एक बड़ा मुद्दा बनती जा रही है।


कूटनीतिक बातचीत और सैन्य तैनाती का विरोधाभास
तनाव के बीच कूटनीति के मोर्चे पर भी कुछ हलचल देखी जा रही है। न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, दोनों पक्षों ने बातचीत की मेज पर लौटने के कुछ संकेत दिए हैं। ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने बताया कि उन्हें तनाव कम करने के संबंध में कुछ विचार प्राप्त हुए हैं। वहीं, अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने कहा कि यदि ईरान अपने व्यवहार में सुधार करता है, तो अमेरिका बातचीत का स्वागत करेगा। हालांकि, शांति के इन संकेतों के विपरीत अमेरिका पश्चिम एशिया में बड़ी संख्या में लड़ाकू विमान भेज रहा है, जिससे संकेत मिलता है कि ट्रंप प्रशासन सैन्य हमलों को और तेज करने की तैयारी में है।


नागरिकों को सुरक्षित निकलने की सलाह
पश्चिम एशिया में बिगड़ते सुरक्षा हालातों को देखते हुए भारत सहित दुनिया के कई देशों ने अपने नागरिकों के लिए चेतावनी जारी की है। भारत ने अपने नागरिकों को पश्चिम एशिया के प्रभावित क्षेत्रों से तुरंत निकलने के निर्देश दिए हैं। लड़ाकू विमानों की बड़े पैमाने पर तैनाती और रोज हो रहे हवाई हमलों ने इस आशंका को और बल दे दिया है कि यदि कूटनीतिक प्रयास विफल रहे, तो यह संघर्ष एक बड़े क्षेत्रीय युद्ध का रूप ले सकता है। फिलहाल वैश्विक समुदाय की नजरें अमेरिका और ईरान के अगले कदमों पर टिकी हैं।

 

Pls read:US: अमेरिका का ईरान पर हमला जारी, सातवीं रात भी बरसीं मिसाइलें

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *